Devotees should be in charge of temple management, RSS Mohan Bhagwat said on government control भक्तों के हाथ में होनी चाहिए मंदिरों की व्यवस्था, सरकारी नियंत्रण पर बोले मोहन भागवत, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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भक्तों के हाथ में होनी चाहिए मंदिरों की व्यवस्था, सरकारी नियंत्रण पर बोले मोहन भागवत

लखनऊ में मोहन भागवत ने कहा कि हिंदू समाज ही वास्तविक पंथ निरपेक्ष समाज है। उन्होंने जातिवाद भुलाने, मंदिरों को भक्तों के हाथों में सौंपने और बच्चों को घर में धार्मिक संस्कार देने पर जोर दिया। साथ ही भारत को ग्लोबल साउथ का भविष्य का नेता बताया।

Thu, 19 Feb 2026 07:36 AMYogesh Yadav लखनऊ। मुख्य संवाददाता
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भक्तों के हाथ में होनी चाहिए मंदिरों की व्यवस्था, सरकारी नियंत्रण पर बोले मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने बुधवार को लखनऊ में प्रमुख जन गोष्ठी में मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कराने के सवाल पर कहा कि हम भी यह चाहते हैं कि मंदिरों का नियंत्रण भक्तों के हाथों में हो। धर्माचार्य और सज्जन लोग मिलकर मंदिरों का संचालन करें। लेकिन इसके लिए हमें तैयारी करनी होगी। विश्व हिन्दू परिषद इस दिशा में काम कर रहा है। भागवत ने कहा कि हिन्दू धर्म ही सच्चा मानव धर्म है। दुनिया मे पंथ निरपेक्षता वाला कोई समाज है तो वह हिन्दू समाज है। संघ का काम देश के लिए है। अनेक जाति, पंथ संप्रदाय बताने से अच्छा है कि हम सब अपनी पहचान हिन्दू माने। सामाजिक समरसता समाज मे एकता का आधार है। ये बातें

हम किसी देश से नहीं दबेंगे

भागवत ने कहा कि भारत एक दिन ग्लोबल साउथ का नेतृत्व करेगा। टैरिफ वार से हमारा कुछ नहीं बिगड़ेगा। हम किसी देश से नहीं दबेंगे, खड़े रहेंगे। कुछ दिन बाद सबकुछ सामान्य हो जाएगा। भारत की अर्थव्यवस्था पूंजीपतियों और बैंको में हाथों में नहीं, हमारे घरों मे है। भारत के पास इतना सामर्थ्य है कि वह दबाव सहन करके भी आगे बढ़ सकता हैं।

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संघ किसी की जाति नहीं पूछता

उन्होने कहा कि जाति, भाषा की पहचान महत्वपूर्ण नहीं हैं। हम सब हिन्दू हैं यह भाव रखना होगा। जाति नाम की व्यवस्था धीरे-धीरे जा रही है। तरुण पीढ़ी के आचरण में यह दिख रहा है। संघ में किसी की जाति नहीं पूछी जाती है। सब हिन्दू सहोदर हैं, इस भाव से काम करते हैं। समाज से जाति को मिटाने के लिए जाति को भुलाना होगा।

बच्चों को पहले घर में धर्म की शिक्षा दें

उन्होने कहा कि दूर-दूर रहने वाले परिवार भावनात्मक रूप से जुड़े रह सकते हैं। हमें अपने बच्चों को नाते रिश्तेदारों, संबंधियों से मिलाते रहना चाहिए। परिवारों को वर्ष मे एक बार कुल परंपरा परिवार के संस्कार के निर्वहन के लिए एकत्रित होना चाहिए। इससे परिवारों में पीढ़ियों का जुड़ाव बना रहता है। एक अच्छे परिवार से अच्छे समाज का निर्माण होता है। उन्होने संयुक्त परिवारों में हो रहे विघटन के संदर्भ में कहा कि आधुनिकता हमारी रगों में है लेकिन हम पश्चिमीकरण के विरोधी हैं। हम अपने बच्चों को पहले घर मे ही धर्म की शिक्षा दें। धन का प्रदर्शन करने की परंपरा हमारी नहीं रही है।

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व्यक्ति निर्माण करता है संघ

संघ व्यक्ति का निर्माण करता है। संघ की कार्यपद्धति में देने की बात है,लेने की नहीं। इसलिए हमारे समर्पित कार्यकर्ताओं में निराशा नहीं आती। अपने प्रयासों से अनेक गांवों को विकसित करने का काम संघ ने हाथ में लिया है। देश में पांच हजार गांवों को संघ ने विकास के लिए चयनित किया है। जिसमें से 333 गांव अच्छे बन गए हैं। ऐसे गांवों में जहां कुछ नही था, वहां ग्रामवासियों ने 12वीं तक विद्यालय बना दिये।

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