बनारस-प्रयागराज के बीच क्रूज-मालवाहक संचालन; सर्वे के लिए पहुंची टीम बैरंग वापस
बनारस-प्रयागराज के बीच क्रूज और मालवाहक जहाजों के संचालन की संभावना तलाशी जा रही है। इसके लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की टीम गंगा का सर्वे करने पहुंची। हालांकि उसे बैरंग ही लौटना पड़ा है। गंगा में पानी अधिक होने के कारण टीम जलमार्ग नहीं खोज पाई है।

गंगा का जलस्तर अधिक होने से प्रयागराज और वाराणसी के मध्य जलमार्ग नहीं बन पा रहा है। पिछले दिनों जहाजों के आवागमन के लिए जलमार्ग बनाने के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण की टीम गंगा का सर्वे करने गई थी। गंगा में अनुमान से अधिक जल होने की वजह से टीम लौट आई।
बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्राधिकरण को प्रयागराज और वाराणसी के मध्य गंगा में जलमार्ग बनाना है। सर्वे के दौरान गंगा का जलस्तर सामान्य से दो मीटर तक अधिक मिला है। अधिक पानी होने के चलते जलमार्ग की पहचान नहीं हो सकी। अब प्राधिकरण की टीम दोबारा सर्वे करेगी। प्राधिकरण के प्रयागराज कार्यालय को नवंबर में जलमार्ग बनाने के लिए कहा गया है।
सर्वे टीम के राजेश ने बताया कि गंगा का प्रवाह बदलता रहता है। खासकर बाढ़ के बाद गंगा के प्रवाह में परिवर्तन होता है। प्रवाह के आधार पर जलमार्ग का निर्धारण होता है। जलमार्ग बनाने के लिए यह देखना जरूरी है कि कहीं बालू तो प्रवाह को प्रभावित नहीं कर रहा है। सर्वे में देखते हैं कि प्रवाह क्षेत्र में संभावित जलमार्ग पर कटान अधिक हो रहा है तो उसे बांस की फट्टियों का बंडल बनाकर रोका जाता है। प्रयागराज और वाराणसी के मध्य पिछले साल जलमार्ग को सुरक्षित करने के लिए बंडल बनाए गए थे।
मालवाहक जहाजों के संचालन की संभावना
प्रयागराज और वाराणसी के मध्य छोटे मालवाहक जहाजों के संचालन की संभावना बढ़ रही है। प्रयागराज में सीमेंट बनाने वाली कंपनी ने पिछले दिनों प्रयागराज स्थित भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के कार्यालय में संपर्क किया था। प्रयागराज की एक और कंपनी वाराणसी से जहाज पर सीमेंट झारखंड भेज रही है। प्राधिकरण के एक अधिकारी ने दावा किया कि जलमार्ग बनने के बाद दो कंपनियों का सीमेंट जहाज से भेजा जा सकता है। इसके अलावा वाराणसी से क्रूज बोट प्रयागराज आ सकता है।




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