पति-पत्नी-बेटा-बेटी का एक ही रात कत्ल करने वाले को कोर्ट ने सुनाई सजा-ए-मौत, 12 साल बाद इंसाफ
मोहन जायसवाल चंद्रपुर में मकान बनवाकर पिछले छह सालों से अपने परिवार के साथ रह रहे थे। घटना वाली रात लगभग साढ़े नौ बजे वह अपने घर के आगे वाले कमरे में से मोबाइल की टोर्च की रोशनी जलाकर बाथरूम के लिए आंगन में जाते हैं उसी समय अभियुक्त रविंद्र उर्फ राजू पटेल अचानक उन पर वार कर देता है।

उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक ही परिवार के चार सदस्यों (पति-पत्नी-बेटा-बेटी) को एक ही रात में मौत के घाट उतारने के मामले में दोषी पाए गए रविंद्र उर्फ राजू पटेल को अदालत ने सजा-ए-मौत (फांसी की सजा) सुनाई है। पूर्वी उत्तर प्रदेश के लोगों को हैरान कर देने वाले इस जघन्य हत्याकांड के 12 साल 4 महीने बाद अदालत ने इंसाफ करते हुए अपना फैसला सुनाया है। इस केस की एफआईआर 29 अक्टूबर 2013 को वाराणसी के चोलापुर थाने में दर्ज हुई थी। रविंद्र ने लोहे की रॉड से ताबड़तोड़ वार कर मोहन प्रसाद जायसवाल, उनकी पत्नी कुसुम उर्फ झूना जायसवाल, बेटे प्रदीप और बेटी पूजा की निर्मम हत्या कर दी थी।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जल निगम में पंप ऑपरेटर के पद पर तैनात रहे मोहन प्रसाद जायसवाल ने रविंद्र को अपने घर के पास शराब पीने, जुआ खेलने और मांसाहार पकाने से मना किया था। उन्होंने रविंद्र के पिता से इसकी शिकायत की थी। बस इसी से नाराज रविंद्र ने इतने जघन्य हत्याकांड को अंजाम दे डाला। वाराणसी के विशेष न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम (यूपीएसईबी) विनोद कुमार की अदालत ने रविंद्र उर्फ राजू पटेल को चार हत्याओं का दोषी पाते हुए फांसी की सजा सुनाई। इसके साथ ही अदालत ने 1.05 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। कोर्ट में अभियोजन की तरफ से एडीजीसी रोहित मौर्य और वादी के वरिष्ठ अधिवक्ता बटुक नाथ मौर्य, रितेश मौर्य, सुधांशु गुप्ता ने इस मामले की पैरवी की।
अभियोजन के अनुसार आदमपुर फकीरपुर चोलापुर निवासी अशोक जायसवाल ने चोलापुर थाने ने 29 अक्टूबर 2013 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया गया था कि वादी के भाई मोहन जायसवाल अपने परिवार के साथ ग्राम चंद्रपुर में मकान बनवाकर पिछले छह सालों से रह रहे थे। घटना वाली रात लगभग साढ़े नौ बजे मोहन जायसवाल अपने घर के आगे वाले कमरे में से मोबाइल की टोर्च की रोशनी जलाकर बाथरूम के लिए आंगन में जाते हैं उसी समय अभियुक्त रविंद्र उर्फ राजू पटेल उनके सामने आ जाता है।
वह लोहे की रॉड से मोहन जायसवाल के सिर पर वार करने लगता है। मोहन जायसवाल की चीख-पुकार सुनकर संदीप जो उसी कमरे में पढ़ रहा था वह निकलता है तो रविंद्र उस पर भी वार करता है। रविंद्र लोहे की रॉड से एक के बाद एक पूरे परिवार के लोगों पर वार करता गया। उसने एक ही रात में परिवार के चार लोगों को मौत के घाट उतार दिया।
वारदात के बाद वह मौके से फरार हो गया। इस घटना में संदीप और आरती गंभीर रूप से घायल हो गए थे। वारदात के यही चश्मदीद दो गवाह बचे थे जिनकी शिनाख्त और गवाही के बाद आखिरकार अदालत ने बुधवार को रविंद्र को फांसी की सजा सुनाई।




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