ज्ञानवापी सील वुजूखाने का कपड़ा बदलने की अर्जी पर कोर्ट का सुनवाई से इनकार, जानें कोर्ट ने क्या कहा
ज्ञानवापी सील वुजूखाने का कपड़ा बदलने की अर्जी पर कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया। प्रशासन की अर्जी पर जिला जज संजीव शुक्ला की कोर्ट सुनवाई कर रही थी। कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा लम्बित है तो निचली अदालत कोई आदेश नहीं दे सकती है।

वाराणसी जिला जज संजीव शुक्ला की अदालत ने सोमवार को शृंगार गौरी–ज्ञानवापी मुकदमे में सील वुजूखाना के फटे कपड़े बदलने की जिला प्रशासन की अर्जी पर आगे सुनवाई करने से मना कर दिया है। अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से पूर्व में कहा गया है कि ज्ञानवापी से जुड़े किसी भी मामले में न तो कोई आदेश दिया जाए और न ही कोई नया मुकदमा स्वीकार हो। इसलिए इस प्रकरण में कोई आदेश नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने मूल मुकदमे की अगली सुनवाई के लिए 06 जनवरी की तिथि निर्धारित की है।
जिला प्रशासन की ओर से नियुक्त विशेष अधिवक्ता राजेश मिश्र ने 08 अगस्त को एक अर्जी दाखिल की थी। जिसमें कहा था कि वुजूखाने में लगा हुआ कपड़ा जर्जर हो गया है। जिसे बदलना अतिआवश्यक है। इसलिए कपड़े को बदलने की अनुमति दी जाए। अंजुमन की ओऱ से आपत्ति दाखिल कर विरोध दर्ज कराया गया। अंजुमन का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए ज्ञानवापी के मामले में किसी भी प्रकार का आदेश देने से मना किया है। इसलिए इस अर्जी पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सकता है।
बाद में जिला जज की अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के सम्बंध में कहा कि पहले ही प्रशासन को वुजूखाना के संरक्षित और सुरक्षित करने का आदेश जारी है। इसलिए इसका अनुपालन करना प्रशासन का दायित्व है। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रशासन अपनी अर्जी को नॉट प्रेस करे। सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से अर्जी को नॉट प्रेस नहीं किया गया। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस अर्जी पर 15 दिसंबर की तिथि आदेश के लिए तय कर दी थी।




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