cm yogi zero tolerance minority welfare officer ruhel azam suspended scholarship waqf scam सीएम योगी का जीरो टॉलरेंस; वक्फ संपत्तियों, छात्रों के स्कॉलशिप को लेकर अल्पसंख्यक अधिकारी सस्पेंड, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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सीएम योगी का जीरो टॉलरेंस; वक्फ संपत्तियों, छात्रों के स्कॉलशिप को लेकर अल्पसंख्यक अधिकारी सस्पेंड

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए मेरठ के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रुहेल आजम को निलंबित कर दिया है। रुहेल आजम पर वक्फ संपत्तियों को बेचने, छात्रवृत्ति घोटाले और सरकारी धन के गबन के गंभीर आरोप हैं।

Thu, 21 May 2026 06:12 AMYogesh Yadav लखनऊ, विशेष संवाददाता
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सीएम योगी का जीरो टॉलरेंस; वक्फ संपत्तियों, छात्रों के स्कॉलशिप को लेकर अल्पसंख्यक अधिकारी सस्पेंड

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितताओं के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' (Zero Tolerance) की नीति को एक बार फिर दोहराया है। शासन ने मेरठ और बागपत जिलों में वक्फ संपत्तियों को अवैध रूप से खुर्द-बुर्द करने, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की छात्रवृत्ति (Scholarship) योजनाओं में भारी शासकीय व वित्तीय अनियमितता बरतने और सरकारी धन के गबन व फर्जीवाड़े के गंभीर आरोपों में मेरठ के जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी रुहेल आजम को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। शासन द्वारा जारी आधिकारिक निलंबन आदेश के मुताबिक, रुहेल आजम निलंबन की इस पूरी अवधि में लखनऊ स्थित अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय से संबद्ध रहेंगे।

दस्तावेज छिपाए और थाने में दर्ज कराई फाइलें चोरी होने की झूठी FIR

यह पूरा मामला वर्ष 2012 से 2017 की अवधि का है, जब रुहेल आजम पर विभिन्न योजनाओं में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे थे। इन आरोपों की गहराई से जांच करने के लिए पिछले साल मेरठ के मंडलायुक्त (Commissioner) ने एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया था। जब जांच समिति ने रुहेल आजम से उस समयावधि से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और पत्रावलियां मांगीं, तो उन्होंने सहयोग करने के बजाय टालमटोल शुरू कर दी।

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शासन और प्रशासन की सख्ती के बावजूद उन्होंने समिति को भ्रामक और गलत सूचनाएं उपलब्ध कराईं। हद तो तब हो गई जब रुहेल ने जांच समिति को लिखित में यह बहाना बना दिया कि कार्यालय का मुख्य डिस्पैच रजिस्टर ही गुम हो गया है। खुद को निर्दोष साबित करने और जांच भटकाने के लिए उन्होंने थाने में कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ फाइलें चोरी होने की झूठी एफआईआर (FIR) भी दर्ज करा दी थी।

EOW की जांच में खुली पोल, अपनी ही अलमारी से बरामद हुईं गोपनीय फाइलें

इस महाघोटाले की समानांतर जांच आर्थिक अपराध शाखा (EOW) भी कर रही थी। रुहेल आजम ने ईओडब्ल्यू को भी गुमराह करने का पूरा प्रयास किया और बिंदुवार मांगी गई सूचनाओं पर फाइलें गायब होने का पुराना राग अलापते रहे। हालांकि, जब जांच एजेंसियों ने कड़ा रुख अपनाते हुए उनके दफ्तर पर दबिश दी, तो वही कथित तौर पर 'गुमशुदा' फाइलें रुहेल आजम के खुद के कार्यालय की सरकारी अलमारी से सकुशल बरामद कर ली गईं। फाइलें जब्त होने के बाद रुहेल के पास कोई रास्ता नहीं बचा और उन्होंने शासन को दिए गए अपने अंतिम स्पष्टीकरण में खुद स्वीकार किया कि अलमारी से बरामद हुई सभी फाइलें उनकी पूरी जानकारी में थीं।

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जांच प्रभावित करने और साक्ष्य मिटाने के दोषी, मिलेगा कड़ा दंड

अल्पसंख्यक अधिकारी की इस कबूलनामा रिपोर्ट के बाद यह पूरी तरह साफ हो गया कि उन्होंने जानबूझकर जांच को बाधित करने, साक्ष्य मिटाने और सरकारी फाइलों को छुपाने की सोची-समझी साजिश रची थी। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए पाया कि रुहेल आजम ने न केवल करोड़ों के छात्रवृत्ति घोटाले और वक्फ संपत्तियों की हेराफेरी में मुख्य भूमिका निभाई, बल्कि जांच को प्रभावित करने का भी घोर अपराध किया है। उत्तर प्रदेश शासन ने उन्हें वृहद दंड (Major Penalty) दिए जाने का पर्याप्त औचित्य पाते हुए सस्पेंड कर विभागीय जांच और कड़ी कानूनी कार्रवाई के आदेश जारी कर दिए हैं।

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