संभल में सरकारी जमीन पर बनी अवैध मजार पर चला बुलडोजर, कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई
संभल प्रशासन ने सरकारी भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर बनाई गई एक मजार को शुक्रवार को ध्वस्त कर भूमि को कब्जामुक्त करा लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। दरअसल खेरे वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार के संबंध में राजस्व विभाग को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत मिली थी।

UP News: उत्तर प्रदेश के संभल जिले में प्रशासन ने सरकारी भूमि पर कथित रूप से कब्जा कर बनाई गई एक मजार को शुक्रवार को ध्वस्त कर भूमि को कब्जामुक्त करा लिया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। जानकारी के अनुसार, गुन्नौर तहसील के बाघऊ गांव में 'खेरे वाले बाबा चमन शाह बाबा दरगाह शरीफ मजार' के संबंध में राजस्व विभाग को सरकारी भूमि पर अतिक्रमण की शिकायत मिली थी।
लेखपाल की रिपोर्ट के आधार पर ग्राम सभा बाघऊ की ओर से गांव निवासी अजीज के खिलाफ 18 अप्रैल, 2026 को उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 67 के तहत तहसीलदार अदालत में मुकदमा दायर किया गया था। अदालत ने सुनवाई के बाद कब्जे को अवैध मानते हुए बेदखली के आदेश दिए थे, जिसके खिलाफ अजीज ने जिलाधिकारी न्यायालय में अपील दायर की, जिसे तीन जून को खारिज कर दिया गया।
जिलाधिकारी अंकित खंडेलवाल ने बताया, ‘यह सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण का मामला था। तहसीलदार अदालत ने कब्जे को अवैध पाया। अपील के दौरान संबंधित पक्ष कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिसके बाद अंतिम आदेश के अनुपालन में अवैध निर्माण हटाया गया।’ पुलिस अधीक्षक कृष्ण कुमार विश्नोई ने बताया कि शासन के निर्देशानुसार 'लैंड बैंक' अवधारणा के तहत सरकारी भूमि को कब्जामुक्त कराया जा रहा है।'
उन्होंने बताया कि जिले में अब तक लगभग 100 हेक्टेयर सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। कार्रवाई के दौरान पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा। वहीं, मजार के मुतवल्ली अजीज ने दावा किया कि यह मजार 500 से 600 वर्ष पुरानी है और आसपास के गांवों के लोग यहां आते रहे हैं।
गुन्नौर के उपजिलाधिकारी विकास चंद्र ने बताया कि संबंधित भूमि पर करीब पांच वर्ष पहले कब्जा कर निर्माण किया गया था। अदालत के आदेश के बाद शुक्रवार को निर्माण हटाकर भूमि को कब्जामुक्त करा लिया गया।
वाराणसी में मजार और मस्जिद पर चला बुलडोजर
उधर, वाराणसी में जिला प्रशासन ने काशी रेलवे स्टेशन परिसर के अंदर स्थित एक मजार और एक मस्जिद की इमारत को ध्वस्त करा दिया। आधिकारिक सूत्रों ने बुधवार को बताया कि यह कार्रवाई जमीन के मालिकाना हक को लेकर चल रहे एक विवाद में अदालत के आदेश के बाद मंगलवार की रात को की गई। अधिकारियों का दावा था कि यह जमीन रेलवे की है।
मुस्लिम पक्ष के सदस्यों ने आरोप लगाया कि यह मस्जिद कई सौ साल पुरानी थी और अजगैब शहीद के नाम से जानी जाने वाली यह मजार भी इस जगह पर लंबे समय से मौजूद थी। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने कहा कि यह जमीन रेलवे की पुरानी संपत्ति का हिस्सा थी और पिछले कुछ सालों में इस पर कब्जा कर लिया गया था।
अधिकारियों के मुताबिक यह मामला साल 2024 में शुरू किए गए 'काशी मॉडल रेलवे स्टेशन' प्रोजेक्ट के तहत कराये गये जमीन के सर्वे के दौरान सामने आया। एक अधिकारी ने बताया कि जमीन के रिकॉर्ड की पैमाइश और जांच के दौरान यह मजार और मस्जिद रेलवे की जमीन पर बनी होने की बात सामने आने पर संबंधित लोगों को कब्जा हटाने का नोटिस जारी किया गया था लेकिन जमीन खाली नहीं किए जाने पर मामला अदालत में पहुंचा था।




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