ताजा हुई ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड की याद, उम्रकैद काट रहे पूर्व विधायक विजय सिंह के घर हुआ धमाका
ब्रह्मदत्त द्विवेदी के लिए 10 फरवरी 1997 की वो तारीख जिंदगी का आखिरी दिन बन गई। उस रात ब्रह्मदत्त फर्रुखाबाद में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। शादी से लौटते वक्त वह अपनी कार में बैठे ही थे कि कुछ हथियारबंद हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

भाजपा नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड में वाराणसी जेल में उम्रकैद काट रहे पूर्व विधायक विजय सिंह के फर्रुखाबाद के नाला मछरट्टा स्थित घर में मंगलवार शाम करीब 7:30 बजे भीषण विस्फोट हो गया। धमाके में बेसमेंट की छत उड़ गई। चार मंजिला भवन की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर हो गए। घटना में उनके दो बेटों समेत छह लोग घायल हो गए, जिनमें तीन को लखनऊ रेफर किया गया है। इस धमाके से एक बार फिर 1997 में हुए यूपी के चर्चित ब्रह्मदत्त द्विवेदी हत्याकांड की याद ताजा कर दी है।
उत्तर प्रदेश की सियासत में ब्रह्मदत्त द्विवेदी बड़ा नाम थे। उन्हें बसपा प्रमुख मायावती का जीवन बचाने वाला नेता माना जाता है। साल 1995 के गेस्ट हाउस कांड में जब मायावती पर हमला हुआ था तो वो ब्रह्मदत्त द्विवेदी ही थे जिन्हें बसपा प्रमुख ने पहला फोन किया था। कहा जाता है कि ब्रह्मदत्त द्विवेदी थे तो भाजपा नेता लेकिन बीएसपी सुप्रीमो मायावती भी उन पर बहुत भरोसा करती थीं। कहा जाता है कि 1997 में वह भाजपा की तरफ से बसपा से गठबंधन की कोशिशों में जुटे हुए थे। शर्तें भी करीब-करीब तय हो गई थीं। गठबंधन का ऐलान कभी भी हो सकता था लेकिन उसी बीच ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या हो गई।
10 फरवरी 1997 की वो रात
ब्रह्मदत्त द्विवेदी के लिए 10 फरवरी 1997 की वो तारीख जिंदगी का आखिरी दिन बन गई। उस रात ब्रह्मदत्त द्विवेदी फर्रुखाबाद में एक शादी समारोह में शामिल होने गए थे। शादी से लौटते वक्त ब्रह्मदत्त द्विवेदी अपनी कार में बैठे ही थे कि कुछ हथियारबंद हमलावरों ने उन पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोलियों की तड़तड़ाहट से पूरा इलाका गूंज गया। यूपी में भाजपा के कद्दावर नेता ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या कर दी गई। इस मामले में प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर बह्मदत्त द्विवेदी के परिवार ने नामजद एफआईआर दर्ज कराई थी। इसमें फर्रुखाबाद के ही स्थानीय विधायक विजय सिंह और तीन अज्ञात पर आरोप लगाया गया था। लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद विजय सिंह इस मामले में दोषी पाए गए। इस वक्त वह इस मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक विवेचना के दौरान इस सनसनीखेज हत्याकांड में लिखाए गए तीनों अज्ञात के भी नाम सामने आ गए थे। इनमें कुख्यात शूटर संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा, बलविंदर सिंह और रमेश ठाकुर के नाम शामिल थे। 2023 में लखनऊ की सिविल कोर्ट में हुई गोलीबारी में कुख्यात संजीव माहेश्वरी उर्फ जीवा की मौत हो चुकी है।
क्यों हुई थी ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या?
ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या के मामले में अदालत में सीबीआई ने आरोप लगाया था कि विजय सिंह ने राजनैतिक रंजिश के नाते इस कांड को अंजाम दिया। बताया गया कि वारदात के कुछ दिन पहले दोनों में लड़ाई भी हुई थी। कहा गया कि राजनैतिक रंजिश के चलते ही ब्रह्मदत्त द्विवेदी की हत्या कराई गई।




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