Bodies were exchanged at BRD Medical College gorakhpur revealed before the funeral BRD मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही, शवों की कर दी अदला-बदली, अंतिम संस्कार से पहले खुला राज, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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BRD मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही, शवों की कर दी अदला-बदली, अंतिम संस्कार से पहले खुला राज

बीआरडी मेडिकल कॉलेज गोरखपुर के बाल रोग विभाग में इलाज के दौरान दो नवजातों की मौत के बाद गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। मृत नवजातों के शव सौंपने में अदला-बदली हो जाने से दो परिजनों में हड़कंप मच गया।

Mon, 12 Jan 2026 11:00 AMPawan Kumar Sharma हिन्दुस्तान संवाद, गोरखपुर
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BRD मेडिकल कॉलेज की बड़ी लापरवाही, शवों की कर दी अदला-बदली, अंतिम संस्कार से पहले खुला राज

यूपी के गोरखपुर स्थित बीआरडी मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभाग के 500 बेड एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में इलाज के दौरान दो नवजातों की मौत के बाद गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। मृत नवजातों के शव सौंपने में अदला-बदली हो जाने से संतकबीरनगर और गोरखपुर के चिलुआताल के रहने वाले परिजनों में हड़कंप मच गया। संतकबीरनगर में बच्चे के अंतिम संस्कार से पहले मामला खुला तो परिजनों ने रविवार को मेडिकल कॉलेज पहुंचकर हंगामा किया। इसके बाद चिलुआताल में दफन किए जा चुके बच्चे का शव कब्र से निकालकर उसके परिजनों को सौंपा गया, तब मामला शांत हुआ।

संतकबीरनगर जिले के केकरहा गांव, थाना धनघटा निवासी प्रीति पत्नी सनोज अग्रहरि ने 7 जनवरी को शनिचरा सीएचसी में सामान्य प्रसव के जरिए एक पुत्र को जन्म दिया था। गंदा पानी पेट में जाने शिकायत के बाद नवजात को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के 500 बेड स्थित एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था, जहां इलाज के दौरान शनिवार को उसकी मौत हो गई। वहीं गोरखपुर जिले के चिलुआताल थाना क्षेत्र के सिक्टौर गांव निवासी शिल्पी पत्नी राजू की नवजात बच्ची को भी गंभीर हालत में शनिवार को बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया था। उसकी भी मौत हो गई। दोनों शव रविवार को उनके परिजनों को सौंप दिए गए।

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संतकबीरनगर के परिजन अंतिम संस्कार से पहले जब नवजात को नहलाने लगे तो पता चला बेटे की जगह किसी बच्ची का शव मिल गया है। यह देख परिजन घबरा गए और अपने बच्चे के जीवित होने की आशा में मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। एसएनसीयू में पहुंचकर उन्होंने शव बदलने का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने डायल 112 पर पुलिस को भी सूचना दे दी। जूनियर डॉक्टरों की टीम पहुंची और परिजनों को समझाने का प्रयास किया। जांच के दौरान दूसरे मृत नवजात के परिजनों से संपर्क किया गया, जिन्होंने बताया कि उन्होंने उसे दफना दिया है। इसके बाद शव कब्र से बाहर निकाला गया, जो लड़के का था। पुष्टि के बाद दोनों मृत नवजातों के शवों को उनके वास्तविक परिजनों के सुपुर्द किया गया। तब मामला शांत हुआ। इस घटना अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

भर्ती बच्चों का लिया जाता है फुटप्रिंट, हाथ में लगा रहता है टैग

बालरोग की विभागाध्यक्ष डॉ. अनीता मेहता ने बताया कि विभाग में भर्ती बच्चों की पहचान बदलने का सवाल ही नहीं है। भर्ती होने के बाद बच्चों के पैरों के निशान लिए जाते हैं। वह बीएचटी पर होते हैं। करीब एक वर्ष तक के बच्चों के पांव के निशान एक समान नहीं होते। उनका आकार भी अलग होता है। हर बच्चे के हाथ में टैग लगाया जाता है। उसमें उसकी जन्मतिथि के साथ मां का नाम और पता रहता है। हाथ के टैग और पांव के निशान के आधार पर बच्चे की पहचान की जाती है।

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मोर्चरी में बदल गए थे बुजुर्ग और युवक के शव

बीआरडी के मोर्चरी से 70 साल के बुजुर्ग का शव भी पिछले साल युवक के शव से बदल गया था। गुलरिहा क्षेत्र के हरसेवकपुर नंबर दो में बुजुर्ग का शव टिनशेड के मकान में मिला था। गुलरिहा पुलिस ने शिनाख्त के लिए शव मोर्चरी में रखवा दिया था। पता चला कि यह शव सहजनवा क्षेत्र के युवक का था। युवक की जगह बुजुर्ग का शव अज्ञात में दफन कर दिया गया था। बाद में युवक की पहचान होने पर क्रब से शव निकाल कर बुजुर्ग के परिवारीजनों का सौंपा गया था।

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