ईद उल अजहा त्याग, इंसानियत और भाईचारे का पैगाम
Bijnor News - ईद उल अजहा के मौके पर शहर की मस्जिदों में कुर्बानी की अहमियत पर चर्चा हुई। उलेमा ने बताया कि कुर्बानी केवल जानवरों की बलि नहीं, बल्कि अल्लाह की रजा के लिए त्याग का प्रतीक है। हजरत इब्राहिम की सुन्नत को याद करते हुए, जरूरतमंदों की मदद करने की अपील की गई।

ईद उल अजहा के करीब आते ही शहर की मस्जिदों में जुमे की नमाज से पहले कुर्बानी की अहमियत और उसकी फजीलत बयान की गई। उलेमा ने कहा कि कुर्बानी केवल जानवर जिबह करने का नाम नहीं, बल्कि अल्लाह की रजा के लिए अपनी चाहतों और मोह का त्याग करने का पैगाम है। शुक्रवार को शहर की चाहशीरी जामा मस्जिद, काजीपाड़ा मरकज वाली मस्जिद और अन्य प्रमुख मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी मौजूद रहे। उलेमा ने लोगों से ईद उल अजहा को सादगी, भाईचारे और जरूरतमंदों की मदद के जज्बे के साथ मनाने की अपील की।
हजरत इब्राहिम की सुन्नत है कुर्बानी
चाहशीरी जामा मस्जिद के इमाम मौलाना वरीस अहमद ने नमाजियों को खिताब करते हुए कहा कि कुर्बानी हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की उस महान सुन्नत की याद है, जिसमें उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर सबसे प्यारी चीज तक कुर्बान करने का जज्बा दिखाया था। उन्होंने कहा कि मुसलमानों को इस अमल को पूरी सच्चाई और नियत के साथ जारी रखना चाहिए। कुर्बानी का असली मकसद दिखावा नहीं, बल्कि अल्लाह की रजा हासिल करना और इंसान के अंदर त्याग की भावना पैदा करना है।
जरूरतमंदों तक खुशियां पहुंचाने का जरिया
गजरौला शिव जामा मस्जिद के इमाम मुफ्ती ग्यासुद्दीन कासमी ने कहा कि मौजूदा आर्थिक परिस्थितियों में कुर्बानी का महत्व और भी बढ़ जाता है। अपनी कमाई से अल्लाह की राह में खर्च करना हजरत इब्राहिम और हजरत इस्माइल अलैहिस्सलाम के महान त्याग की याद दिलाता है। उन्होंने एक हदीस का हवाला देते हुए कहा कि कुर्बानी के जानवर के शरीर पर जितने बाल होते हैं, उतनी नेकियां कुर्बानी करने वाले को मिलती हैं। कुर्बानी का गोश्त गरीबों, असहायों और जरूरतमंदों तक पहुंचाना समाज में भाईचारे और सामाजिक समरसता को मजबूत करता है। इससे आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी ईद की खुशियों में शामिल हो पाते हैं।
गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग का समर्थन
तकरीर के दौरान मुफ्ती ग्यासुद्दीन कासमी ने जमीयत उलेमा-ए-हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी के उस बयान का पूर्ण समर्थन किया। जिसमें मौलाना मदनी ने सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की है। साथ ही उन्होंने गोवंश संरक्षण को लेकर सख्त और समान कानून लागू करने की बात कही है।
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