पश्चिमी यूपी में भाजपा का 'जाट कार्ड' बनेंगे भूपेंद्र चौधरी, योगी मंत्रिमंडल हुई वापसी, मंत्रीपद की ली शपथ
यूपी भाजपा के पूर्व भाजपा अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी को एक बार फिर से सरकार में एंट्री मिल गई है। रविवार को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उन्हें मंत्रीपद की शपथ दिलाई। करीब तीन साल तक संगठन में रहे भूपेंद्र चौधरी जाटलैंड में अच्छी पकड़ रखते हैं।

Yogi Cabinet Expansion: योगी मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर कई महीनों से चल रही अटकलें अब खत्म हो गई हैं। रविवार को राजभवन में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छह नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें भूपेंद्र चौधरी भी शामिल रहे। भूपेंद्र चौधरी ने राज्यपाल की मौजूदगी में मंत्री पद की शपथ ले ली है। भूपेंद्र चौधरी जाट समाज में अच्छी पकड़ रखते हैं। भूपेंद्र चौधरी पहले भी सरकार में रह चुके हैं। इसके बाद इन्हें यूपी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अब फिर से उनकी सरकार में वापसी हो रही है।
सियासी विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा नेतृत्व मिशन 2027 की बिसात पर अपने उन रणनीतिक चेहरों को फिर से मुख्य भूमिका में ला रहा है, जो क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों की काट ढूंढने में माहिर हैं। इस पूरी स्क्रिप्ट के केंद्र में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी हैं, जिनकी कैबिनेट में कद्दावर वापसी की संभावनाओं ने पश्चिमी यूपी के सियासी पारे को बढ़ा दिया है।
जाटलैंड की सियासत पर मजबूत पकड़ रखते हैं चौधरी भूपेंद्र
14 दिसंबर 2025 को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी पंकज चौधरी को सौंपे जाने के बाद से ही भूपेंद्र चौधरी की भूमिका को लेकर कयासों का बाजार गर्म था। जाटलैंड की सियासत पर मजबूत पकड़ और संगठन के भीतर सर्वमान्य छवि वाले चौधरी को सरकार में शामिल करना भाजपा की सोची-समझी रणनीति है। पार्टी नेतृत्व उन्हें पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उस दुर्ग को सुरक्षित रखने की चाबी मानता है, जहां किसान आंदोलन और क्षेत्रीय जातीय समीकरण अक्सर चुनौती पेश करते रहे हैं। तीन साल से अधिक समय तक प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर संगठन को धार देने वाले भूपेंद्र चौधरी को अब सरकार के जरिए क्षेत्रीय आकांक्षाओं को संतुष्ट करने का जिम्मा मिल सकता है। दरअसल, राजभवन में मुख्यमंत्री की इस सक्रियता ने साफ कर दिया है कि दिल्ली से हरी झंडी मिलने के बाद फेरबदल की सूची अब अंतिम रूप से तैयार है। अब केवल औपचारिक घोषणा की औपचारिकता शेष है, जिसके बाद यूपी की सत्ता में नए समीकरणों का उदय होगा।
'कठिन' जीत के नायकों पर भी नजर
इस विस्तार में मुरादाबाद मंडल केवल भूपेंद्र चौधरी के नाम तक सीमित नहीं रहने वाला है। रामपुर के विधायक आकाश सक्सेना और कुंदरकी से नवनिर्वाचित विधायक रामवीर सिंह के नाम भी रेस में मजबूती से उभरे हैं। आकाश सक्सेना ने जहां रामपुर के अभेद्य किले में सेंध लगाई, वहीं रामवीर सिंह ने कुंदरकी के मुस्लिम बाहुल्य समीकरणों को ध्वस्त कर पार्टी के लिए असंभव जीत दर्ज की। चर्चा है कि इन दोनों चेहरों को कैबिनेट में जगह देकर भाजपा यह स्पष्ट संदेश देना चाहती है कि जो नेता जमीनी संघर्ष कर 'अभेद' मानी जाने वाली सीटों पर कमल खिलाएंगे, उनके लिए सत्ता के द्वार खुले हैं।
1989 से 2026: वफादारी और सांगठनिक कौशल का इनाम
भूपेंद्र चौधरी का सियासी ग्राफ भाजपा की कैडर-आधारित राजनीति की शुद्धि को दर्शाता है। 1989 में सदस्यता ग्रहण करने से लेकर 1996 में जिलाध्यक्ष और फिर चार बार क्षेत्रीय अध्यक्ष रहने का उनका अनुभव सरकार के लिए प्रशासन और कार्यकर्ताओं के बीच कड़ी का काम करेगा। 2016 और 2022 में विधान परिषद सदस्य के रूप में संसदीय कार्यप्रणाली का उनका अनुभव उन्हें एक परिपक्व मंत्री के रूप में स्थापित करता है।




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