यूपी के कुशीनगर में 31 वर्षों बाद मनाई जाएगी जन्माष्टमी, 1994 के बाद इस वजह से बंद हो गई परंपरा
जन्माष्टमी वैसे तो हर यूपी के सभी थानों में धूमधाम से मनाई जाती है लेकिन यहां के कुशीनगर जिले में पिछले 31 सालों से यह नहीं मनाई जा रही है। 1994 के बाद से यहां जन्माष्टमी नहीं मनाई गई है। हालांकि इस साल मनाने का फैसला किया गया है।

यूपी के कुशीनगर जिले में 31 वर्षों के अंतराल के बाद इस वर्ष जन्माष्टमी का पर्व थानों में मनाया जाएगा। भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाने वाली जन्माष्टमी उत्तर प्रदेश के सभी थानों में परंपरागत रूप से श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई जाती है। जबकि कुशीनगर के थानों में साल 1994 के बाद से जन्माष्टमी मनाना बंद कर दिया गया था। इसका कारण यहां हुआ एक एनकाउंटर था। इस एनकाउंटर में छह पुलिस वालों की मौत हो गई थी। इसी के बाद से जन्माष्टमी का आयोजन स्थगित कर दिया गया था।
दरअसल कुशीनगर में 30 अगस्त 1994 को कुबेरस्थान थाना क्षेत्र के पचरुखिया जंगल में डकैतों के साथ मुठभेड़ हो गई थी। यह घटना उस समय हुई थी जब नवगठित पडरौना (अब कुशीनगर) अपने पहले जन्माष्टमी उत्सव की तैयारी कर रहा था। इसी घटना में छह पुलिसकर्मियों की जान चली गई थी।
अधिकारियों के अनुसार, इस त्रासदी के बाद पुलिस विभाग ने इस त्योहार को नहीं मनाने का निर्णय लिया और यह दिन जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों की याद में समर्पित कर दिया गया था। इसके चलते पिछले तीन दशकों से अधिक समय से जिले के किसी भी थाने में जन्माष्टमी का आयोजन नहीं किया गया।
इस वर्ष पुलिस अधीक्षक (एसपी) संतोष कुमार मिश्रा ने जिले के सभी थानों को जन्माष्टमी पर्व मनाने का निर्देश दिया है। अधिकारियों ने बताया कि यह निर्णय जान गंवाने वाले पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ-साथ पुलिस बल के भीतर परंपरा और मनोबल को बहाल करने के उद्देश्य से लिया गया है। यूपी की योगी सरकार ने भी जन्माष्टमी धूमधाम से मनाने खास तैयारी की है। इसके लिए अलग से बजट का भी इंतजाम किया गया है। श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर सभी थानों को रंगीन झालरों से सजाया जाता है। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन होता है।




साइन इन