13 जिलों में बिजली के एक लाख स्मार्ट मीटर वालों का बैलेंस गड़बड़ाया, बहुतों का बैलेंस हुआ जीरो
यूपी के 13 जिलों में बिजली के एक लाख स्मार्ट मीटर वालों का बैलेंस गड़बड़ा गया है। बहुतों का बैलेंस तो जीरो हो गया है। पावर कॉरपोरेशन में हुई बैठक के दौरान पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने यह जानकारी दी।

पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में तकरीबन एक लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं के बैलेंस की गणना एकाएक बिगड़ गई। सिस्टम में आई बार-बार खराबी की वजह से बहुत से लोगों का बैलेंस शून्य दिखाने लगा। उपयोग और बैलेंस की गणना प्रभावित रही। ये उपभोक्ता पश्चिमांचल के 13 जिलों से थे। बीते दिनों पावर कॉरपोरेशन में हुई बैठक में पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने इस बारे में जानकारी दी। बताया कि पूरा सिस्टम नियंत्रण से बाहर हो गया था।
स्मार्ट मीटर के बैलेंस को लेकर कई बार उपभोक्ता छिटपुट सवाल उठाते रहे हैं। हालांकि, इस तरह बड़े स्तर पर सिस्टम फेल होने जैसी बात पहली बार सामने आई है। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के मुताबिक 11 दिसंबर को साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट (एसएटी) कई बार बाधित हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का बैलेंस शून्य हो गया। एक लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के मीटरों में शुल्क गणना प्रणाली विफल हो गई।
ये हैं 13 जिले
पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम के तहत मेरठ, गाजियाबाद, गौतमबुद्ध नगर, बुलंशहर, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, रामपुर, बागपत, शामली, हापुड़, अमरोहा और संभल जिले आते हैं। पश्चिमांचल ने यह भी बताया कि वह स्वयं अपने डाटा के लिए पूरी तरह से एडवांस्ड मीटरिंग इंफ्रास्ट्रक्चर सर्विस प्रोवाइडर (एएमआईएसपी) पर निर्भर है। दस महीना बीत जाने के बावजूद अब तक डाटा निकालने का कोई तरीका नहीं मिला है।
पोस्टपेड से प्रीपेड में लाने पर भी हो रही दिक्कत
पश्चिमांचल ने समीक्षा बैठक के दौरान यह भी बताया कि नए स्मार्ट प्रीपेड मीटर मीटर डाटा मैनेजमेंट सिस्टम (एमडीएमएस) में शामिल नहीं किए गए हैं, जिससे फीडर स्तर की ऊर्जा लेखांकन और रिपोर्टिंग प्रभावित हो रही है। यह भी बताया गया कि शामली जैसे जिलों में तमाम उपभोक्ता ऐसे रहे, जिन्होंने पैसा जमा किया और उसके बाद भी उन्हें कई दिनों का बिजली नहीं दी जा सकी। आउटडेटेड उपभोक्ता ऐप और गलत डाटा की वजह से ऐसा हुआ।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था की हो जांचः उपभोक्ता परिषद
राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने कहा कि अब यह मामला सामने आने के बाद स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था की जांच करवाया जाना जरूरी है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के एमडीएम सिस्टम में तमाम खामियां सामने आ रही हैं, लेकिन उन्हें छुपाया जा रहा है। पहली बार पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम ने इसे स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि जब यह मामला सामने आया तो उन्होंने पश्चिमांचल के निदेशक (वाणिज्य) से बात की, लेकिन वह कोई स्पष्ट और संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। मामला गंभीर है क्योंकि ऐसा ही अन्य जगहों पर भी हो सकता है।
फिलहाल पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम में 10 लाख 82 हजार 666 स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जा चुके हैं। पूरे प्रदेश में अभी तकत 56 लाख से अधिक स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए गए हैं। 37 लाख से अधिक उपभोक्ताओं के मीटर प्रीपेड मोड में बदले जा चुके हैं। 34 लाख मीटरों का साइट एक्सेप्टेंस टेस्ट हुआ है।




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