असली बाप के हो तो मर जाओ...चाची के ताने से आहत भाई-बहन ने जहर खाकर की आत्महत्या
बांदा में मुकदमा हारने के बाद चाचा-चाची ने भतीजी और भतीजे से तत्काल मकान खाली करने को कहा। आरोप है कि चाची ने जहर की पुड़िया देकर कहा- असल बाप के हो तो जाओ मर जाओ। इसके बाद भाई-बहन ने नदी किनारे जाकर आत्महत्या कर ली।

यूपी के बांदा से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। जहां मुकदमा हारने के बाद चाचा-चाची ने भतीजी और भतीजे से तत्काल मकान खाली करने को कहा। आरोप है कि चाची ने जहर की पुड़िया देकर कहा- असल बाप के हो तो जाओ मर जाओ। इसके बाद भाई व बहन स्कूटी से बरछा गांव के पास बागै नदी किनारे पहुंचे और सोमवार को शाम दोनों ने एक साथ जहर खा लिया। दोनों की मौके पर मौत हो गई। जानकारी मिलने पर सीओ नरैनी व थानाध्यक्ष कालिंजर फॉरेंसिक टीम के साथ पहुंचे और दोनों को एंबुलेंस से सीएचसी पहुंचाया, यहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। पिता व भाई ने चाचा-चाची पर आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगाया है।
नरैनी कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत कस्बा के शास्त्री नगर में प्रकाश चंद्र गुप्ता उर्फ मिठाई लाल की 34 वर्षीय पुत्री चंचल गुप्ता उर्फ शुभ्रता और 30 वर्षीय पुत्र आनंद प्रकाश गुप्ता उर्फ सोम सोमवार शाम साढ़े चार बजे स्कूटी से बागै नदी में बरछा पुल के पास गए और वहां दोनों ने जहर खाकर आत्महत्या कर ली। देर शाम जब चरवाहों की नजर पड़ी तो पुलिस व उनके परिजनों को जानकारी हुई। पिता प्रकाशचंद्र गुप्ता व भाई ज्ञान प्रकाश गुप्त सहित परिवार के अन्य लोग जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंच गए। कुछ ही देर में नरैनी कोतवाली कस्बा इंचार्ज रक्षा सेन, उपनिरीक्षक शिववीर, शुभम कौशिक, कालिंजर थाना प्रभारी सुखराम सिंह पुलिस फोर्स व फोरेंसिक टीम के साथ मौके आए। पुलिस ने तत्काल दोनों को एंबुलेंस से स्वास्थ्य केंद्र भेजा, जहां डॉ.विकास यादव ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। मंगलवार को यहां मेडिकल कॉलेज में दोनों का पोस्टमार्टम कराया गया।
पिता प्रकाशचंद्र गुप्ता ने बताया कि नरैनी कस्बा में शास्त्री नगर स्थित मकान में वे किराना व जनरल स्टोर की दुकान किए हैं। उसी में रहते हैं। इस मकान का तहसील में मुकदमा चल रहा था। कुछ दिन पहले इस मकान का फैसला चाचा व चाची के पक्ष में आया। सोमवार को परिवार में झगड़ा हुआ और जहर खाकर आत्महत्या के लिए उकसाया। आरोप है कि उनकी चाची ने दोनों को जहर की पुड़िया दी। कहा कि असल बाप के हो तो जाओ मर जाओ। इससे आहत होकर चंचल व आनंद ने जान दे दी।
पैतृक घर में तीन भाइयों का था हिस्सा
कस्बा के अतर्रा मार्ग पर 33 फुट चौड़े और 120 फुट लंबाई के घर में प्रकाशचन्द्र रहते हैं। बड़े भाई मृतक गुलाब चन्द्र को बांदा मार्ग का घर दिया गया था। दूसरे नंबर के भाई तेजचंद्र कई दशक पहले फतेहपुर में बस गए थे। कुछ साल पहले इन्होंने भी घर के अपने हिस्से की जमीन प्रकाश चंद्र को बेच दी थी। सबसे छोटे भाई सुभाषचंद्र ने भी कई साल पहले अपने हिस्से में से घर के फ्रंट में दस फीट चौड़ी व तीस फीट लंबी जमीन प्रकाश चंद्र को बेच दी थी। अभी सुभाष की पीछे कुछ जमीन है। साथ ही निकलने के लिए चार फुट चौड़ाई की गैलरी भी है। इस जमीन को लेकर भाई सुभाष से पूर्व में भी विवाद होता रहा है। पुलिस क्षेत्राधिकारी सौरभ सिंह का कहना है कि घरेलू विवाद में भाई बहन ने जहर खाया है। उनके मुंह से झाग निकल रहा था। अस्पताल में दोनों को मृत घोषित कर दिया गया। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।
पिता कोर्ट के फैसले को बता रहे गृह कलह की वजह
मृतक आनंद की चाची सुधा ने दस वर्ष पहले कोर्ट में घरेलू हिंसा, अंतरिम भरण-पोषण का वाद दायर किया था। इसके बाद मामला तहसील स्थानांतरित हो गया। कोर्ट ने 19 जनवरी को फैसला सुनाया। फैसले में प्रकाश चंद व इनके छोटे भाई सुभाषचंद्र को एक-एक लाख रुपये का अर्थदंड सुनाया था। सुभाष की पत्नी सुधा को प्रति माह तीन-तीन हजार देने का आदेश दिया था। फैसले में यह भी कहा गया कि पीड़िता सुधा को पैतृक मकान में रहने दिया जाए व भविष्य में घरेलू हिंसा न की जाए। फैसला आने के बाद घर में कलह ज्यादा हो गई थी।
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