यूपी पंचायत चुनाव से पहले ग्राम प्रधानों की बढ़ गई टेंशन, अब नए आदेश ने उड़ाई नींद
यूपी सरकार द्वारा प्रशासक बनाए जाने के फैसले से ग्राम प्रधान खुशी से उछल पड़े, लेकिन अब नए आदेश ने उनकी टेंशन को बढ़ा दिया है। नए आदेश में कहा गया है कि बिना डीएम की अनुमति के प्रशासक बने प्रधान कोई भी काम नहीं करा सकेंगे।

UP Gram Pradhan News: यूपी पंचायत चुनाव तो फिलहाल टल गए हैं। ऐसे में सरकार ने ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया है। यूपी सरकार के इस फैसले से ग्राम प्रधान तो पहले बहुत खुश हुए, लेकिन अब नए आदेश ने प्रधानों की नीदं उड़ा दी है। सरकार के इस नए आदेश से ग्राम प्रधानों का सुख-चैन सब उड़ गया। नए आदेश में कहा गया है कि ग्राम प्रधानों को प्रशासक तो बना दिया गया है लेकिन कोई भी नया काम कराना होगा या फंड खर्च करना होगा तो इसके लिए पहले डीएम की अनुमति लेनी होगी। यूपी सरकार की ओर से प्रदेश के 57694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी दिए जाने के बाद अब उनके काम के लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है।
प्रमुख सचिव पंचायती राज अनिल कुमार की ओर से इस संबंध में शनिवार को शासनादेश जारी किया गया। ग्राम पंचायतों के निवर्तमान प्रधानों ने प्रशासक के रूप में 27 मई से काम संभाला है। ऐसे में अब इस तिथि से वह कोई भी नया काम कराने के लिए जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से डीएम को प्रस्ताव भेजेंगे। फिर डीएम की अनुमति से ही वह कोई नया काम करा सकेंगे।
पहले से स्वीकृति कार्यों का भुगतान करा सकेंगे प्रशासक
सिर्फ ग्राम पंचायतों के प्रशासक नियुक्त किए जाने से पूर्व की तिथि से स्वीकृत व अनुमोदित दैनिक, निर्माणाधीन, मरम्मत कार्य और पूर्ण हो चुके कामों का भौतिक व तकनीकी मूल्यांकन कराते हुए भुगतान प्रशासक पूर्व की भांति कर सकेंगे। ऐसी ग्राम पंचायत जहां पर पूर्व में प्रशासनिक समिति का गठन किया गया है या प्रधान का पद रिक्त है, वहां सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्रशासक के रूप में नामित किया जाएगा। केंद्र व राज्य की यदि कोई नई योजना या आयोग की संस्तुतियां जारी होती हैं तो प्रशासक उससे संबंधित प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के माध्यम से जिलाधिकारी के समक्ष प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त करेगा।
प्रधानों को प्रशासक बनाने के अध्यादेश को चुनौती
इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के प्रदेश सरकार के गत 25 मई के अध्यादेश को चुनौती दी गई है। इस अध्यादेश से वर्तमान ग्राम प्रधानों को आगामी छह माह तक प्रशासक के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राम पंचायत चुनावों को स्थगित किया जा रहा है। ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्रों युधिष्ठिर वर्मा व आयुष पांडेय की याचिका पर सुनवाई के दौरान जब यह तकनीकी आपत्ति सामने आई कि याचिका में 2017 के अधिनियम संख्या 6 की धारा 12(3ए) की वैधता को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी गई है तो याचियों ने स्थिति को समझते हुए याचिका में संशोधन करने के लिए समय मांगा। कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की मोहलत देते हुए याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तारीख लगा दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंड ने दिया है।




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