UP government ordinance appointing gram pradhan administrator challenged High Court time granted to amend petition ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने वाले यूपी सरकार के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती, याचिका में संशोधन का समय मिला, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने वाले यूपी सरकार के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती, याचिका में संशोधन का समय मिला

यूपी पंचायत चुनाव के टलने के कारण यूपी सरकार ने ग्राम प्रधानों को छह महीने के लिए प्रशासक बना दिया है। यूपी सरकार के इस अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। जिसकी सुनवाई अब 22 जून को होगी।

Fri, 5 June 2026 07:53 PMDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, ​प्रयागराज, विधि संवाददाता
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ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने वाले यूपी सरकार के अध्यादेश को हाईकोर्ट में चुनौती, याचिका में संशोधन का समय मिला

Allahabad Highcourt News: इलाहाबाद हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल कर ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करने के प्रदेश सरकार के गत 25 मई के अध्यादेश को चुनौती दी गई है। इस अध्यादेश से वर्तमान ग्राम प्रधानों को आगामी छह माह तक प्रशासक के रूप में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप ग्राम पंचायत चुनावों को स्थगित किया जा रहा है।

ईश्वर शरण डिग्री कॉलेज के विधि छात्रों युधिष्ठिर वर्मा व आयुष पांडेय की याचिका पर सुनवाई के दौरान जब यह तकनीकी आपत्ति सामने आई कि याचिका में 2017 के अधिनियम संख्या 6 की धारा 12(3ए) की वैधता को सीधे तौर पर चुनौती नहीं दी गई है तो याचियों ने स्थिति को समझते हुए याचिका में संशोधन करने के लिए समय मांगा। ​कोर्ट ने उन्हें एक सप्ताह की मोहलत देते हुए याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 22 जून की तारीख लगा दी। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह एवं न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंड ने दिया है।

यूपी सरकार ने ग्राम प्रधानों को छह महीने के लिए बनाया प्रशासक

राज्य सरकार ने प्रधानों को प्रशासक बनाने का आदेश 2017 के अधिनियम संख्या 6 की धारा 12(3ए) के तहत मिली शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी किया है, जिसे याचिका में असंवैधानिक बताया है। याची युधिष्ठिर वर्मा और आयुष पांडेय ने स्वयं में अपनी दलीलें पेश कीं। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 243(i)(ई) का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि राज्य सरकार द्वारा शक्तियों का यह प्रयोग पूरी तरह असंवैधानिक है। पांच वर्षीय विधि पाठयक्रम में तीसरे वर्ष के याची छात्रों ने कहा कि यह अध्यादेश संविधान के अनुच्छेद 243ई की मूल भावना एवं संवैधानिक व्यवस्था के प्रतिकूल है क्योंकि संविधान पंचायती संस्थाओं में समयबद्ध एवं नियमित चुनाव सुनिश्चित करता है।

ग्राम पंचायतों की निर्वाचन प्रक्रिया की बहाली की मांग

याचियों का कहना है कि राज्य सरकार ने इस विस्तार को अपरिहार्य परिस्थितियां व जनहित जैसे व्यापक एवं अस्पष्ट आधारों पर उचित ठहराने का प्रयास किया है जबकि इसके समर्थन में कोई ठोस, तार्किक या संवैधानिक कारण नहीं बताया है। इस प्रकार की कार्यवाही लोकतांत्रिक विकेन्द्रीकरण एवं स्थानीय स्वशासन की संवैधानिक अवधारणा पर प्रतिकूल प्रभाव डालती है। उन्होंने कोर्ट को बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रेम लाल पटेल बनाम उप्र राज्य के मामले में भी इसी प्रकार के एक अध्यादेश को असंवैधानिक एवं घोषित किया है। जनहित याचिका के माध्यम से प्रदेश में ग्राम पंचायतों के लोकतांत्रिक निर्वाचन प्रक्रिया की संवैधानिक सुरक्षा एवं शीघ्र बहाली की मांग भी की गई है।

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