कुंवारी बेटी का गर्भवती होना औसत भारतीय के लिए बुरा सपना, हाईकोर्ट का लड़की की मां को निर्देश
हाईकोर्ट ने कहा कि शादी हुए बिना बेटी का गर्भवती होना एक औसत भारतीय के लिए ‘बुरा सपना’ (नाइटमेयर) है, जो अक्सर हिंसक प्रतिक्रियाओं को आमंत्रित करता है। आरोपियों ने अपनी बेटी के प्रेम संबंधों के कारण उनकी हत्या कर दी, जो भारतीय समाज में एक आम बात है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ऑनर किलिंग के मामले में दोषसिद्ध आरोपी दंपती की उम्रकैद की सजा बरकरार रखते हुए उनकी अपील खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि शादी हुए बिना बेटी का गर्भवती होना एक औसत भारतीय के लिए ‘बुरा सपना’ (नाइटमेयर) है, जो अक्सर हिंसक प्रतिक्रियाओं को आमंत्रित करता है। आरोपियों ने अपनी बेटी के प्रेम संबंधों के कारण उनकी हत्या कर दी, जो भारतीय समाज में एक आम बात है।
न्यायमूर्ति जेजे मुनीर एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने कहा कि अभियुक्तों ने हत्या के बाद शवों को छिपाने की कोशिश की। कोर्ट ने जमानत पर चल रही लड़की की मां को दो सप्ताह के भीतर सीजेएम शाहजहांपुर के समक्ष सरेंडर का आदेश दिया है। अपीलार्थियों को आईपीसी की धारा 302/34 के तहत दंडनीय अपराध के लिए दोषी ठहराया गया था और उन्हें आजीवन कारावास व 10-10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई गई थी। अपीलार्थियों ने अपनी 15 वर्षीय गर्भवती बेटी और उसके 28 वर्षीय प्रेमी की हत्या कर दी थी। घटना की रिपोर्ट 20 अगस्त 2014 को कलान थाने में दर्ज कराई थी। कोर्ट ने पाया कि अभियुक्तों के पास अपराध करने का उद्देश्य था।
हाईकोर्ट ने कंप्यूटर आपरेटर मोहम्मद आतिफ सिद्धिकी को दी राहत
वहीं दूसरे मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मोहम्मद आतिफ सिद्दीकी बनाम राज्य उत्तर प्रदेश व अन्य के मामले में सुनवाई करते हुए संबंधित प्राधिकारी को याचिकाकर्ता की प्रत्यावेदन पर निर्धारित अवधि में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। मामले की सुनवाई कोर्ट नंबर 34 में न्यायमूर्ति विक्रम डी चौहान ने की। याचिकाकर्ता नगर निगम गोरखपुर में कंप्यूटर आपरेटर रहे मो. आतिफ सिद्दीकी की ओर से अधिवक्ता बृजेश कुमार पांडेय ने पक्ष रखा। जबकि प्रतिवादी संख्या 2 से 4 की ओर से अधिवक्ता वत्सला और राज्य की ओर से मुख्य स्थायी अधिवक्ता उपस्थित रहे।
याचिका में प्रार्थना की गई थी कि 28 अक्तूबर 2024 को जोनल अधिकारी, जोन-01, नगर निगम गोरखपुर द्वारा पारित सेवा से हटाने के आदेश को निरस्त किया जाए। साथ ही कंप्यूटर ऑपरेटर के पद पर पुनर्बहाली, बकाया वेतन/मजदूरी का भुगतान और समस्त परिणामी लाभ दिए जाए। इसके अतिरिक्त इसके साथ ही 04 नवंबर 2024 की प्रत्यावेदन एवं 23 नवंबर 2024 के शपथपत्र पर निर्णय लेने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने कहा कि 4 नवंबर 2024 को प्रस्तुत प्रत्यावेदन पर अब तक कोई निर्णय नहीं लिया गया है। इस पर प्रतिवादियों की ओर से आश्वासन दिया गया कि प्रत्यावेदन पर समयबद्ध ढंग से निर्णय लिया जाएगा।




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