I am hungry and tired High Court judge expresses pain and explains compulsion to reserve verdict भूखा और थका हुआ हूं...हाईकोर्ट में जज का छलका दर्द, फैसला सुरक्षित रखने की बताई मजबूरी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
More

भूखा और थका हुआ हूं...हाईकोर्ट में जज का छलका दर्द, फैसला सुरक्षित रखने की बताई मजबूरी

हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सूचीबद्ध मामलों की भारी संख्या के कारण एक न्यायाधीश ने निर्णय लिखाने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि वे भूखे, थके और शारीरिक रूप से निर्णय लिखाने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए आदेश सुरक्षित रखा जाता है।

Sat, 28 Feb 2026 08:59 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, लखनऊ
share
भूखा और थका हुआ हूं...हाईकोर्ट में जज का छलका दर्द, फैसला सुरक्षित रखने की बताई मजबूरी

इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में सूचीबद्ध मामलों की भारी संख्या के कारण एक न्यायाधीश ने खुले न्यायालय में ही निर्णय लिखाने में असमर्थता जताई। उन्होंने कहा कि वे भूखे, थके और शारीरिक रूप से निर्णय लिखाने की स्थिति में नहीं हैं, इसलिए आदेश सुरक्षित रखा जाता है। यह वाकया बीते मंगलवार का है।

यह मामला न्यायमूर्ति सुभाष विद्यार्थी की एकल पीठ के समक्ष था। पीठ चंद्रलेखा सिंह की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह याचिका वर्ष 2025 में डीआरटी के एक आदेश के खिलाफ दायर की गई थी। मई 2025 में हाईकोर्ट ने डीआरटी का आदेश निरस्त कर दोबारा सुनवाई को भेजा था। याची को सुनवाई का अवसर देने का निर्देश था। इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। 25 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए आदेश रद्द कर दिया कि संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर नहीं मिला।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को राहत, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने गिरफ्तारी पर लगाई रोक

हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि याचिका में शीघ्र, संभव हो तो छह माह में निर्णय दिया जाए। यह अवधि 24 फरवरी 2026 को पूरी हो रही थी। मंगलवार को न्यायमूर्ति विद्यार्थी के समक्ष 235 मामले सूचीबद्ध थे। इनमें 92 नए थे। सवा चार बजे तक वे 29 ताजा मामलों की सुनवाई कर चुके थे। इसके बाद इसकी सुनवाई शुरू हुई, जो शाम 7 बजकर 10 मिनट तक चली।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:13 साल पुराने चेक बाउंस मामले में हस्तक्षेप से हाईकोर्ट का इनकार

सभी सूचीबद्ध मामलों का कोर्ट के आदेश में जिक्र

सुप्रीम कोर्ट की ओर से लौटाए गए मामले की लंबी सुनवाई के बाद न्यायाधीश ने कहा कि वे तत्काल निर्णय लिखाने की स्थिति में नहीं हैं। इसलिए फैसला सुरक्षित रखा जाता है। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया कि उस दिन 92 ताजा मामले, 101 नियमित मामले, 39 ताजा विविध आवेदन और अतिरिक्त सूची के तीन मामले सूचीबद्ध थे। भारी कार्यभार के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश को ध्यान में रखते हुए संबंधित मामले की सुनवाई प्राथमिकता से की गई। वहीं, याची की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज कुदेसिया ने पक्ष रखा। विपक्षियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुदीप कुमार और केनरा बैंक की ओर से पीके श्रीवास्तव ने बहस की।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:गुटखा विज्ञापन पर हाईकोर्ट ने उठाए सवाल, कई सितारे बने विपक्षी पक्षकार
लेटेस्ट Hindi News, Lucknow News, Meerut News, Ghaziabad News, Agra News, Kanpur News और UP News अपडेट हिंदी में पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।