Allahabad High Court said that the magistrate cannot add or delete sections from the charge sheet चार्जशीट में धाराएं जोड़ या हटा नहीं सकते मजिस्ट्रेट, हाईकोर्ट ने बताया- किस स्टेज पर हो सकता है बदलाव, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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चार्जशीट में धाराएं जोड़ या हटा नहीं सकते मजिस्ट्रेट, हाईकोर्ट ने बताया- किस स्टेज पर हो सकता है बदलाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के एक मामले में सम्मन आदेश को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट संज्ञान लेते समय चार्जशीट में धाराएं जोड़ या घटा नहीं सकते।

Fri, 26 Dec 2025 11:30 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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चार्जशीट में धाराएं जोड़ या हटा नहीं सकते मजिस्ट्रेट, हाईकोर्ट ने बताया- किस स्टेज पर हो सकता है बदलाव

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने छेड़छाड़ के एक मामले में सम्मन आदेश को रद्द करने की मांग में दाखिल याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि मजिस्ट्रेट संज्ञान लेते समय चार्जशीट में उल्लिखित आईपीसी की धाराओं में बदलाव नहीं कर सकते। कोर्ट ने कहा कि धाराओं को जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया केवल आरोप तय करने के स्तर पर ही की जा सकती है।

कोर्ट के समक्ष मुख्य कानूनी प्रश्न यह था कि जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री के आधार पर सम्मन आदेश और आपराधिक कार्यवाही की जा सकती है या ऐसे तर्कों को डिस्चार्ज के स्तर के लिए सुरक्षित रखा जाना चाहिए। न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि ने धारा 482 के तहत दायर अर्जी को खारिज करते हुए यह आदेश दिया। मिर्जापुर के सिविल जज जूनियर डिवीजन के 28 मई 2024 के सम्मन आदेश को चुनौती दी थी। यह कार्यवाही मिर्जापुर में दर्ज छेड़छाड़ के मुकदमा से संबंधित थी, जिसमें पीड़िता ने छेड़छाड़ और अभद्र टिप्पणी का आरोप लगाते हुए र्ज कराई थी। विवेचना के बाद पुलिस ने याचियों के खिलाई आईपीसी की धारा 354 ए (यौन उत्पीड़न), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत चार्जशीट दाखिल की गई थी।

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याचिका में तर्क दिया गया कि पीड़िता ने सीआरपीसी की धारा 161 (मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान) और धारा 164 (मजिस्ट्रेट के समक्ष बयान) के तहत दर्ज अपने बयानों में एफआईआर के संस्करण का समर्थन नहीं किया है। यह भी दलील दी गई कि ये मामला एक प्रतिशोध का (काउंटर ब्लास्ट) है, क्योंकि एफआईआर दर्ज होने से पहले विभाग द्वारा पीड़िता के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू गई गई थी।

लूटकांड में फंसाने के आरोप में 11 पुलिसकर्मियों पर केस के आदेश

उधर, संभल के बहजोई थाना क्षेत्र में साल 2022 की लूट की घटना में जेल में बंद व्यक्ति को आरोपी दिखाकर फंसाने के आरोप में तत्कालीन एसएचओ समेत 11 पुलिसकर्मियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए गए हैं। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, संभल (चंदौसी) ने थाना बहजोई को एफआईआर दर्ज कर नियमानुसार विवेचना कराने तथा तीन दिन के भीतर पंजीकरण की सूचना न्यायालय में देने को कहा है।

मामला बहजोई थाना क्षेत्र के अर्जुनपुर जूना गांव से जुड़ा है। 25 अप्रैल 2022 को दुर्वेश दूध बेचकर भुगतान लेकर गांव लौट रहा था, तभी बाइक सवार दो लोगों ने उससे नकदी लूट ली। इस संबंध में बहजोई थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई थी। इसी मुकदमे में ओमवीर नामक व्यक्ति को आरोपी बनाकर जेल भेजा गया। ओमवीर ने अदालत में प्रार्थना पत्र देकर आरोप लगाया कि उसे सुनियोजित साजिश के तहत लूट के झूठे मामले में फंसाया गया, जबकि घटना के समय वह जिला कारागार बदायूं में बंद था। न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेजों से स्पष्ट हुआ कि ओमवीर 11 अप्रैल 2022 से 12 मई 2022 तक बदायूं जेल में निरुद्ध था और 25 अप्रैल 2022 को उसकी उपस्थिति जेल रिकॉर्ड में दर्ज थी।

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