इलाहाबाद हाईकोर्ट के सख्त निर्देश- आदेश स्पष्ट लिखें या टाइप कराएं न्यायिक अधिकारी
यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के जिला जजों को एक बार फिर निर्देश दिया है कि अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों को हाथ से लिखने या आदेश टाइप करने के मामले में संवेदनशील बनाएं। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आदेशों को साफ-साफ लिखें या टाइप कराएं।

यूपी में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के जिला जजों को एक बार फिर निर्देश दिया है कि अधीनस्थ न्यायिक अधिकारियों को हाथ से लिखने या आदेश टाइप करने के मामले में संवेदनशील बनाएं। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आदेशों को साफ-साफ लिखें या टाइप कराएं ताकि उन्हें आसानी से पढ़ा जा सके।
यह आदेश न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने बागपत निवासी बब्बू उर्फ हैदर की सशर्त जमानत मंजूर करते हुए दिया है। याची के खिलाफ वर्ष 2018 में खेखड़ा थाने में हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज हुआ था। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि ट्रायल कोर्ट याची की जल्द रिहाई सुनिश्चित करने के लिए बेल ऑर्डर मैनेजमेंट सिस्टम (बीओएमएस) के माध्यम से संबंधित जेल को रिहाई आदेश भेजवाएगा।
कोर्ट ने महानिबंधक को आदेश की फोटोकॉपी सभी जिला जजों, प्रधान पारिवारिक न्यायाधीशों और हाईकोर्ट के अधीनस्थ अन्य अदालतों को भेजवाने का निर्देश दिया। न्यायालय ने कहा कि हाईकोर्ट ने वर्ष 2023 में जो आदेश किया है उसे सभी जिला जजों को फिर से सर्कुलेट किया जाए ताकि वे अन्य सभी न्यायिक अधिकारियों को ऑर्डर शीट को साफ-सुथरी लिखावट में लिखने या उसे टाइप कराने के बारे में जागरूक करें।
कोर्ट ने अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश बागपत की आर्डर शीट की गुणवत्ता पर आपत्ति जताई और कहा कि ट्रायल जज ने अपनी रिपोर्ट में स्वीकार किया है कि उन्हें एक पूर्व आदेश के बारे में पता था जिसमें आदेशों को स्पष्ट हैंडराइटिंग में लिखने का निर्देश दिया गया था फिर भी ऑर्डर शीट अस्पष्ट हैंडराइटिंग में लिखी गई।




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