Allahabad High Court said that conversion law cannot prohibit inter religious marriages and live in relations यूपी धर्मांतरण कानून अंतरधार्मिक विवाह और लिव-इन पर नहीं लगा सकता रोक; हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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यूपी धर्मांतरण कानून अंतरधार्मिक विवाह और लिव-इन पर नहीं लगा सकता रोक; हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतर धार्मिक विवाह और लिव इन संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि बालिग व्यक्तियों को पसंद के साथी के साथ रहने और विवाह करने का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि यूपी धर्मांतरण कानून 2021 रोक नहीं लगा सकता है।

Tue, 24 Feb 2026 09:43 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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यूपी धर्मांतरण कानून अंतरधार्मिक विवाह और लिव-इन पर नहीं लगा सकता रोक; हाईकोर्ट का बड़ा फैसला

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अंतर धार्मिक विवाह और लिव इन संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया है कि बालिग व्यक्तियों को पसंद के साथी के साथ रहने और विवाह करने का मौलिक अधिकार है। कोर्ट ने कहा कि संविधान एक जीवंत दस्तावेज है, जो समय के साथ समाज की बदलती आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं को ढालता है।

कोर्ट ने कहा कि उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्मांतरण प्रतिषेध अधिनियम, 2021 अंतरधार्मिक विवाह पर रोक नहीं लगाता। विवाह पंजीकरण अधिकारी केवल इस आधार पर विवाह पंजीकरण से इनकार नहीं कर सकते कि संबंधित पक्षों ने धर्मांतरण के लिए जिला प्राधिकारी से पूर्व अनुमति नहीं ली है। अदालत ने कहा कि ऐसी अनुमति अनिवार्य नहीं बल्कि निर्देशात्मक (डायरेक्टरी) है। इसे अनिवार्य माना जाए तो यह संविधान के अनुच्छेद 14-21 की कसौटी पर खरा नहीं उतरेगा। अंतर धार्मिक विवाह करने या लिव इन रिलेशन में रहने वाले दर्जनों जोड़ों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर संरक्षण देने की मांग की थी। याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह ने यह निर्णय दिया।

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शासनादेश का पालन अनिवार्य

अदालत ने वर्ष 2019 में जारी राज्य सरकार के उस शासनादेश का हवाला दिया, जिसमें अंतर्जातीय या अंतरधार्मिक विवाह करने वाले जोड़ों को सुरक्षा, सुरक्षित आवास और आवश्यक संरक्षण देने के निर्देश दिए गए थे। अदालत ने कहा कि इस शासनादेश का कड़ाई से पालन किया जाए। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि जीवनसाथी चुनना व्यक्ति की स्वतंत्रता का अभिन्न हिस्सा है और इसमें राज्य या समाज हस्तक्षेप नहीं कर सकते।

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शादी का वादा पूरा न करना अपराध नहीं

हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि पढ़े-लिखे बालिगों के बीच लंबे समय तक चले शारीरिक संबंधों में शादी का वादा पूरा न करना अपराध की श्रेणी में नहीं आता। ऐसे मामलों में आपराधिक मुकदमे चलाना कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग है। न्यायमूर्ति अवनीश सक्सेना ने बस्ती कोतवाली के श्याम बहादुर यादव की याचिका मंजूर करते हुए उनके खिलाफ दर्ज मुकदमे, चार्जशीट और समन को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि लंबे सहमति वाले रिश्ते में बाद का इनकार बलात्कार नहीं बनता। अधिवक्ता आदित्य गुप्ता और वरिष्ठ वकीलों ने पक्ष रखा।

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