कानपुर के बाद भदोही में मुधमक्खियों का कहर; झुंड के हमले में दुकानदार की मौत
यूपी के भदोही में मोबाइल दुकानदार सद्दाम अंसारी पर मधुमक्खियों के झुंड ने हमला किया, जिससे उनकी मौत हो गई। इससे पहले कानपुर में क्रिकेट मैच के दौरान अंपायर मानिक गुप्ता की भी मधुमक्खियों से मौत हुई थी।

यूपी में मधुमक्खियों के हमलों ने फिर से चिंता बढ़ा दी है। कानपुर में हुई जानलेवा घटना के बाद अब भदोही में भी मधुमक्खियों के हमले में एक व्यक्ति की मौत हो गई है। भदोही के निर्यात भवन बीड़ा क्षेत्र में शुक्रवार रात 35 वर्षीय मोबाइल दुकानदार सद्दाम अंसारी की मौत मधुमक्खियों के झुंड के हमले में हो गई। जानकारी के अनुसार, सद्दाम अंसारी दुकान बंद करने के बाद ऊपर लगे मधुमक्खियों का छत्ता हटाने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान मधुमक्खियों का झुंड उन पर टूट पड़ा। परिजन उन्हें तत्काल निजी अस्पताल ले गए, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
मधुमक्खियों के हमले में दुकानदार की मौत
स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्यात भवन बीड़ा क्षेत्र में करीब 20 से 25 स्थानों पर मधुमक्खियों के छत्ते लगे हैं। पूर्व में भी इस इलाके में हमले हो चुके हैं, लेकिन संबंधित विभाग की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं की गई। मृतक सद्दाम अंसारी चार भाइयों में सबसे बड़े थे और परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनका परिवार पत्नी और तीन छोटे बच्चों के साथ है। घटना के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल बना हुआ है।
कानपुर में अंपायर की गई थी जान
इससे पहले कानपुर में भी मधुमक्खियों ने जानलेवा हमला किया था। शुक्लागंज के राहुल सप्रू स्टेडियम में एचए एकेडमी और एसबीएस एकेडमी के बीच खेले जा रहे क्रिकेट मैच के दौरान अंपायर पर मधुमक्खियों का झुंड टूट पड़ा। 52 वर्षीय अंपायर मानिक गुप्ता गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें निजी नर्सिंग होम में प्राथमिक उपचार दिया गया और हैलट अस्पताल रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया था।
केसीए से मदद की गुहार
मानिक गुप्ता के परिवार में पत्नी कुसुमलता और चार बेटियां हैं। उनकी सबसे छोटी बेटी समृद्धि 18 साल की है और B.Sc कर रही है। पत्नी ने कहा कि मानिक हमेशा चाहते थे कि उनकी बेटी सरकारी नौकरी करे और आगे JEE की तैयारी करे। परिवार ने KCA और उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन से आर्थिक मदद की अपील की है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इन घटनाओं का मुख्य कारण शहरी और आवासीय क्षेत्रों में मधुमक्खियों के छत्तों का अनियंत्रित बढ़ना है। मौसम और मौसमी परिस्थितियों में उनकी सक्रियता बढ़ जाती है, जिससे लोगों पर हमला होने का खतरा अधिक रहता है। भदोही और कानपुर की घटनाओं ने प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए चेतावनी स्वरूप काम किया है। छत्तों को नियंत्रित करना, लोगों को जागरूक करना और आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना अब आवश्यक है। इन कदमों से भविष्य में जानलेवा हादसों से बचा जा सकता है।




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