aankh aur munh kitane centimeter khul sakate hain akhilesh yadav taunts on conditions permission to avimukteshwaranand आंख-मुंह कितने खुल सकते हैं; शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर शर्तों को लेकर अखिलेश का तंज, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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आंख-मुंह कितने खुल सकते हैं; शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर शर्तों को लेकर अखिलेश का तंज

अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए लिखा- आँख और मुँह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…। उन्होंने प्रशासन की शर्तों को ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’ और कमजोर सत्ता की पहचान बताया। उन्होंने बीजेपी सरकार पर सनातन और ब्राह्मण समाज के अपमान का आरोप लागया।

Wed, 11 March 2026 06:40 PMAjay Singh लाइव हिन्दुस्तान
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आंख-मुंह कितने खुल सकते हैं; शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर शर्तों को लेकर अखिलेश का तंज

UP News: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती बुधवार (11 मार्च 2026) को लखनऊ में ‘गौ रक्षा’ के नाम से एक बड़ा कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। इसके लिए उन्हें 26 शर्तों के साथ प्रशासन की इजाजत मिली है। अब इन शर्तों को लेकर समाजवादी पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने तंज कसा है। अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए सोशल मीडिया प्लेटफार्म ‘एक्स’ पर लिखा- आँख और मुँह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…। उन्होंने प्रशासन की शर्तों को ‘विनाशकाले विपरीत बुद्धि’ और कमजोर सत्ता की पहचान बताया। कोविड नियमों और अन्य पाबंदियों का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर सनातन और ब्राह्मण समाज के अपमान का आरोप लगाया।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लखनऊ जिला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 26 शर्तों के साथ कार्यक्रम की इजाजत दी है। प्रशासन की ओर से जारी शर्तों में भड़काऊ भाषण या नारेबाजी पर रोक, हथियार और आतिशबाजी पर प्रतिबंध, ध्वनि प्रदूषण के नियमों का पालन, सीमित वाहनों की अनुमति, यातायात बाधित न करना, निजी सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करना और रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर बंद रखना शामिल है। किसी भी शर्त का उल्लंघन होने पर प्रशासन तुरंत कार्रवाई कर सकता है।

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इन शर्तों पर तंज कसते हुए अखिलेश यादव ने ‘एक्स’ पर लिखा- ‘आँख और मुँह कितने सेंटीमीटर खुल सकते हैं, ये शर्त भी रख देते…। किसी को ‘हाता नहीं भाता’, इसीलिए वो ‘शर्तों’ का है अंबार लगाता। भाजपाई सनातन का सम्मान नहीं कर सकते हैं तो भले न करें परंतु अपमान भी न करें। उप्र की अहंकारी सरकार जिस समाज विशेष के मान की बाँह मरोड़ रही है, वो बात उस समझदार समाज को समझ आ रही है। यहाँ तक कि उस समाज के जो लोग भाजपा सरकार में मंत्री, सांसद, विधायक, पार्षद या कहें किसी और तरह के जनप्रतिनिधि हैं, वो भी इस मामले में अपने समाज से मुँह छिपा रहे हैं लेकिन भाजपा की भट्टी पर अपने स्वार्थ की रोटी सेंकनेवाले ऐसे भाजपाई जनप्रतिनिधि, अपने ही समाज में सम्मान खो चुके हैं। जनता अगले चुनाव में उनको सबक सिखाएगी। इन जनप्रतिनिधियों में से जो कुछ लोग अपने समाज के सच्चे शुभचिंतक हैं वो उन अन्य दलों के संपर्क में हैं जो सदैव सनातन और इस समाज का सम्मान भी करते रहे हैं और जिन्होंने उन्हें सदैव यथोचित मान-स्थान भी दिया है।

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पूछा-कोविड-19 अभी भी चल रहा है क्या?

अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के कार्यक्रम को इजाजत के लिए लगाई गई शर्तों पर तंज कसते हुए आगे लिखा- ‘ और हाँ… ‘कोविड-19’ अभी भी चल रहा है क्या? अगर ये सच है तो सरकार की अपनी किस मीटिंग या भाजपा के किस आयोजन में इसका आख़िरी बार अनुपालन हुआ, उसका प्रमाण दिया जाए। भाजपाई और उनके संगी-साथियों की भूमिगत बैठकों में क्या ये लागू होता है। कहीं ऐसा तो नहीं कि इसी कारण ‘बाटी-चोखा’ वाली बैठक पर पाबंदी लगाई गयी थी।’ उन्होंने लिखा- अतार्किक बंदिशें लगाना कमज़ोर सत्ता की पहचान होती है। निंदनीय! घोर आपत्तिजनक!! विनाशकाले विपरीत बुद्धि!!!

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शर्तों पर क्या बोले स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन शर्तों और खर्च के बारे में प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह स्थिति मुगलकाल में 'जजिया' देने जैसी प्रतीत होती है। उन्होंने आरोप लगाया कि जैसे उस समय लोग अपने धर्म के पालन के लिए जजिया देते थे, उसी प्रकार अब धार्मिक कार्यक्रमों के लिए भी खर्च उठाना पड़ रहा है। स्वामी ने पांच मार्च को वाराणसी के संकटमोचन मंदिर में पूजा करने के बाद गोरक्षा के समर्थन में अपनी यात्रा शुरू की थी।

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