लखीमपुर में बाघ की दहशत, अब बुजुर्ग को बनाया निवाला, खेत में अधखाया शव मिला
लखीमपुर खीरी जिले के दुधवा बफर जोन में शुक्रवार देर रात 65 वर्षीय बुजुर्ग की बाघ के हमले से मौत हो गई। देर रात तक जब बुजुर्ग घर नहीं लौटे तो परिवार के सदस्यों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान खेत में उनका आंशिक रूप से खाया हुआ शव मिला।

उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में दुधवा बफर जोन से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। शुक्रवार देर रात 65 वर्षीय चंद्रिका प्रसाद की बाघ हमले में मौत हो गई। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि घटना तब हुई जब चंद्रिका प्रसाद खेतों में काम करने गए थे और देर रात तक घर नहीं लौटे। उनकी लंबी अनुपस्थिति से चिंतित होकर परिवार के सदस्यों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान बेटे विष्णु और अन्य परिजनों को गन्ने के खेत में उनका आंशिक रूप से खाया हुआ शव मिला। इस घटना से इलाके में दहशत फैल गई।
परिजनों ने दावा किया कि उन्होंने घटनास्थल के पास एक बाघ को देखा था जो उनके शोर मचाने पर पास के जंगलों में भाग गया। हालांकि हत्या बाघ ने की या तेंदुए ने इसकी पुष्टि वन विभाग पगमार्क और अन्य तकनीकी जांच के आधार पर करेगा। दुधवा बफर जोन की उप निदेशक कीर्ति चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए कहा कि जांच जारी है और जल्द ही स्पष्ट हो जाएगा कि हमला किस जानवर ने किया। यह घटना इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि इसी क्षेत्र में एक दिन पहले भी वन्यजीव हमला हुआ था। गुरुवार रात खुशीपुर पटिहान गांव में गन्ने के खेत में एक 10 वर्षीय मासूम पर तेंदुए ने हमला कर दिया था। कुछ ही घंटों के भीतर दो जानलेवा हमलों ने स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना दिया है।
वन विभाग ने घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए पलिया और संपूर्णानगर रेंज में गश्त बढ़ा दी है। साथ ही बाघों और तेंदुओं की गतिविधियों की निगरानी के लिए अतिरिक्त कैमरे लगाए जा रहे हैं। अधिकारियों ने बताया कि पीड़ित परिवार को नियमों के अनुसार मुआवज़ा प्रदान किया जाएगा। इधर,लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से ग्रामीणों में आक्रोश और डर दोनों बढ़ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए मजबूत कदम उठाने की मांग की है।




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