ईरान और इजराइल की जंग लंबी खिंची तो यूपी पर पड़ेगा बड़ा असर, कोरोना के बाद सबसे जटिल स्थिति
उद्यमियों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के अलावा लॉजिस्टिक लागत बढ़ती है तो लेदर और गारमेंट सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहद कमजोर होगी। पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में निर्यात आधारित इकाइयों के लिए दबाव बना हुआ है, ऐसे में बढ़ती लागत उनके मुनाफे को और सीमित कर देगी।

UP News: ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जंग ने वैश्विक व्यापार की रफ्तार थाम दी है। यूपी के उद्योग जगत के सामने भी नई चुनौती खड़ी कर दी है। डर है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचा तो काम घटने के साथ रोजगार का भी संकट आएगा। कोरोना के बाद मौजूदा हालात को सबसे जटिल माना जा रहा है।
उद्यमियों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के अलावा लॉजिस्टिक लागत बढ़ती है तो लेदर और गारमेंट सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति बेहद कमजोर होगी। निर्यात आधारित इकाइयों के लिए पहले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बना हुआ है, ऐसे में बढ़ती लागत उनके मुनाफे को और सीमित कर देगी। यदि हालात सामान्य नहीं हुए तो ऑर्डर शिफ्ट होने का खतरा भी मंडरा रहा है। इंजीनियरिंग इकाइयों में आयातित कच्चे माल की महंगाई से बड़ा संकट दिख रहा है। विशेष स्टील और मशीन पार्ट्स जैसे इनपुट महंगे होने से उत्पादन लागत तेजी से बढ़ेगी। स्थिति सामान्य न हुई तो उत्पादन 25 फीसदी तक गिर सकता है। एग्रीकल्चर आधारित उद्योगों में निर्यात मांग घटने से ऑर्डर बुक पर नकारात्मक प्रभाव भी पड़ेगा।
एमएसएमई इकाइयों में आंशिक बंदी या क्षमता कटौती की नौबत
आईएए के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील वैश्य कहते हैं कि ईरान-अमेरिका के बीच जंग हमारे लिए कतई ठीक नहीं है। खासकर एमएसएमई इकाइयों में नकदी संकट और ऑर्डर की कमी का खतरा है। इससे इकाइयों के आंशिक बंदी या क्षमता कटौती की स्थिति बन सकती है। नई भर्तियां रुकने और अस्थायी श्रमिकों की छंटनी से रोजगार बाजार पर व्यापक असर पड़ने की आशंका है।
दुबई पर हमले से सहमे पर्यटक, बुकिंग बंद
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग का असर मक्का-मदीना गए लोगों के साथ ही उन लोगों पर पड़ा है जो कानपुर से सिंगापुर, हांगकांग और बैकांक घूमने जाते हैं। मक्का-मदीना जाने वाले जो लोग जा चुके हैं या फिर दो-चार दिन में जाने वाले हैं। हालांकि वे लोग इस इंतजार में हैं कि विमान कंपनियां अपनी ओर से फ्लाइट निरस्त का ऐलान करें ताकि टिकट का रिफंड लेने में कटौती न हो।
अवध टूर एंड ट्रैवल्स के प्रोपाइटर शारिक अल्वी ने बताया कि मार्च में बड़ी संख्या में लोग कानपुर से सिंहापुर, बैकांक और हांगकांग जाते हैं। दुबई पर हमले के बाद इन पर्यटकों ने फिलहाल जाने का इरादा त्याग दिया है। मक्का-मदीना में फंसे लोग वापसी के मूड में हैं पर कई विमानन कंपनियों की फ्लाइटें फिलहाल निरस्त कर दी गई हैं। रमन टूर एजेंसी के प्रोपाइटर राहुल कश्यप ने बताया कि मार्च में बच्चों के एग्जाम होते हैं तो वे लोग अप्रैल में जाने की प्लानिंग करते हैं। हमले के बाद दो दिनों से टिकट बुकिंग एक भी नहीं हुई है जबकि औसतन तीन-चार पार्टियों की बुकिंग होती थी।
लंबी चली लड़ाई तो बढ़ेंगी हमारी चुनौतियां
भारतीय निर्यात परिषद के सहायक निदेशक आलोक श्रीवास्तव का मानना है कि अगर ईरान-अमेरिका के बीच संघर्ष लंबा चला तो औद्योगिक रफ्तार पर दीर्घकालिक असर पड़ेगा। इसके असर से श्रम बाजार में चुनौतियां बढ़ेंगी। फिलहाल राहत उपायों और नीतिगत समर्थन की उम्मीद है। संभावित वैश्विक संकट के बीच प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को संभालने की चुनौती है।




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