a misspelling in name resulted in a 45 year pension holdup with the woman her son and daughter in law dying in wait ‘आई’ और ‘ई’ के चक्कर में 45 साल अटकी रही पेंशन, इंतजार में गुजर गई महिला, दोनों बेटे और बहू, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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‘आई’ और ‘ई’ के चक्कर में 45 साल अटकी रही पेंशन, इंतजार में गुजर गई महिला, दोनों बेटे और बहू

शिखर नाथ शुक्ला डीपीएस नगर निगम इंटर कॉलेज, नवाबगंज में शिक्षक थे। वह 1975 में रिटायर हो गए थे। 1980 तक उन्हें पेंशन मिलती रही। लेकिन जब उनकी पत्नी ने नगर निगम में पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया तो उसमें पति के नाम की स्पेलिंग में आई की जगह ई हो गया। आपत्ति लगने पर पेंशन सेंक्शन नहीं की गई।

Wed, 25 Feb 2026 06:31 AMAjay Singh वरिष्ठ संवाददाता, कानपुर
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‘आई’ और ‘ई’ के चक्कर में 45 साल अटकी रही पेंशन, इंतजार में गुजर गई महिला, दोनों बेटे और बहू

नाम की स्पेलिंग में ‘आई’ और ‘ई’ की मामूली सी त्रुटि के कारण महिला को परिवारिक पेंशन पाने के लिए 45 साल तक दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े। अंत में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद नगर निगम की लापरवाही का शिकार हुए इस परिवार को इंसाफ की किरण तो दिखी लेकिन तब तक याची पत्नी, उनके दोनों पुत्र, एक पुत्रवधु स्वर्ग सिधार चुके हैं। दूसरी पुत्र वधु ने संघर्ष को जारी रखा। आखिर अब उम्मीद जागी है कि 1980 से वर्ष 2015 तक उनकी सास को देय पारिवारिक पेंशन मिल सकेगी।

शिखर नाथ शुक्ला डीपीएस नगर निगम इंटर कॉलेज, नवाबगंज में शिक्षक थे। वह 1975 में रिटायर हो गए थे। 1980 तक उन्हें नगर निगम से पेंशन मिलती रही। लेकिन जब उनकी पत्नी ने नगर निगम में पारिवारिक पेंशन के लिए आवेदन किया तो उसमें पति के नाम की स्पेलिंग में आई की जगह ई हो गया। शिखर से शेखर नाथ शुक्ला होते ही आपत्ति लगने पर नगर निगम ने पेंशन सेंक्शन नहीं की। जो काम वर्ष 1980 में एक शपथपत्र से हो जाना चाहिए था उस काम के लिए पूरा प्रकरण पहले फाइलों में वर्ष 2015 तक चलता रहा। आजिज आकर पत्नी मिथिलेश शुक्ला ने जब 2015 में रिट की तब 12 अगस्त 2015 को पहला आदेश आया। इस बीच पत्नी मिथिलेश शुक्ला का निधन हो गया। लेकिन यह लड़ाई परिवार के सदस्य आगे जारी रखे रहे।

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बताते हैं कि संघर्ष की इस राह में शिखर के दोनों बेटों का निधन हो गया। एक पुत्र वधु का भी निधन हो गया। इस लड़ाई में एक पुत्र वधु ने भूमिका निभाई। तारीख पे तारीख चलती रही। आखिर अदालत ने 17 अक्टूबर 2025 को नगर निगम को आदेशित किया कि वह 10 दिन में भुगतान कर दे। पर भुगतान अब तक नहीं हुआ। नगर निगम को प्रभारी अधिकारी (विधि) की ओर से एक पत्र मिला जिसमें बताया गया कि अक्टूबर 2025 के आदेश के सम्बंध में 19 फरवरी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। मामले की अगली तिथि 26 फरवरी 2026 तय है। यह अति महत्वपूर्ण है। यह पत्र प्रभारी अधिकारी (शिक्षा) नगर निगम को भेजा गया था। वहीं, पुत्र वधु शशि लता से दूरभाष पर बात करने का प्रयास किया गया। बताया कि वे अभी बात करने में असमर्थ हैं। बुधवार को बात हो सकेगी।

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कोर्ट ने प्रशासनिक रवैये पर जताई नाराजगी

कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद प्रशासनिक रवैये पर गहरी नाराजगी जताई। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पहचान साबित करने के लिए हलफनामा सक्सेशन सर्टिफिकेट और अन्य पुख्ता दस्तावेज पेश किए, जिनसे यह प्रमाणित हुआ कि दोनों नाम एक ही व्यक्ति के हैं। न्यायालय ने आदेश दिया है कि एक सप्ताह के भीतर आदेश का पालन न किया गया तो 26 फरवरी को होने वाली अगली सुनवाई को नगर आयुक्त को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होकर स्पष्टीकरण देना होगा।

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