यूपी में डिजिटल जनगणना की तैयारियां तेज, इस दिन से शुरू होगा पहला चरण; पूछे जाएंगे 33 सवाल
जनगणना को लेकर दिल्ली में नेशनल ट्रेनर्स की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। ये नेशनल ट्रेनर ही अब प्रदेश स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स को ट्रेनिंग देंगे। मास्टर्स ट्रेनर्स की राज्यस्तरीय ट्रेनिंग जल्द ही लखनऊ में शुरू होने की उम्मीद है मास्टर ट्रेनर जिलों में प्रगणकों और सुपरवाइजरों को तैयार करेंगे।

उत्तर प्रदेश में डिजिटल जनगणना की तैयारियां तेज हो गई हैं। इससे समय की बचत होगी और डेटा का विश्लेषण भी आसान होगा। प्रदेश में पहले बुलंदशहर, बहराइच और प्रयागराज के कुछ क्षेत्रों में ट्रायल किया जा चुका है। इस दौरान जनगणना के लिए तैयार विशेष मोबाइल एप को परखा जा चुका है। व्यावहारिक आवश्यकताओं के मुताबिक उसमें कुछ बदलाव भी किए जा रहे हैं। प्रदेश जनगणना का पहला चरण 22 मई से 20 जून तक प्रस्तावित है। जनगणना के तहत 33 सवाल पूछे जाएंगे।
जनगणना को लेकर दिल्ली में नेशनल ट्रेनर्स की ट्रेनिंग पूरी हो चुकी है। ये नेशनल ट्रेनर ही अब प्रदेश स्तर पर मास्टर ट्रेनर्स को ट्रेनिंग देंगे। प्रदेश में मास्टर्स ट्रेनर्स की राज्यस्तरीय ट्रेनिंग जल्द ही लखनऊ में शुरू होने की उम्मीद है। ट्रेनिंग के बाद मास्टर ट्रेनर जिलों में जाकर फील्ड में काम करने वाले प्रगणकों और सुपरवाइजरों को तैयार करेंगे। मिली जानकारी के अनुसार पहले चरण की जनगणना में 33 सवाल पूछे जाएंगे। इसमें परिवार के मुखिया से संबंधित विवरण, परिवार में उपलब्ध और अर्जित सुविधाओं से संबंधित सवाल होंगे। प्रगणक अपने मोबाइल में विशेष जनगणना एप डाउनलोड करेंगे और उसी के जरिए आंकड़े दर्ज करेंगे। इस बार पूरी प्रक्रिया डिजिटल होगी।
डिजिटल जनगणना के फायदे
डिजिटल जनगणना से न सिर्फ समय बचेगा बल्कि डाटा की शुद्धता भी बढ़ेगी। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर, बहराइच और प्रयागराज के कुछ क्षेत्रों में इसका ट्रॉयल किया जा चुका है। इन जिलों में किए गए ट्रायल से मिले फीडबैक के आधार पर मोबाइल एप के इस्तेमाल को और अधिक आसान और यूजर फ्रेंडली बनाया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार प्रगणक और सुपरवाइजर को एप के जरिए ही सारी जानकारी भरनी होगी, इसलिए तकनीकी प्रशिक्षण पर खास जोर दिया जा रहा है।
हर घर का सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल तैयार करेगी 33 सवालों की प्रश्नावली
जनगणना में 33 सवालों की प्रश्नावली हर घर का सामाजिक-आर्थिक प्रोफाइल तैयार करेगी। सिर्फ आबादी ही नहीं गिनी जाएगी बल्कि जनगणना से यह भी पता चलेगा कि किस आयु वर्ग के कितने लोग अब तक कुंवारे हैं। उम्र और वैवाहिक स्थिति से जुड़े सवालों के जरिए यह साफ होगा की कितने युवक-युवतियां शादी की दहलीज पर हैं, कितनों की उम्र इंतजार में आगे बढ़ गई है और कितने लोग विवाह बंधन में बंध चुके हैं। पिछली 2001 और 2011 की जनगणनाओं में भी उम्र और वैवाहिक स्थिति के आंकडों से सामाजिक बदलाव की तस्वीर उभरी थी। जैसे 2011 के आंकड़ों में यूपी के महाराजगंज में 20-29 आयु वर्ग में अविवाहितों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई थी जिसे विशेषज्ञों ने शिक्षा, रोजगार और पलायन से जोड़ा था। जनगणना में पूछे जाने वाले सवालों के जवाब के अनुसार परिवार में कुल सदस्यों की संख्या, कमरों की उपलब्धता, सामाजिक वर्ग और बहु पीढ़ी के साथ रहने की स्थिति भी दर्ज होगी। सदस्य संख्या के आधार पर जिले के सबसे बड़े परिवार की पहचान भी संभव होगी। यह आंकड़ा भी स्पष्ट होगा कि आधुनिकता के दौर में भी क्या जिले में संयुक्त परिवारों की परंपरा कायम है या समाज एकल परिवार की ओर बढ़ रहा है।




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