यूपी में आयुष्मान योजना से हट सकते हैं 700 अस्पताल, इस वजह से लटकी कार्रवाई की तलवार
इन अस्पतालों को योजना से अलग किए जाने की चेतावनी दी गई है। आयुष्मान योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को सरकार पांच लाख रुपये तक सालाना मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया करा रही है। इस बदलाव और इंडीकेटर पूर्ण किए जाने को लेकर सभी अस्पतालों को ईमेल, कॉल तथा वर्चुअल बैठकों के जरिए सारी जानकारी दी गईं।

आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना से जुड़ने वाले अस्पतालों का कारवां बढ़ रहा है। मगर गड़बड़ियां रोकने को नेशनल हेल्थ अथॉरिटी ने मानकों में बदलाव सहित कई कदम उठाए हैं। इसी क्रम में एचईएम (हॉस्पीटल इम्पैनलमेंट मॉड्यूल) 1.0 से एचईएम 2.0 पर माइग्रेशन की प्रक्रिया चल रही है।
इसके लिए 35 इंडीकेटर पूरे करना अनिवार्य है। मगर प्रदेश के 700 अस्पताल ऐसे हैं, जिन्होंने तय समय सीमा में जरूरी 35 इंडीकेटरों को पूरा नहीं किया। अब इन पर कार्रवाई की तलवार लटकी है। इनके नाम आयुष्मान योजना से हट सकते हैं।
इन्हें योजना से अलग किए जाने की चेतावनी दी गई है। आयुष्मान योजना के तहत प्रत्येक पात्र परिवार को सरकार पांच लाख रुपये तक सालाना मुफ्त इलाज की सुविधा मुहैया करा रही है। मानकों में हुए बदलाव और इंडीकेटर पूर्ण किए जाने को लेकर नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (एनएचए) एवं स्टेट हेल्थ एजेंसी साचीज द्वारा सभी अस्पतालों को ईमेल, कॉल तथा वर्चुअल बैठकों के जरिए सारी जानकारी दी गईं। इसके बावजूद 700 अस्पतालों ने तय समय में मानक पूरे नहीं किए।
साचीज की सीईओ अर्चना वर्मा का कहना है कि जिन अस्पतालों द्वारा अब तक जरूरी मानकों को पूरा करते हुए एचईएम 2.0 माइग्रेशन प्रक्रिया पूरी नहीं की है, उन्हें योजना के तहत कार्य करने को लेकर अनिच्छुक माना जाएगा। एनएचए के निर्देशों के क्रम में ऐसे सभी अस्पतालों को योजना में बंद करने की कार्रवाई की जाएगी।




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