3 years experience mandatory for UP PCS J recruitment, Yogi cabinet approves amendment in rules पीसीएस-जे भर्ती के लिए 3 साल का अनुभव अनिवार्य, योगी कैबिनेट ने नियमावली में संशोधन को दी मंजूरी, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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पीसीएस-जे भर्ती के लिए 3 साल का अनुभव अनिवार्य, योगी कैबिनेट ने नियमावली में संशोधन को दी मंजूरी

यूपी में पीसीएस-जे भर्ती के लिए 3 साल का अनुभव अनिवार्य हो गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट में यह फैसला हुआ। योगी कैबिनेट ने नियमावली में संशोधन को मंजूरी दी।

Thu, 29 Jan 2026 09:20 PMDeep Pandey लाइव हिन्दुस्तान
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पीसीएस-जे भर्ती के लिए 3 साल का अनुभव अनिवार्य, योगी कैबिनेट ने नियमावली में संशोधन को दी मंजूरी

योगी सरकार ने पीसीएस-जे पदों पर भर्ती के लिए विधि व्यवसाय में तीन साल का अनुभव अनिवार्य कर दिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई कैबिनेट में यह फैसला हुआ। कैबिनेट ने इसके लिए उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा (सप्तम संशोधन) नियमावली 2026 को मंजूरी दी। यह संशोधन हाईकोर्ट की संस्तुति के आधार पर किया गया है। संशोधन के मुताबिक पीसीएस (न्यायिक) सेवा की सीधी भर्ती में अभ्यर्थी के लिए विज्ञापन की तिथि तक कम से कम तीन साल का विधि व्यवसाय/वकालत अनुभव (प्रैक्टिस) होना चाहिए। यह प्रावधान शैक्षिक योग्यता से संबंधित नियम 11 के अंतर्गत जोड़ा गया है।

पीसीएस-जे के पदों पर भर्ती के लिए पहले केवल विधि स्नातक (एलएलबी) होना पर्याप्त था। विधि स्नातक युवा सीधे परीक्षा में आवेदन करते थे। सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) की परीक्षाओं में तीन वर्ष की प्रैक्टिस अनिवार्य किया था। इसे सभी हाईकोर्ट और राज्य सरकारों से अपने यहां लागू करने के निर्देश दिए थे। इसी क्रम में राज्य सरकार ने यह संशोधन किया है।

इसके अलावा प्रशिक्षण तथा पदोन्नति से जुड़े नियमों में भी बदलाव किया गया है। साथ ही प्रक्रिया को और स्पष्ट करने के लिए नए नियम भी जोड़े गए हैं। सरकार के अनुसार, इन संशोधनों से न्यायिक सेवा की भर्ती, प्रशिक्षण और पदोन्नति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और मजबूत होगी, जिसका सकारात्मक असर न्यायिक व्यवस्था की गुणवत्ता पर पड़ेगा।

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विधानमंडल में पेश होगा पंचायती राज संस्थाओं का वार्षिक प्रतिवेदन

त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं का वार्षिक प्रतिवेदन आगामी बजट सत्र में रखा जाएगा। इस संबंध में निदेशक सहकारी समितियां एवं पंचायत लेखा परीक्षा, निदेशालय लखनऊ का त्रिस्तरीय पंचायती राज संस्थाओं का वार्षिक प्रतिवेदन वर्ष 2020-21 (भाग 1 से 9 तक) को राज्य विधानमंडल के समक्ष प्रस्तुत किए जाने संबंधी वित्त विभाग के प्रस्ताव को गुरुवार को राज्य कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी।

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