12 convicts sentenced to life imprisonment in Azamgarh riot verdict after 27 years आजमगढ़ दंगे में 12 दोषियों को उम्रकैद, शिया-सुन्नी संघर्ष में 27 साल बाद आया फैसला, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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आजमगढ़ दंगे में 12 दोषियों को उम्रकैद, शिया-सुन्नी संघर्ष में 27 साल बाद आया फैसला

आजमगढ़ के मुबारकपुर में 27 साल पहले हुए दंगे में कोर्ट का फैसला आ गया है। शिया-सुन्नी संघर्ष के बीच हुई नृशंस हत्या के 12 गुनहगारों को जज ने उम्रकैद की सजा सुनाई है।

Tue, 17 Feb 2026 08:07 PMYogesh Yadav आजमगढ़, वरिष्ठ संवाददाता।
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आजमगढ़ दंगे में 12 दोषियों को उम्रकैद, शिया-सुन्नी संघर्ष में 27 साल बाद आया फैसला

उत्तर प्रदेश में आजमगढ़ के मुबारक पुर में करीब तीन दशक पहले भड़की सांप्रदायिक हिंसा और नृशंस हत्याकांड के मामले में न्याय की जीत हुई है। मुबारकपुर में 27 साल पहले हुए चर्चित शिया-सुन्नी दंगे के दौरान एक युवक की हत्या के मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। जिला एवं सत्र न्यायाधीश जयप्रकाश पांडेय ने मंगलवार को इस मामले के 12 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई। यह मामला न केवल लंबे समय तक चला, बल्कि इसने उस दौर में आजमगढ़ की कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने को झकझोर कर रख दिया था। 27 सालों के लंबे इंतजार के बाद आए इस फैसले ने पीड़ित परिवार को आखिरकार सुकून दिया है।

मोहर्रम के जुलूस से शुरू हुआ था खूनी खेल

इस पूरी घटना की शुरुआत 27 अप्रैल 1999 को हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मुबारकपुर थाना क्षेत्र के निवासी अली अकबर मोहर्रम के जुलूस में शामिल होने गए थे, लेकिन वे घर वापस नहीं लौटे। उनके लापता होने के बाद पूरे इलाके में तनाव फैल गया। 28 अप्रैल को उनके बेटे जैगम ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। लेकिन दो दिन बाद, 30 अप्रैल 1999 को जो मंजर सामने आया, उसने सबके होश उड़ा दिए। अली अकबर की सिर कटी लाश राजा भाट के पोखरे से बरामद की गई। पुलिस जांच में यह कड़वी सच्चाई सामने आई कि जुलूस से लौटते समय सुन्नी संप्रदाय के कुछ लोगों ने आपसी रंजिश और दंगों के माहौल के बीच अली अकबर को पकड़ लिया और बेरहमी से उनकी हत्या कर दी।

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कई उतार चढ़ाई

इस हाई-प्रोफाइल मामले में न्याय तक पहुंचने का रास्ता आसान नहीं था। डीजीसी फौजदारी प्रियदर्शी पियूष त्रिपाठी और एडीजीसी दीपक कुमार मिश्रा ने अभियोजन पक्ष की ओर से कुल नौ गवाहों को अदालत में पेश किया। लगभग 27 साल तक चली इस कानूनी लड़ाई के दौरान कई उतार-चढ़ाव आए। सुनवाई के दौरान चार आरोपियों (हाजी मोहम्मद सुलेमान, नजीबुल्लाह, हमीदुल्लाह और हाजी अब्दुल खालिक) की मौत भी हो गई, जिसके कारण उनके खिलाफ मामला खत्म कर दिया गया। हालांकि, शेष 12 आरोपियों के खिलाफ सबूत इतने पुख्ता थे कि अदालत ने उन्हें 13 फरवरी को ही दोषी करार दे दिया था।

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भारी अर्थदंड और दोषियों की सूची

मंगलवार को कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुनाते हुए सभी 12 दोषियों—हुसैन अहमद, मोहम्मद अयूब फैजी, फहीम अख्तर, असरार अहमद, मोहम्मद याकूब, अली जहीर, इरशाद अहमद, मोहम्मद असहद, अफजाल, अलाउद्दीन, दिलशाद और वसीम अहमद को उम्रकैद की सजा सुनाई। सजा के साथ-साथ अदालत ने प्रत्येक दोषी पर 66,500 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा न करने पर दोषियों को अतिरिक्त सजा काटनी होगी। फैसले के वक्त कोर्ट परिसर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।

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