राजस्थान में दबंगों को नागवार गुजरा दलित दुल्हन का घोड़ी पर बैठना, नीचे उतारा; परिजनों से की मारपीट
लोगों ने आरोप लगाया कि बिंदौली के दौरान दुल्हन को घोड़ी से उतारने की घटना में कुछ महिलाओं सहित करीब 12 लोग शामिल थे, लेकिन अब तक केवल चार आरोपियों को ही गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी को सौंपने की मांग की।

देश के लोग एक तरफ भारत को विकसित बनाने की बातें करते हैं, वहीं दूसरी तरफ इसी देश में ऐसे लोग भी हैं, जो अभी भी सदियों पुरानी सोच से आगे नहीं आ पा रहे हैं, और किसी को घोड़ी पर बैठा देखकर उनके अंदर छुपी हुई घटिया मानसिकता बाहर आ जाती है। ऐसा ही एक मामला राजस्थान के उदयपुर जिले में सामने आया है, जहां शादी समारोह के दौरान एक दुल्हन का घोड़ी पर बैठना कुछ लोगों को नागवार गुजर गया और उन्होंने ना केवल उसे घोड़ी से उतरने पर मजबूर कर दिया, बल्कि उसके परिजनों के साथ मारपीट भी की।
यह मामला जिले के डबोक थाना क्षेत्र के हरियाव गांव का है। पुलिस के अनुसार, 29 अप्रैल को पूजा मेघवाल की शादी के तहत बिंदौली निकाली जा रही थी। इस दौरान दुल्हन पूजा मेघवाल घोड़ी पर सवार थीं। आरोप है कि कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें घोड़ी से उतरने के लिए मजबूर किया और इसी बात को लेकर उनके परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट भी की। इस मामले ने अब राजनीतिक और सामाजिक विवाद का रूप ले लिया है और इस घटना के विरोध में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) व अन्य दलित संगठनों ने प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच की मांग की।
'मुझे बहुत ज्यादा अपमानित महसूस हुआ'
इस घटना की जानकारी देते हुए पीड़िता पूजा मेघवाल ने मीडिया से कहा, 'मुझे घोड़ी से नीचे उतरने के लिए मजबूर किया गया। इससे मुझे बहुत अपमानित महसूस हुआ। मेरे परिवार के लोगों के साथ भी मारपीट की गई।' घटना के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बन गया, जहां लोगों ने तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त कीं और ऐसे ही अन्य अनुभव साझा किए।
घोड़ी पर सवार होकर कलेक्ट्रेट पहुंची दुल्हन
इस घटना के विरोध में गुरुवार को बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्ता और दलित समुदाय के लोग बड़ी संख्या में नगर पालिका परिसर में एकत्र हुए और वहां से उदयपुर जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकाला। इस दौरान पूजा मेघवाल भी उनके साथ थीं और आरोपियों को उनकी जगह दिखाने के लिए घोड़ी पर सवार होकर कलेक्ट्रेट पहुंचीं। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
पुलिस की निष्पक्षता को लेकर उठे सवाल
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि बिंदौली के दौरान दुल्हन को घोड़ी से उतारने की घटना में कुछ महिलाओं सहित करीब एक दर्जन लोग शामिल थे, लेकिन अब तक केवल चार आरोपियों को ही गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए मामले की जांच किसी अन्य अधिकारी को सौंपने की मांग की।
भीम आर्मी ने की सख्त कार्रवाई की मांग
उधर भीम आर्मी के प्रदेश अध्यक्ष जितेंद्र हटवाल ने कहा कि पुलिस को केवल औपचारिक कार्रवाई करने के बजाय सख्त कदम उठाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस जातिवादी मानसिकता वाले लोगों को बचाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने दावा किया कि घटना के तथ्य स्पष्ट हैं और पुलिस को पहले से इसकी जानकारी है। उनके अनुसार, दुल्हन को घोड़ी से नीचे उतरने के लिए मजबूर किया गया, पथराव हुआ और बारात में शामिल लोगों पर लाठियों तथा लोहे की रॉड से हमला किया गया।
पुलिस का कहना है कि इस घटना के संबंध में डबोक थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई है और आगे मामले की जांच की जा रही है।




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