राजस्थान के कई हिस्सों में कहीं हल्की तो कहीं मध्यम बारिश, कल कैसा रहेगा मौसम?
मौसम विभा के मुताबिक राज्य के पश्चिमी हिस्सों में एक-दो स्थानों पर बारिश हुई है जबकि पूर्वी राजस्थान में छिटपुट बारिश के साथ-साथ गरज और तेज हवाएं भी चलीं। 6 अप्रैल से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।

मौसम विभाग ने रविवार को जानकारी दी कि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव के चलते राजस्थान कई हिस्सो में बीते 24 घंटे के दौरान तेज हवाओं और गरज के साथ हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की गई है। मौसम विभाग के मुताबिक राज्य के पश्चिमी हिस्सों में एक-दो स्थानों पर बारिश हुई है जबकि पूर्वी राजस्थान में छिटपुट बारिश के साथ-साथ गरज और तेज हवाएं भी चलीं।
राज्य में सबसे ज्यादा बारिश धौलपुर जिले के बारी कस्बे में 40 मिमी दर्ज की गई। विभाग के मुताबिक रविवार की सुबह फतेहपुर में न्यूनतम तापमान 12.9 डिग्री और बीकानेर जिले के लूणकरणसर में 15.5 डिग्री दर्ज किया गया। शनिवार को उदयपुर के कोटडा इलाके में सबसे ज्यादा बारिश 32 मिमी बारिश दर्ज की गई थी।
कल के मौसम का हाल
मौसम विभाग ने कहा है कि 6 अप्रैल से आने वाले पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। पश्चिमी विक्षोभ दोपहर से जोधपुर और बीकानेर डिवीजनों के कुछ हिस्सों में सक्रिय होने की संभावना है, जिससे कुछ क्षेत्रों में गरज के साथ बारिश और तूफान आने की प्रबल संभावना है।
7 और 8 अप्रैल को ऐसा रहेगा मौसम
साइक्लोन का सबसे ज्यादा प्रभाव 7 अप्रैल को पड़ने की संभावना है। इसके प्रभाव से जोधपुर, बीकानेर, अजमेर, जयपुर, भरतपुर और कोटा डिवीजनों के कई हिस्सों में तेज आंधी, 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं, मध्यम बारिश और छिटपुट ओलावृष्टि होने की संभावना है। 8 अप्रैल को उत्तरी और पूर्वी राजस्थान के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है, जबकि राज्य के बाकी हिस्सों में मौसम अधिकतर शुष्क रहने की उम्मीद है।
आखिर मार्च में इतनी बारिश क्यों?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, आमतौर पर मार्च और अप्रैल के महीनों में इतने पश्चिमी विक्षोभ नहीं बनते हैं। इनका असर अक्सर उत्तर भारत में देखा जाता है। इस बार इनकी स्थिति उत्तर-पश्चिम के मैदानी इलाकों में बनी हुई है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से भरपूर नमी मिलने के कारण, भारी तूफान और बारिश देखने को मिले हैं। वहीं मौसम विभाग ने कहा, 'किसानों को सलाह दी जाती है कि वे खुले खेतों में रखी कटी हुई फसलों और अनाज को ढक दें या उन्हें सुरक्षित स्थान पर रख दें ताकि बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान न हो।




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