पढ़ाई में एवरेज पर NEET में 'टॉपर'; राजस्थान के एक ही परिवार के 5 बच्चों के सिलेक्शन पर क्यों शक?
राजस्थान में एक ही परिवार के पांच बच्चों के नीट रिजल्ट ने सभी को चौंका दिया है। इन पांच में से दो कम से कम दो बच्चे पढ़ाई औसत थे लेकिन फिर भी वह नीट में अच्छे अंक हासिल कर सरकारी कॉलेज में एडमिशन लेने में कामयाब हुए।

नीट पेपर लीक मामले में लगातार नए और चौंकाने वाला खुलासे हो रहे हैं। इस पूरे कांड के तार राजस्थान से भी जुड़े हैं जहां एक बिवाल परिवार के तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया है। इनमें दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल शामिल है। बताया जा रहा है कि दिनेश और बिवाल ने लीक पेपर अपने ही परिवार के बच्चों को दिया था। बिवाल परिवार के दो बच्चों ने इस साल नीट का पेपर दिया था जबकि पांच अन्य पिछले साल दे चुके हैं। उन्हें सरकारी कॉलेज में दाखिला भी मिल गया है। लेकिन इसमें चौंकाने वाली बात ये हैं कि इन पांच बच्चों में कम से कम दो बच्चे पढ़ाई में काफी औसत थे और पिछली परीक्षाओं में भी वे कुछ खास अंक नहीं ला पाए थे। ऐसे में अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन बच्चों को भी पिछले साल किसी तरीके से मदद मिली थी।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दिनेश और मांगीलाल की गिरफ्तारी के बाद मेडिल कॉलेज में फर्स्ट ईयर का छात्र विकास बिवाल अचानक कॉलेज से गायब हो गया था। हालांकि इसके दो दिन बाद उसे गिरफ्तार कर लिया गया। सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल बीपी मीना ने कि विकास इस साल जनवरी से लगातार गायब है और उसका प्रदर्शन भी अच्छा नहीं था। कभी-कभी वह महीने में केवल एक या दो बार ही कॉलेज आता था। जिन परीक्षाओं में वह शामिल हुआ, उनमें विकास ने औसतन 30 फीसदी नंबर मिले।
12वीं में 55 फीसदी और नीट में 86
विकास के पिछले रिकॉर्ड को देखें तो पता चलता है कि वह एक एवरेज स्टूडेंट था लेकिन नीट में अच्छा प्रदर्शन कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट हासिल की। विकास को कक्षा 12 की परीक्षा में 55 फीसदी नंबर मिले थे, लेकिन मेडिकल परीक्षा में 86 फीसदी अंक प्राप्त करने में सफल रहा।
परिवार के अन्य बच्चों का रिकॉर्ड भी अब संदेह के घेरे में है। दिनेश और मांगीलाल के दिवंगत भाई घनश्याम की बेटी पलक जयपुर के एसएमएस मेडिकल कॉलेज की छात्रा है। वह स्कूल में तो होनहार थी लेकिन कॉलेज में ऑसत साबित हुई। उसे 10वीं में 93% और 12वीं में 89% मिले। नीट में उसे 98.61 फीसदी नंबर हासिल किए थे, लेकिन मेडिकल कॉलेज के टेस्ट में वह एक औसत छात्रा साबित हुई। अपने चाचा दिनेश की गिरफ्तारी की खबर मिलते ही वह भी बिना बताए हॉस्टल से गायब हो गई। वहीं मांगीलाल की बेटी प्रगति, जो दौसा के मेडिकल कॉलेज में पढ़ती है, उसने भी अपने पिता और भाई की गिरफ्तारी के दिन कॉलेज से छुट्टी ले ली थी।
कोरोना काल में 91 फीसदी नंबर
प्रगति ने कोरोना काल के दौरान 12वीं में 91 फीसदी और नीट में 89 फीसदी नंबर हासिल किए थे पाए थे। इसके अलावा, इस साल परीक्षा देने वाले परिवार के दो अन्य छात्र ऋषि और अमन भी पढ़ाई में बेहद कमजोर और औसत से नीचे रहे हैं, जिसमें ऋषि ने 12वीं की परीक्षा ग्रेस मार्क्स के साथ केवल 50 फीसदी नंबर से पास की थी। सीबीआई इन जब चीजों को ध्यान में रखते हुए मामले की कड़ियां जोड़ने में लगी है।




साइन इन