हमारे साथ बैठते हैं गौहत्या करने वाले, रामभक्त बना रहे दूरी; राजस्थान के शिक्षा मंत्री का बड़ा बयान
कोटा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में आयोजित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा अनावरण समारोह में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बड़ा बयान दिया।

कोटा में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डाइट) में आयोजित स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा अनावरण समारोह में शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा गाय काटकर खाने वाले लोग हमारे साथ मंच पर बैठते हैं, लेकिन भगवान राम, गंगा माता और भारत माता को मानने वाला व्यक्ति हमसे दूरी बनाता है। इससे बड़ा दोगलापन क्या हो सकता है।
दिलावर के इस बयान ने सामाजिक और राजनीतिक हलकों में तुरंत बहस छेड़ दी। विरोधी दल इसे भड़काऊ और असंवेदनशील बता रहे हैं, जबकि समर्थक इसे सच्चाई उजागर करने वाला बयान मान रहे हैं।
शिक्षा का मंदिर - समानता और एकजुटता का संदेश
दिलावर ने अपने भाषण की शुरुआत शिक्षा के महत्व और समाज में समान अधिकार की बात से की।
उन्होंने कहा कि शिक्षा का स्थान एक मंदिर की तरह है, जहाँ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं होना चाहिए।
समाज के पिछड़े और दलित वर्गों को मुख्यधारा में लाना जरूरी है और सभी वर्गों को समान अवसर मिलना चाहिए।
समाज में बंटवारे पर चेतावनी
दिलावर ने समाज को एकजुट रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि अगर जात-पात और भेदभाव रहेगा, तो देश कमजोर होगा और विकास की रफ्तार रुक जाएगी।
उनका कहना था कि समाज की असली ताकत तब आएगी जब सभी वर्ग आपसी मतभेद भुलाकर साथ आएंगे।
इतिहास और धर्म की मिसाल
दिलावर ने अनुसूचित जाति समुदाय की बहादुरी का हवाला देते हुए कहा कि ये लोग तलवार की धार के सामने भी अडिग रहे और हिंदुत्व को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि कुछ विदेशी शक्तियाँ भारत को तोड़ने और समाज में दरार डालने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन हमें उनके बहकावे में नहीं आना चाहिए।
धर्मांतरण और दृढ़ता का उदाहरण
दिलावर ने कहा कि इतिहास में ऐसे मौके आए जब लोगों को धर्मांतरण के लिए मजबूर किया गया, लेकिन कई लोगों ने मरना स्वीकार किया, धर्म नहीं छोड़ा।
उन्होंने इसे समाज की मजबूती और आस्था का उदाहरण बताया।
स्वामी विवेकानंद से प्रेरणा
दिलावर ने प्रतिमा अनावरण के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि स्वामी विवेकानंद ने शिकागो जाकर दुनिया में भारत और हिंदुत्व की पहचान को मजबूत किया।
उन्होंने कहा कि प्रतिमा का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि विवेकानंद के जीवन और विचारों से प्रेरणा लेना है।
हिंदू होना गर्व की बात
दिलावर ने स्पष्ट किया कि अपने आप को हिंदू कहना किसी प्रकार की सांप्रदायिकता नहीं बल्कि गर्व की बात है। उन्होंने समाज से अपील की कि जात-पात और भेदभाव को मिटाकर एकजुट रहें और देश की तरक्की में योगदान दें।
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