राजस्थान के स्कूलों में अब होगी एक्सपायरी डेट वाली इमारतें; शिक्षा मंत्री दिलावर का बड़ा ऐलान
भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐसा प्रयोग शुरू करने की तैयारी कर ली है, जिसे सुरक्षा और जवाबदेही के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जर्जर स्कूल भवनों को लेकर एक अनूठी योजना पेश की है

भजनलाल शर्मा सरकार ने प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐसा प्रयोग शुरू करने की तैयारी कर ली है, जिसे सुरक्षा और जवाबदेही के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने जर्जर स्कूल भवनों को लेकर एक अनूठी योजना पेश की है, जिसके तहत अब स्कूलों की नई इमारतों पर सिर्फ निर्माण तिथि ही नहीं, बल्कि उनकी ‘एक्सपायरी डेट’ भी लिखी जाएगी। इस पहल को देश में पहली बार लागू किया जाने वाला मॉडल बताया जा रहा है।
सुरक्षा के लिए तय होगी ‘डेडलाइन’
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने विधानसभा में बताया कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे स्कूल भवन हैं, जो अपनी उपयोगी आयु पूरी कर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद वर्षों तक इस्तेमाल में लिए जाते हैं। कई बार इन्हीं जर्जर इमारतों की वजह से हादसे होते हैं और सबसे ज्यादा खतरा बच्चों की जान को रहता है।
मंत्री ने कहा कि नई व्यवस्था में स्कूल भवनों की दीवारों पर स्पष्ट रूप से यह दर्ज रहेगा कि भवन का निर्माण कब हुआ और उसकी वैध उपयोग अवधि कब तक है। इससे प्रशासन को यह जानकारी रहेगी कि किस तारीख के बाद उस इमारत का इस्तेमाल बंद कर उसे ध्वस्त किया जाना है।
उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार बच्चों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगी और किसी भी हाल में जर्जर छत के नीचे भविष्य की पीढ़ी को पढ़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।
जर्जर भवनों की होगी चरणबद्ध विदाई
शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस योजना के तहत पहले चरण में प्रदेशभर के उन स्कूलों की पहचान की जा रही है, जो बेहद खराब स्थिति में हैं या जिनकी संरचनात्मक मजबूती पर सवाल खड़े हो चुके हैं। ऐसे भवनों को गिराकर उनकी जगह नई और सुरक्षित इमारतें बनाई जाएंगी।
नई बिल्डिंग्स में भूकंपरोधी तकनीक, बेहतर वेंटिलेशन, पर्याप्त रोशनी और बच्चों के अनुकूल डिजाइन को प्राथमिकता दी जाएगी। साथ ही, स्कूल परिसरों में मूलभूत सुविधाओं को भी आधुनिक बनाया जाएगा।
1575 करोड़ रुपये का महाप्रोजेक्ट
सरकारी स्कूलों के इस कायाकल्प के लिए एक बड़े बजट का खाका तैयार किया गया है। शिक्षा मंत्री ने बताया कि इस महाप्रोजेक्ट पर 1575 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की जाएगी।
इसमें से करीब 575 करोड़ रुपये राज्य सरकार वहन करेगी, जबकि 1000 करोड़ रुपये का सहयोग केंद्र सरकार से मिलेगा। इस राशि से न केवल नई स्कूल इमारतों का निर्माण होगा, बल्कि स्मार्ट क्लासरूम, फर्नीचर, शौचालय, पीने के पानी और अन्य आधुनिक शैक्षणिक संसाधनों को भी बेहतर बनाया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इस निवेश से प्रदेश के सरकारी स्कूलों की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलेंगी।
विधानसभा में सियासी घमासान
जर्जर स्कूल भवनों का मुद्दा विधानसभा में सियासी बहस का कारण भी बना। कांग्रेस विधायक शांति धारीवाल ने इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए और पूछा कि आखिर इतने कम समय में स्कूल भवनों की हालत इतनी खराब कैसे हो गई।
इस पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार हुआ, जिसकी वजह से स्कूलों की इमारतें समय से पहले ही जर्जर हो गईं।
मंत्री ने कहा कि पुरानी सरकार की लापरवाहियों और खामियों का खामियाजा बच्चों को भुगतना पड़ा, लेकिन अब वर्तमान सरकार उन गलतियों को सुधारने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि
शिक्षा मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘एक्सपायरी डेट’ लिखने का मकसद सिर्फ एक सूचना देना नहीं, बल्कि जिम्मेदारी तय करना है। इससे न केवल अधिकारियों पर निगरानी बनी रहेगी, बल्कि भविष्य में किसी भी तरह की लापरवाही को रोका जा सकेगा।
सरकार का मानना है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है और अगर यह सफल रहा, तो देशभर में स्कूल भवनों की सुरक्षा को लेकर नई सोच को जन्म देगा।
कुल मिलाकर, भजनलाल सरकार का यह कदम राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था में एक बड़ा और दूरगामी बदलाव माना जा रहा है, जिसका सीधा फायदा प्रदेश के लाखों विद्यार्थियों को मिलने की उम्मीद है।
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