युद्ध और खतरे से बचकर राजस्थान पहुंचे हजारों स्टेपी ईगल
राजस्थान की सुनहरी रेत इन दिनों एक खास मेहमान की मेजबानी कर रही है। ये मेहमान हैं आसमान के शहंशाह कहे जाने वाले स्टेपी ईगल जो हर साल हजारों किलोमीटर का सफर तय कर भारत पहुंचते हैं। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है।Cg

राजस्थान की सुनहरी रेत इन दिनों एक खास मेहमान की मेजबानी कर रही है। ये मेहमान हैं आसमान के शहंशाह कहे जाने वाले स्टेपी ईगल जो हर साल हजारों किलोमीटर का सफर तय कर भारत पहुंचते हैं। लेकिन इस बार कहानी कुछ अलग है। पक्षी विशेषज्ञों और बर्डवॉचर्स ने नोटिस किया है कि पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा ईगल्स बीकानेर और जैसलमेर में दिखाई दे रही हैं। सवाल उठता है आखिर ऐसा क्यों?
दरअसल, इन खूबसूरत और ताकतवर परिंदों का सफर हमेशा से ही चुनौती भरा रहा है। मध्य एशिया के ठंडे इलाकों जैसे कजाखस्तान, रूस और मंगोलिया में प्रजनन करने के बाद ये हर सर्दी में गर्म इलाकों की ओर उड़ान भरते हैं। हजारों किलोमीटर की इस यात्रा में ये ईगल्स ईरान, इराक, अफगानिस्तान और अन्य देशों से होकर गुजरते हुए भारत पहुंचते हैं। लेकिन इस बार इनकी उड़ान का रास्ता बदलता नजर आ रहा है।
क्या है बदलाव की वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि इसका कारण पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता और संघर्ष है। खासतौर पर ईरान और इराक जैसे देशों में बढ़ती सैन्य गतिविधियां, हवाई हलचल और असुरक्षित हालात इन पक्षियों के लिए खतरा बन रहे हैं। जहां ये ईगल्स पहले सर्दियों में आराम से समय बिताते थे जैसे स्लॉटरहाउस, डंपिंग साइट्स और वेटलैंड्स अब वे जगहें सुरक्षित नहीं रहीं।
नतीजा यह हुआ कि इन परिंदों ने अपना रास्ता थोड़ा और पूर्व की ओर मोड़ लिया। और यही वजह है कि भारत, खासकर राजस्थान का थार रेगिस्तान, उनके लिए एक सुरक्षित ठिकाना बनकर उभरा है।
स्टेपी ईगल: संकट में शान
करीब दो मीटर तक फैले पंखों वाले स्टेपी ईगल अपनी विशालता और ताकत के लिए जाने जाते हैं। लेकिन पिछले कुछ दशकों में इनकी संख्या तेजी से घटी है। यही वजह है कि इन्हें IUCN रेड लिस्ट में “Endangered” यानी संकटग्रस्त श्रेणी में रखा गया है।
इनके सामने कई खतरे हैं घटता प्राकृतिक आवास, बिजली के तारों से टकराव, अवैध शिकार और तस्करी। ऐसे में इनका सुरक्षित ठिकाना ढूंढना बेहद जरूरी हो गया है।
राजस्थान क्यों बन रहा है नया घर?
राजस्थान का पश्चिमी इलाका अब इन ईगल्स के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। खासतौर पर जोरबीर कंजर्वेशन रिजर्व (बीकानेर) और डेजर्ट नेशनल पार्क (जैसलमेर) इनका प्रमुख ठिकाना बन चुके हैं। हालिया सर्वे में इन दोनों जगहों पर 2000 से ज्यादा स्टेपी ईगल्स देखी गई हैं—जो अपने आप में एक बड़ा आंकड़ा है।
ये दोनों क्षेत्र अब 2026–2035 के “Global Action Plan for Conservation of the Steppe Eagle” का हिस्सा भी बन चुके हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। यहां भोजन की उपलब्धता, कम मानवीय हस्तक्षेप और सुरक्षित माहौल इन पक्षियों को आकर्षित कर रहा है।
भारत बना उम्मीद की उड़ान
स्टेपी ईगल्स का भारत में बढ़ता ठहराव यह दिखाता है कि देश न सिर्फ इंसानों बल्कि वन्यजीवों के लिए भी सुरक्षित ठिकाना बनता जा रहा है। राजस्थान, जो अब तक अपनी संस्कृति और पर्यटन के लिए जाना जाता था, अब वैश्विक स्तर पर वन्यजीव संरक्षण के नक्शे पर भी उभर रहा है।
इन परिंदों की बढ़ती संख्या एक चेतावनी भी है और एक अवसर भी। चेतावनी इसलिए कि दुनिया के दूसरे हिस्सों में हालात बिगड़ रहे हैं, और अवसर इसलिए कि भारत इनके संरक्षण में अहम भूमिका निभा सकता है।
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