मेरा बेटा CMR में नहीं रहता,कौन किसे पूछ रहा, ये मुद्दा नहीं; गहलोत का CM पर तंज
राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot और मौजूदा मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अपने बेटे को लेकर उठे सवालों पर गहलोत ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि उनका बेटा कभी भी मुख्यमंत्री निवास में नहीं रहा

राजस्थान की सियासत में पूर्व मुख्यमंत्री Ashok Gehlot और मौजूदा मुख्यमंत्री Bhajanlal Sharma के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। अपने बेटे को लेकर उठे सवालों पर गहलोत ने सोमवार को साफ शब्दों में कहा कि उनका बेटा कभी भी मुख्यमंत्री निवास में नहीं रहा और उन्होंने उसे अलग रहने के लिए मकान किराए पर दिलाया था।
बेटे को लेकर दी सफाई
जयपुर में मीडिया से बातचीत करते हुए गहलोत ने कहा कि उनके परिवार को लेकर बेवजह राजनीति की जा रही है। उन्होंने कहा, “मेरे बेटे को लेकर बात की जा रही है, जबकि हकीकत यह है कि वह कभी मुख्यमंत्री आवास में नहीं रहा। हमने उसे अलग मकान दिलाया था और वह वहीं रहता था।”
गहलोत ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हमेशा निजी और सरकारी जीवन के बीच दूरी बनाए रखने की कोशिश की है।
भजनलाल के बयान पर पलटवार
दरअसल, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जमवारामगढ़ में एक कार्यक्रम के दौरान गहलोत पर तंज कसते हुए कहा था कि आजकल दिल्ली में उन्हें कोई नहीं पूछ रहा है। इस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए गहलोत ने कहा कि कौन किसे पूछ रहा है, यह उनकी पार्टी का आंतरिक मामला है और मुख्यमंत्री को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए।
उन्होंने कहा, “ये हमारी पार्टी के अंदर की बात है। आप अपने मुद्दों पर ध्यान दीजिए और जनता को जवाब दीजिए।”
‘हम क्या पूछ रहे, जवाब कुछ और मिल रहा’
गहलोत ने राज्य सरकार के कामकाज पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वे जनहित से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं, लेकिन सरकार उनसे असंबंधित जवाब दे रही है।
उन्होंने कहा, “मैं पूछ रहा हूं कि जो बिल्डिंग तैयार है, उसे जनहित में शुरू क्यों नहीं कर रहे? लेकिन जवाब कुछ और दिया जा रहा है। मुझे खुद समझ नहीं आ रहा कि मुख्यमंत्री क्या कहना चाह रहे हैं।”
गहलोत ने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री को अपने सलाहकारों पर भी ध्यान देना चाहिए, क्योंकि गलत सलाह सरकार को नुकसान पहुंचा सकती है।
परिवारवाद पर दिया अलग संदेश
अपने बेटे को लेकर सफाई देने के साथ ही गहलोत ने परिवारवाद के मुद्दे पर भी दिलचस्प बयान दिया। उन्होंने कहा कि परिवार के लोगों को राजनीति में लाने में कोई बुराई नहीं है।
गहलोत ने कहा, मैंने यह नहीं कहा कि बेटों को राजनीति से दूर रखो, मैंने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें सरकार से दूर रखना चाहिए। राजनीति में आएंगे तो नई पीढ़ी को अनुभव मिलेगा।”
उन्होंने आगे कहा कि चाहे बेटा हो, बेटी हो या अन्य रिश्तेदार अगर वे राजनीति में आते हैं तो इससे अनुभव का लाभ नई पीढ़ी तक पहुंचेगा।
‘सरकार से दूरी जरूरी’ पर जोर
गहलोत ने दोहराया कि उनका मूल संदेश सिर्फ इतना था कि सत्ता और परिवार को अलग रखना चाहिए, ताकि प्रशासन में पारदर्शिता बनी रहे।
उन्होंने कहा, “परिवार को राजनीति में लाने में कोई हर्ज नहीं है, लेकिन सरकार में उनकी सीधी भूमिका से बचना चाहिए। मेरी बात को गलत तरीके से पेश किया गया।
सियासी बयानबाजी तेज
गौरतलब है कि पिछले कुछ दिनों से जोधपुर और जयपुर में दोनों नेताओं के बीच लगातार बयानबाजी हो रही है। गहलोत ने आरोप लगाया कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है, जबकि असली मुद्दों से ध्यान हटाया जा रहा है।
उन्होंने कहा,विपक्ष क्या पूछ रहा है और सरकार क्या जवाब दे रही है, यह जनता देख रही है। इतना बड़ा मजाक मैंने पहली बार देखा है।
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