RPSC पेपर में असली अभ्यर्थी की जगह बैठा सॉल्वर; SOG ने 2 साल बाद दबोचा
राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े और नकल माफिया पर शिकंजा कसते हुए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई की है। वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े डमी कैंडिडेट सुनील बिश्नोई को गिरफ्तार किया गया है।

राजस्थान में सरकारी भर्तियों में फर्जीवाड़े और नकल माफिया पर शिकंजा कसते हुए स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) ने बड़ी कार्रवाई की है। वरिष्ठ अध्यापक (द्वितीय श्रेणी) भर्ती परीक्षा-2022 से जुड़े डमी कैंडिडेट सुनील बिश्नोई को गिरफ्तार किया गया है। आरोपी पर ₹10 हजार का इनाम घोषित था और वह पिछले दो साल से फरार चल रहा था। इस गिरफ्तारी के साथ ही SOG की जांच अब एक संगठित परीक्षा माफिया नेटवर्क की परतें खोलने की ओर बढ़ गई है।
एक ही परीक्षा में दो स्तर का फर्जीवाड़ा
मामला राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित वरिष्ठ अध्यापक भर्ती परीक्षा-2022 का है। 24 दिसंबर 2022 को आयोजित इस परीक्षा का सामान्य ज्ञान का पेपर लीक होने के कारण रद्द कर दिया गया था। इसके बाद 29 जनवरी 2023 को दोबारा परीक्षा कराई गई। लेकिन जांच में सामने आया कि पेपर लीक के साथ-साथ डमी कैंडिडेट के जरिए भी परीक्षा में धांधली की गई।
मूल अभ्यर्थी की जगह बैठा डमी, सुनिश्चित कराया चयन
SOG की जांच में खुलासा हुआ कि मूल अभ्यर्थी सम्पतलाल माली ने खुद परीक्षा नहीं दी। उसकी जगह दो अलग-अलग डमी कैंडिडेट्स को बैठाया गया। उदयपुर के चेतक सर्किल स्थित परीक्षा केंद्र पर सामान्य ज्ञान और शैक्षिक मनोविज्ञान का पेपर सुनील बिश्नोई ने दिया। वहीं विज्ञान विषय का पेपर देने वाला दूसरा डमी परीक्षार्थी अभी भी फरार है।
सुनील ने पूरी योजना के तहत असली अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा दी और चयन सुनिश्चित कराने की कोशिश की। इस फर्जीवाड़े के चलते सम्पतलाल माली का चयन वरिष्ठ अध्यापक (विज्ञान) पद पर हो भी गया था। हालांकि, RPSC अजमेर में शिकायत मिलने के बाद नियुक्ति पत्र जारी नहीं हो सका।
पहले हो चुकी मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी
इस मामले में मूल अभ्यर्थी सम्पतलाल माली को SOG पहले ही 13 जनवरी को गिरफ्तार कर चुकी है। अब डमी कैंडिडेट की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को पूरे रैकेट तक पहुंचने में मदद मिलने की उम्मीद है।
SOG की नजर में संगठित गिरोह
SOG एडीजी विशाल बंसल के अनुसार, यह मामला केवल एक अभ्यर्थी और डमी कैंडिडेट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय होने की आशंका है। इस नेटवर्क में बिचौलिए, सॉल्वर गैंग और परीक्षा केंद्रों तक पहुंच रखने वाले लोग शामिल हो सकते हैं।
सुनील बिश्नोई से पूछताछ के दौरान दूसरे फरार डमी कैंडिडेट, बिचौलियों और संभावित मास्टरमाइंड के बारे में अहम सुराग मिलने की उम्मीद है। SOG अब इस मामले को केवल एक केस नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चल रहे भर्ती घोटाले के हिस्से के रूप में देख रही है।
सख्त धाराओं में दर्ज हुआ केस
आरोपी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2022 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। इस अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने पर कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान है, जिससे ऐसे मामलों पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।
भर्ती प्रणाली पर सवाल, युवाओं में आक्रोश
लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने राजस्थान की भर्ती प्रणाली की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं में नाराजगी है, क्योंकि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के अधिकारों पर इस तरह के फर्जीवाड़े से सीधा असर पड़ता है।
आगे की कार्रवाई: नेटवर्क तोड़ने की तैयारी
SOG अब इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में काम कर रही है। जांच अधिकारी प्रकाश कुमार शर्मा के नेतृत्व में टीम अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
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