rajasthan-vidhan-sabha-degana-school-dari-patti-scam-35-lakh-purchase-controversy-nagaur राजस्थान विधानसभा में गूंजा दरी-पट्टी घोटाला,डेगाना के स्कूलों में 35 लाख की खरीद में बड़ा खेल, Jaipur Hindi News - Hindustan
More

राजस्थान विधानसभा में गूंजा दरी-पट्टी घोटाला,डेगाना के स्कूलों में 35 लाख की खरीद में बड़ा खेल

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने नागौर जिले के डेगाना विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में दरी-पट्टी खरीद से जुड़े कथित घोटाले का खुलासा किया। 

Sat, 7 March 2026 05:25 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान, जयपुर
share
राजस्थान विधानसभा में गूंजा दरी-पट्टी घोटाला,डेगाना के स्कूलों में 35 लाख की खरीद में बड़ा खेल

राजस्थान विधानसभा में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया जब पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने नागौर जिले के डेगाना विधानसभा क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में दरी-पट्टी खरीद से जुड़े कथित घोटाले का खुलासा किया। प्रश्नकाल के दौरान सामने आए इस मामले ने शिक्षा विभाग की खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। मंत्री ने मामले को गंभीर मानते हुए तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को तुरंत प्रभाव से निलंबित करने की घोषणा कर दी और पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की बात कही।

प्रश्नकाल में उठा मुद्दा, मंत्री ने रखे चौंकाने वाले तथ्य

प्रश्नकाल के दौरान डेगाना विधायक अजय सिंह ने अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में छात्रों के बैठने की व्यवस्था को लेकर पूरक प्रश्न पूछा। इसके जवाब में पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में जनवरी 2019 से दिसंबर 2023 के बीच डेगाना क्षेत्र के सरकारी स्कूलों के लिए करीब 35 लाख रुपये की दरी-पट्टियों की खरीद की गई थी। यह खरीद विद्यार्थियों के बैठने की सुविधा के लिए की गई थी और उस समय के स्थानीय विधायक की सिफारिश पर सामग्री उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू हुई थी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:मिडिल ईस्ट युद्ध का असर रसोई तक: राजस्थान में LPG सिलेंडर के दाम बढ़े
ये भी पढ़ें:राजस्थान: खेजड़ी संरक्षण बिल अब तक क्यों नहीं? - पूर्व मंत्री हरीश चौधरी
ये भी पढ़ें:आपके खिलाफ केस दर्ज है…राजस्थान में साइबर ठगों का नया खेल

कागजों में दरी, असल में खरीदे गए फर्श

मंत्री ने बताया कि जब इस खरीद की जांच कराई गई तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। कागजों में दरी-पट्टियों की खरीद दर्ज है, लेकिन कई जगहों पर वास्तव में फर्श खरीदे जाने की बात सामने आई। इससे भी अधिक गंभीर तथ्य यह सामने आया कि रिकॉर्ड के अनुसार 288 फर्श स्कूलों तक पहुंचने का उल्लेख है, जबकि 171 फर्श का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

पैसा निकला, लेकिन बच्चों तक नहीं पहुंचा

मंत्री दिलावर ने सदन में कहा कि सरकारी खजाने से पूरा भुगतान कर दिया गया, लेकिन बड़ी संख्या में सामान स्कूलों तक पहुंचा ही नहीं। इससे यह संकेत मिलता है कि खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं। इस मामले ने सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं के नाम पर होने वाली खरीद व्यवस्था की पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

‘गरीब बच्चों के हक पर डाका’, मंत्री का सख्त संदेश

मदन दिलावर ने कहा कि यह केवल दरी-पट्टी खरीद का मामला नहीं बल्कि गरीब बच्चों के अधिकारों से जुड़ा विषय है। उन्होंने कहा कि सरकार भ्रष्टाचार के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। “यह गरीब बच्चों के हक पर डाका है। जो भी अधिकारी या कर्मचारी इसमें शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी,” मंत्री ने सदन में कहा।

तत्कालीन BEO निलंबित, जांच का दायरा बढ़ेगा

मंत्री ने बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर तत्कालीन ब्लॉक शिक्षा अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही उन्होंने संकेत दिए कि जांच केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं रहेगी। खरीद प्रक्रिया में शामिल सभी स्तरों की भूमिका की जांच की जाएगी, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि स्वीकृति से लेकर आपूर्ति और वितरण तक किन-किन अधिकारियों की जिम्मेदारी थी।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

इस खुलासे के बाद शिक्षा विभाग में स्थानीय स्तर पर होने वाली खरीद प्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिकॉर्ड में दर्ज 171 फर्श आखिर कहां गायब हो गए। क्या ये सामान कभी खरीदे ही नहीं गए या फिर खरीद के बाद कहीं और भेज दिए गए। अब सबकी नजरें प्रस्तावित उच्च स्तरीय जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सके।

लेटेस्ट   Hindi News ,    बॉलीवुड न्यूज,   बिजनेस न्यूज,   टेक ,   ऑटो,   करियर , और   राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।