राजस्थान विधानसभा में गूंजा टीचर्स ट्रांसफर का मुद्दा, थर्ड ग्रेड तबादलों पर मंत्री ने दिया ये जवाब
राजस्थान के ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों को लेकर विधानसभा में सोमवार को सियासी पारा चढ़ गया। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक गोविंद प्रसाद के सवाल पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया

राजस्थान के ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों को लेकर विधानसभा में सोमवार को सियासी पारा चढ़ गया। प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक गोविंद प्रसाद के सवाल पर शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने स्पष्ट किया कि फिलहाल ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने सदन को बताया कि जब तक नई तबादला नीति तैयार नहीं हो जाती, तब तक इस वर्ग के शिक्षकों के स्थानांतरण पर कोई निर्णय नहीं लिया जाएगा।
शिक्षा मंत्री के इस जवाब के बाद विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए देरी पर सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष Tika Ram Jully ने कहा कि सरकार को बने सवा दो साल से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक स्पष्ट और व्यापक तबादला नीति लागू नहीं की जा सकी। उन्होंने पूछा कि आखिर इतनी लंबी अवधि के बावजूद नीति को अंतिम रूप क्यों नहीं दिया गया।
मंत्री बोले— नीति के बाद ही होगा विचार
मदन दिलावर ने सदन में कहा कि राज्य सरकार व्यापक और पारदर्शी तबादला नीति पर काम कर रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि नीति को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है और जैसे ही इसे मंजूरी मिल जाएगी, ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों पर भी विचार किया जाएगा।
मंत्री ने दोहराया कि वर्तमान में जिलों से बाहर ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादले का कोई स्पष्ट प्रावधान मौजूद नहीं है। ऐसे में बिना नीति के किसी भी प्रकार का निर्णय लेना संभव नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार चाहती है कि एक ऐसी नीति बने जो सभी वर्गों के लिए समान और न्यायसंगत हो।
भाजपा–कांग्रेस आमने-सामने
सदन में इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। टीकाराम जूली के सवालों पर पलटवार करते हुए शिक्षा मंत्री ने वर्ष 2018 का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में 2200 से अधिक ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादले किए गए थे।
मंत्री ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के दौरान एक भी ग्रेड थर्ड शिक्षक का तबादला नहीं हुआ। उन्होंने विपक्ष से पूछा कि उस समय किसने रोक रखा था। दिलावर ने यह भी कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने कटऑफ डेट तय कर वैकल्पिक रास्ता निकाला था, जबकि सामान्य परिस्थितियों में ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों का कोई स्थायी प्रावधान नहीं होता।
इस बयान के बाद विपक्ष ने सत्ता पक्ष पर शिक्षकों की समस्याओं को लंबित रखने का आरोप लगाया। विपक्षी सदस्यों ने कहा कि प्रदेशभर में हजारों शिक्षक वर्षों से स्थानांतरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं और स्पष्ट नीति के अभाव में उन्हें व्यक्तिगत व पारिवारिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षकों की निगाहें सरकार पर
ग्रेड थर्ड शिक्षकों के तबादलों का मुद्दा लंबे समय से चर्चा में है। शिक्षक संगठनों द्वारा समय-समय पर तबादला नीति लागू करने की मांग उठाई जाती रही है। विशेष रूप से ऐसे शिक्षक, जो दूरस्थ या अपने गृह जिलों से बाहर कार्यरत हैं, वे स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल सरकार का रुख स्पष्ट है कि नई तबादला नीति के बिना किसी प्रकार का कदम नहीं उठाया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने सदन में यह भी कहा कि सरकार शिक्षकों की समस्याओं के प्रति संवेदनशील है और नीति बनाते समय सभी पक्षों के सुझावों पर विचार किया जाएगा।
अब प्रदेशभर के ग्रेड थर्ड शिक्षकों की नजर इस बात पर टिकी है कि सरकार नई तबादला नीति को कब अंतिम रूप देती है। नीति लागू होने के बाद ही यह तय होगा कि शिक्षकों को लंबे इंतजार से राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल, विधानसभा में हुई इस बहस ने एक बार फिर शिक्षक तबादलों के मुद्दे को राजनीतिक केंद्र में ला खड़ा किया है।
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