राजस्थान बजट में सरकारी कर्मचारियों की बड़ी उम्मीदें टूटीं, कई मांगें अधूरी
राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत ताज़ा बजट से राज्य का कर्मचारी वर्ग खासा निराश नजर आ रहा है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से लंबित प्रमुख मांगों पर इस बार भी कोई ठोस और स्पष्ट घोषणा नहीं की गई, जिससे कर्मचारियों में मायूसी का माहौल है।

राजस्थान सरकार द्वारा प्रस्तुत ताज़ा बजट से राज्य का कर्मचारी वर्ग खासा निराश नजर आ रहा है। विभिन्न कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वर्षों से लंबित प्रमुख मांगों पर इस बार भी कोई ठोस और स्पष्ट घोषणा नहीं की गई, जिससे कर्मचारियों में मायूसी का माहौल है। वेतन विसंगति, लंबित पदोन्नतियां, पुरानी पेंशन योजना और संविदाकर्मियों के स्थायित्व जैसे मुद्दों पर अपेक्षित निर्णय न होने से असंतोष उभर कर सामने आया है।
वेतन विसंगति और पदोन्नति पर नहीं हुई पहल
राज्य कर्मचारियों का कहना है कि वेतन विसंगति का मामला लंबे समय से लंबित है। विभिन्न विभागों में समान पदों पर कार्यरत कर्मचारियों के वेतन में अंतर को लेकर कई बार ज्ञापन और आंदोलन किए गए, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई स्पष्ट रोडमैप प्रस्तुत नहीं किया गया।
इसके साथ ही कई विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया वर्षों से अटकी हुई है। कर्मचारियों को उम्मीद थी कि सरकार पदोन्नतियों को गति देने के लिए विशेष अभियान या समयबद्ध कार्यक्रम की घोषणा करेगी, लेकिन बजट में इस संबंध में भी कोई ठोस पहल सामने नहीं आई।
पुरानी पेंशन और संविदाकर्मियों पर चुप्पी
पुरानी पेंशन योजना को लेकर भी कर्मचारियों की अपेक्षाएं अधूरी रह गईं। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि इस मुद्दे पर सरकार की ओर से स्पष्ट और ठोस निर्णय की आवश्यकता थी। हालांकि बजट में इस संबंध में कोई नया प्रावधान या विस्तृत योजना सामने नहीं आई।
वहीं, संविदाकर्मियों के स्थायित्व को लेकर भी बजट में कोई नीति घोषित नहीं की गई। अस्थायी और संविदा आधार पर कार्यरत कर्मचारियों में इसे लेकर असंतोष है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवाएं देने के बावजूद उन्हें स्थायित्व नहीं मिल रहा है और इस बजट से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली।
क्रमोन्नत विद्यालयों और नए पदों पर निराशा
शिक्षा विभाग से जुड़े कर्मचारियों ने भी बजट को निराशाजनक बताया है। क्रमोन्नत विद्यालयों के लिए नए पद सृजन की घोषणा नहीं होने से शिक्षकों में असंतोष है। उनका कहना है कि कई विद्यालयों में पद स्वीकृत नहीं होने के कारण शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है, लेकिन बजट में इस दिशा में कोई कदम नहीं उठाया गया।
महिला शिक्षा पर विशेष पहल का अभाव
बजट में महिला शिक्षा को लेकर भी किसी विशेष योजना या नवाचार की घोषणा नहीं की गई। ग्रामीण और सीमावर्ती क्षेत्रों में छात्राओं के लिए विशेष प्रोत्साहन योजनाओं की उम्मीद की जा रही थी, जो पूरी नहीं हो सकी। महिला शिक्षा को समाज के समग्र विकास की आधारशिला माना जाता है, ऐसे में इस क्षेत्र में ठोस पहल की अपेक्षा थी।
शिक्षिका देवकी विश्नोई ने कहा, “बजट में महिला कर्मचारियों और महिलाओं के उत्थान के लिए विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। छात्राओं की शिक्षा व्यवस्था के लिए भी अलग से कोई प्रावधान नजर नहीं आया।”
फलोदी जिले में उपेक्षा का आरोप
कर्मचारी संगठनों ने क्षेत्रीय स्तर पर भी उपेक्षा का आरोप लगाया है। राजस्थान पंचायत एवं माध्यमिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष नरेंद्र देवड़ा ने कहा, “यह बजट कर्मचारियों के लिए निराशाजनक है। उनके कल्याण के लिए कोई विशेष प्रावधान नहीं किए गए। फलोदी जिले में उच्च शिक्षा के संबंध में भी कोई खास घोषणा नहीं हुई है।”
वहीं, ब्लॉक फलोदी के अध्यक्ष मोहम्मद हैदर ने कहा, “राजस्थान के बजट में फलोदी जिले की पूरी तरह से उपेक्षा की गई है। कर्मचारी वर्ग के लिए कोई राहत नहीं है। शिक्षा विभाग में भी जिले को कोई विशेष लाभ नहीं मिला।”
आगे की रणनीति पर विचार
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि वे बजट की समीक्षा के बाद आगे की रणनीति तय करेंगे। यदि उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक पहल नहीं करती है तो आंदोलन की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।
कुल मिलाकर, इस बार का बजट राज्य के कर्मचारी वर्ग की अपेक्षाओं पर खरा उतरता नहीं दिख रहा है। अब निगाहें सरकार की आगामी घोषणाओं और कर्मचारी संगठनों की अगली रणनीति पर टिकी हैं।
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