राजस्थान में पेटपूजा के नाम पर करोड़ों की टैक्स चोरी! होटल-रेस्टोरेंट के डबल अकाउंट से खुला बड़ा खेल
देशभर में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार में टैक्स चोरी का एक ऐसा डिजिटल तरीका सामने आया है, जिसने आयकर विभाग के अधिकारियों को भी चौंका दिया है।

देशभर में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार में टैक्स चोरी का एक ऐसा डिजिटल तरीका सामने आया है, जिसने आयकर विभाग के अधिकारियों को भी चौंका दिया है। जांच में सामने आया है कि कई कारोबारी ‘पेटपूजा’ नाम के रेस्टोरेंट मैनेजमेंट सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का टर्नओवर छिपा रहे थे। आयकर विभाग की कार्रवाई के दौरान यह खुलासा हुआ कि कई प्रतिष्ठानों ने इस सॉफ्टवेयर के जरिए डबल अकाउंट सिस्टम बना रखा था, जिससे असली बिक्री और आधिकारिक रिकॉर्ड अलग-अलग रखे जा रहे थे।
दरअसल, आयकर विभाग पिछले कुछ महीनों से देशभर में होटल और फूड इंडस्ट्री से जुड़े कारोबारियों के वित्तीय रिकॉर्ड की जांच कर रहा है। इसी जांच के दौरान राजस्थान के अजमेर समेत कई शहरों में चल रहे रेस्टोरेंट्स पर कार्रवाई की गई। शुरुआती जांच में ही करीब 15 करोड़ रुपये की आय छिपाने का मामला सामने आया, जिसके बाद विभाग ने डिजिटल रिकॉर्ड और सर्वर डेटा की गहन जांच शुरू कर दी।
सॉफ्टवेयर में बनाया गया ‘डबल अकाउंट सिस्टम’
जांच अधिकारियों के अनुसार, कई रेस्टोरेंट संचालक ‘पेटपूजा’ सॉफ्टवेयर में दो तरह के अकाउंट चलाते थे। एक अकाउंट वह होता था, जो आधिकारिक बिलिंग और टैक्स रिटर्न के लिए इस्तेमाल किया जाता था। जबकि दूसरा अकाउंट अनौपचारिक होता था, जिसमें नकद बिक्री या वास्तविक कारोबार का पूरा डेटा दर्ज किया जाता था।
इस अनौपचारिक डेटा तक पहुंचने के लिए अलग पासवर्ड रखा जाता था, जिससे सामान्य जांच में यह जानकारी सामने नहीं आती थी। इस तरीके से रेस्टोरेंट संचालक बड़ी मात्रा में नकद बिक्री को आधिकारिक खातों में दर्ज नहीं करते थे और आयकर रिटर्न में कम टर्नओवर दिखाकर टैक्स बचा लेते थे।
नकद बिक्री छिपाकर घटाया जाता था टर्नओवर
आयकर अधिकारियों के अनुसार, कई मामलों में रेस्टोरेंट पहले पूरे दिन की बिक्री सॉफ्टवेयर में दर्ज करते थे और बाद में कुछ बिलों को डिलीट या संशोधित कर दिया जाता था। इससे अंतिम रिकॉर्ड में बिक्री कम दिखाई देती थी।
राष्ट्रीय स्तर पर हुई जांच में भी इसी तरह की प्रवृत्ति सामने आई है। आयकर विभाग ने देशभर के रेस्टोरेंट्स के डेटा का विश्लेषण कर पाया कि कई प्रतिष्ठानों ने वास्तविक बिक्री छिपाकर लगभग 408 करोड़ रुपये का टर्नओवर कम दिखाया। इसके बाद करीब 63 हजार रेस्टोरेंट्स को अपने आयकर रिटर्न अपडेट करने के लिए नोटिस भेजे गए हैं।
कई शहरों में छापेमारी, बढ़ सकती है कार्रवाई
आयकर विभाग के अनुसार यह मामला केवल एक या दो रेस्टोरेंट तक सीमित नहीं है। जयपुर, अजमेर समेत कई शहरों के होटल, कैफे और फूड आउटलेट्स के खिलाफ जांच जारी है। अधिकारियों ने कंप्यूटर सर्वर, बिलिंग मशीन, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा को जब्त कर लिया है और उसका मिलान टैक्स रिटर्न से किया जा रहा है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि कई अन्य प्रतिष्ठान भी इसी तरह के डिजिटल तरीके से टैक्स चोरी कर रहे हैं। इसलिए आने वाले दिनों में और भी नामी रेस्टोरेंट और होटल मालिकों को नोटिस मिलने की संभावना है।
तकनीक से पकड़ में आया करोड़ों का खेल
आयकर विभाग अब डिजिटल फॉरेंसिक और डेटा एनालिटिक्स की मदद से ऐसे मामलों का पता लगा रहा है। रेस्टोरेंट्स के बिलिंग डेटा, जीएसटी रिटर्न और बैंक लेनदेन का मिलान कर यह पता लगाया जा रहा है कि वास्तविक बिक्री कितनी है और टैक्स रिटर्न में कितना टर्नओवर दिखाया गया है।
जांच अधिकारियों का कहना है कि तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के बावजूद टैक्स चोरी के नए तरीके सामने आ रहे हैं, लेकिन अब डिजिटल ट्रेल के कारण ऐसे मामलों को पकड़ना भी आसान हो गया है।
होटल इंडस्ट्री में मचा हड़कंप
इस खुलासे के बाद होटल और रेस्टोरेंट उद्योग में हड़कंप मच गया है। कई कारोबारियों ने अपने अकाउंट्स की समीक्षा शुरू कर दी है, जबकि आयकर विभाग की टीमें लगातार डेटा खंगाल रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि यदि जांच में बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी की पुष्टि होती है तो संबंधित कारोबारियों पर भारी जुर्माना और कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक शहर तक सीमित नहीं है और देशभर के फूड बिजनेस में टैक्स अनुपालन को लेकर बड़ी जांच का कारण बन सकता है। आने वाले समय में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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