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बजट में स्टाम्प ड्यूटी बढ़ी, DLC दरें बदली, गाड़ियों पर छूट; राजस्थानियों की जेब पर ये होंगे 5 बड़े असर

राजस्थान सरकार ने बुधवार, 11 फरवरी को राज्य का बजट पेश किया, जिसमें कुछ फैसले सीधे आम जनता की जेब और संपत्ति से जुड़े हैं। इस बार के बजट में अचल संपत्ति और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं

Thu, 12 Feb 2026 10:07 AMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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बजट में स्टाम्प ड्यूटी बढ़ी, DLC दरें बदली, गाड़ियों पर छूट; राजस्थानियों की जेब पर ये होंगे 5 बड़े असर

राजस्थान सरकार ने बुधवार, 11 फरवरी को राज्य का बजट पेश किया, जिसमें कुछ फैसले सीधे आम जनता की जेब और संपत्ति से जुड़े हैं। इस बार के बजट में अचल संपत्ति और गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं, जो कुछ मामलों में महंगाई और कुछ मामलों में राहत लेकर आए हैं।

स्टाम्प ड्यूटी में बदलाव

सबसे बड़ा बदलाव स्टाम्प ड्यूटी और सरचार्ज में आया है। सरकार ने स्टाम्प पेपर पर लगने वाले सरचार्ज को 3 फीसदी बढ़ा दिया है, जिसका असर सीधे तौर पर स्टाम्प पेपर खरीदने पर नजर आएगा। इस फैसले के बाद, अचल संपत्ति की रजिस्ट्री कराने वाले लोगों को अब पहले से अधिक खर्च करना होगा।

सिर्फ स्टाम्प ड्यूटी ही नहीं, बल्कि सरकार ने डीएलसी (डिफरेंट लैंड कैटेगरी) दरों में भी बदलाव किया है। अब राज्य में विभिन्न प्रकार की जमीनों के लिए एक समान दर लागू की जाएगी। इससे फार्म हाउस और रिसोर्ट जैसी जमीनों की रजिस्ट्री महंगी होने वाली है।

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फार्म हाउस की रजिस्ट्री महंगी

फार्म हाउस की जमीन के मामले में पहले इसे एग्रीकल्चर जमीन के 1.5 गुना मूल्य पर रजिस्ट्री किया जाता था। अब इसे 3 गुना मूल्य पर रजिस्ट्री किया जाएगा। वहीं रिसोर्ट की जमीन का बाजार मूल्य पहले कृषि भूमि के 2 गुना माना जाता था, लेकिन अब इसे कॉमर्शियल रेट का 75 फीसदी मानकर रजिस्ट्री किया जाएगा। इन बदलावों से जमीन की रजिस्ट्री कराने वालों के खर्च में स्पष्ट बढ़ोतरी होगी।

हालांकि बजट में कुछ राहत की भी घोषणा की गई है। सरकार ने लोन डॉक्यूमेंट की रजिस्ट्री फीस में कटौती की है। बैंक या वित्तीय संस्थाओं से लिए गए लोन के डॉक्यूमेंट पर लगने वाले चार्ज को आधा कर दिया गया है, यानी अब यह सिर्फ 0.5 फीसदी लगेगा। इसके साथ ही अधिकतम सीमा को 1 लाख रुपए तक सीमित कर दिया गया है। स्टाम्प ड्यूटी को भी 0.125 फीसदी कर दिया गया है, जबकि अधिकतम सीमा को घटाकर 10 लाख रुपए किया गया है।

यानी, अगर कोई व्यक्ति बैंक लोन के लिए डॉक्यूमेंट रजिस्ट्री कराता है, तो उसका खर्च पहले की तुलना में आधा हो जाएगा। यह कदम उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है, जो प्रॉपर्टी खरीदने या लोन लेने की योजना बना रहे हैं।

व्हीकल टैक्स पर राहत

बजट में वाहन मालिकों के लिए भी बड़ी घोषणा की गई है। सरकार ने दूसरे राज्य से प्राइवेट व्हीकल लाने पर टैक्स में राहत देने की घोषणा की है। पहले इस तरह की गाड़ियों पर रजिस्ट्रेशन के समय मोटर व्हीकल टैक्स अलग-अलग दरों पर लगता था, जिसमें सरकार केवल 25 फीसदी तक की छूट देती थी। अब यह छूट 50 फीसदी तक बढ़ा दी गई है, जिससे दूसरे राज्य से वाहन लाने वाले लोगों की लागत कम होगी।

बजट के इन निर्णयों से साफ है कि सरकार ने जनता की जेब पर सीधे असर डालने वाले फैसलों को संतुलित किया है। एक तरफ स्टाम्प ड्यूटी और DLC दरों में वृद्धि से संपत्ति महंगी होगी, वहीं लोन डॉक्यूमेंट की फीस और दूसरे राज्य से गाड़ियों पर टैक्स में राहत से आम आदमी को कुछ राहत मिलेगी।

क्या कहते है एक्सपर्ट

विशेषज्ञों का कहना है कि फार्म हाउस और रिसोर्ट जैसी संपत्तियों पर रजिस्ट्री महंगी होने से इन संपत्तियों की खरीद पर प्रभाव पड़ेगा। वहीं, लोन लेने वालों के लिए यह फैसला सकारात्मक है और निजी वाहन लाने वालों के लिए यह बड़ा आर्थिक लाभ साबित हो सकता है।

राजस्थान सरकार ने इस बजट में यह संदेश भी दिया है कि आर्थिक वृद्धि और वित्तीय अनुशासन दोनों को ध्यान में रखते हुए निर्णय लिए जा रहे हैं। जहां संपत्ति की खरीद महंगी होगी, वहीं जरूरी राहतें भी दी गई हैं, ताकि जनता पर अधिक भार न पड़े।

सिर्फ यही नहीं, इस बजट से राज्य में अचल संपत्ति और वाहनों के रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। नए नियमों के बाद अब सभी प्रकार की जमीनों पर समान DLC दरें लागू होंगी, जिससे किसी भी प्रकार की रजिस्ट्री प्रक्रिया में भ्रांतियों और अनियमितताओं की संभावना कम होगी।

इनका कहना है

बजट पेश करते समय वित्त मंत्री ने कहा कि ये कदम संतुलित और सभी वर्गों को ध्यान में रखते हुए लिए गए हैं। उनका मानना है कि यह बजट भविष्य में निवेश और संपत्ति के विकास को बढ़ावा देगा, साथ ही आम जनता को भी आर्थिक दृष्टि से मदद करेगा।

राजस्थान का यह बजट न केवल खर्च और छूट का संतुलन है, बल्कि यह भविष्य की संपत्ति और वित्तीय नीतियों की दिशा भी तय करता है।

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