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राजस्थान के नागौर में धार्मिक टिप्पणी पर बवाल; थाने के बाहर उतरवाया भगवा चोला

राजस्थान के नागौर जिले में धार्मिक टिप्पणी को लेकर सियासी और सामाजिक तापमान अचानक चढ़ गया। मंगलवार को श्रीबालाजी थाना के बाहर उस वक्त तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब संत समाज और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एक भजन गायक से सार्वजनिक रूप से उसका भगवा चोला उतरवा दिया। 

Tue, 24 Feb 2026 10:20 PMSachin Sharma लाइव हिन्दुस्तान
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राजस्थान के नागौर में धार्मिक टिप्पणी पर बवाल; थाने के बाहर उतरवाया भगवा चोला

राजस्थान के नागौर जिले में धार्मिक टिप्पणी को लेकर सियासी और सामाजिक तापमान अचानक चढ़ गया। मंगलवार को श्रीबालाजी थाना के बाहर उस वक्त तनावपूर्ण स्थिति बन गई, जब संत समाज और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ताओं ने एक भजन गायक से सार्वजनिक रूप से उसका भगवा चोला उतरवा दिया। आरोप है कि भजन गायक ने सत्संग कार्यक्रम के दौरान भगवान राम, माता शबरी, देवी सरस्वती और भगवान विष्णु पर विवादित टिप्पणियां की थीं।

घटना नागौर जिले के श्रीबालाजी थाना क्षेत्र की है। सथेरण गांव निवासी भजन गायक प्रभुप्रेमी पर आरोप है कि 17 फरवरी को बीकानेर जिले के मुंडड गांव में आयोजित एक सत्संग में उन्होंने देवी-देवताओं और सनातन धर्म को लेकर आपत्तिजनक बयान दिए। इसको लेकर संत समाज और हिंदूवादी संगठनों में आक्रोश फैल गया।

थाने के बाहर बढ़ा दबाव, धरने की चेतावनी

मंगलवार को बड़ी संख्या में संत-महात्मा, स्थानीय भजन गायक और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े लोग श्रीबालाजी थाने के बाहर एकत्र हो गए। प्रदर्शनकारियों ने आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की और अनिश्चितकालीन धरने की चेतावनी दी। आरोप लगाया गया कि थाना इंचार्ज ओम प्रकाश गोरा ने शुरुआत में रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी की, जिससे माहौल और गरमा गया।

हालांकि बढ़ते दबाव के बीच पुलिस ने मामला दर्ज कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की। प्रभुप्रेमी के खिलाफ श्रीबालाजी और जसरासर थानों में धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है। पुलिस आरोपी को थाने लेकर आई, जहां बाहर जुटी भीड़ ने उसे घेर लिया।

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संतों और आरोपी के बीच तीखी बातचीत

थाने के बाहर संत समाज और आरोपी के बीच तीखा संवाद हुआ। संतों ने सवाल उठाया—“राम के बारे में कौन सी रामायण पढ़ी है? शास्त्र पर क्यों बोले?”

आरोपी प्रभुप्रेमी ने जवाब में कहा कि उन्होंने सोशल मीडिया और कुछ पुस्तकों से सुनी-बताई बातों के आधार पर टिप्पणी कर दी। उन्होंने यह भी कहा कि “रजनीश और ओशो की किताबें पढ़-पढ़कर मेरा दिमाग खराब हो गया था। मैंने जो कहा, वह सोशल मीडिया से सुना-पढ़ा था।”

संतों ने कड़े शब्दों में कहा—“सनातन का चोला पहनकर सनातन के खिलाफ बोलना स्वीकार नहीं होगा।” इस दौरान आरोपी ने हाथ जोड़कर सार्वजनिक माफी मांगी और कहा—“आज से न भगवा पहनूंगा, न किसी देवी-देवता का अपमान करूंगा। आज मेरा नया जन्म है।”

“आप भगवा और सनातन के लायक नहीं”

घटनास्थल पर मौजूद संत लक्ष्मीनारायण महाराज ने कहा कि सनातन धर्म के प्रतीकों का सम्मान सर्वोपरि है। उन्होंने कहा—“भगवा त्याग और आस्था का प्रतीक है। इसे धारण कर यदि कोई सनातन के खिलाफ बोलेगा तो संत समाज चुप नहीं बैठेगा।”

इसके बाद संतों ने आरोपी से भगवा चोला उतारने को कहा। भीड़ के बीच आरोपी ने सार्वजनिक रूप से भगवा वस्त्र उतार दिए। संतों ने स्पष्ट शब्दों में कहा—“आप भगवा और सनातन के लायक नहीं।”

पुलिस की भूमिका और आगे की कार्रवाई

पुलिस का कहना है कि दोनों थानों में दर्ज मामले यथावत रहेंगे और कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

घटना के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया था। हालांकि स्थिति तनावपूर्ण रही, लेकिन किसी प्रकार की हिंसक घटना की सूचना नहीं है।

राजस्थान में धार्मिक संवेदनशीलता फिर सुर्खियों में

नागौर की यह घटना एक बार फिर राजस्थान में धार्मिक मुद्दों की संवेदनशीलता को उजागर करती है। पिछले कुछ समय में प्रदेश में धार्मिक और सामाजिक विषयों पर बयानबाजी को लेकर विवाद तेज हुए हैं।

राजस्थान में संत समाज और धार्मिक संगठनों का प्रभाव व्यापक है, ऐसे में धार्मिक प्रतीकों और आस्थाओं पर टिप्पणी सीधे जनभावनाओं से जुड़ जाती है। नागौर की इस घटना ने सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय सियासत तक हलचल पैदा कर दी है।

फिलहाल मामला पुलिस जांच के दायरे में है, लेकिन थाने के बाहर भगवा चोला उतरवाने की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। नागौर की यह घटना आने वाले दिनों में प्रदेश की राजनीति और सामाजिक विमर्श में चर्चा का बड़ा विषय बन सकती है।

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