लोक अदालत में आज सुलह का दिन; राजस्थान में लाखों मामलों के निपटारे की कवायद
देशभर में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और लोगों को सस्ता व आसान न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया।

देशभर में लंबित मामलों के त्वरित निपटारे और लोगों को सस्ता व आसान न्याय उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2026 की पहली राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन शनिवार को किया गया। राजस्थान में इसका औपचारिक शुभारंभ जयपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर पीठ के नए भवन में हुआ, जहां कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस बार प्रदेशभर में 480 बेंचों के माध्यम से 10 लाख से अधिक मामलों के निपटारे का लक्ष्य रखा गया है।
प्रदेशभर में 480 बेंचों पर सुनवाई
राष्ट्रीय लोक अदालत के तहत राजस्थान के सभी जिलों में विशेष बेंचों का गठन किया गया है। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के निर्देशन में आयोजित इस लोक अदालत में हाईकोर्ट की जोधपुर और जयपुर दोनों पीठों में 3-3 विशेष बेंचें बनाई गई हैं। इसके अलावा प्रदेश की अधीनस्थ अदालतों में कुल 480 बेंचों के जरिए विभिन्न प्रकार के मामलों की सुनवाई की जा रही है।
इन बेंचों में न्यायिक अधिकारी, अधिवक्ता और संबंधित विभागों के प्रतिनिधि मिलकर मामलों को आपसी सहमति और सुलह के आधार पर निपटाने का प्रयास कर रहे हैं। इसका उद्देश्य यह है कि लंबे समय से लंबित मामलों को सरल और कम समय में समाप्त किया जा सके।
10 लाख से अधिक मामलों के निपटारे का लक्ष्य
इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत में रिकॉर्ड संख्या में मामलों को निपटाने का लक्ष्य रखा गया है। विशेष सचिव महेंद्र प्रताप बेनीवाल के अनुसार 6 मार्च तक प्रदेशभर से बड़ी संख्या में मामलों को लोक अदालत के लिए चिन्हित किया गया।
आंकड़ों के अनुसार प्री-लिटिगेशन यानी अदालत में मुकदमा दर्ज होने से पहले के 7,91,384 मामलों को लोक अदालत में रखा गया है। इसके अलावा विभिन्न न्यायालयों में लंबित 2,32,478 मामलों को भी लोक अदालत में रेफर किया गया है। इस तरह कुल 10,23,842 मामलों को सुलह-समझौते के माध्यम से निपटाने की तैयारी की गई है।
इन मामलों में बैंक ऋण विवाद, बिजली-पानी बिल, मोटर दुर्घटना क्लेम, चेक बाउंस, पारिवारिक विवाद, राजस्व और अन्य छोटे आपराधिक व दीवानी मामले शामिल हैं।
सुलह-समझौते से होगा विवादों का समाधान
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा ने कहा कि लोक अदालत न्याय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से लोग अपने विवादों को आपसी सहमति से जल्दी और सरल तरीके से सुलझा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें फैसले आपसी सहमति से होते हैं और दोनों पक्ष संतुष्ट रहते हैं। इससे न्यायालयों में लंबित मामलों का बोझ कम होता है और आम लोगों को भी त्वरित न्याय मिल पाता है।
ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से सुनवाई
इस बार राष्ट्रीय लोक अदालत में तकनीक का भी उपयोग किया जा रहा है। कई मामलों की सुनवाई ऑनलाइन माध्यम से भी की जा रही है, जिससे दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सुविधा मिल सके। वहीं अधिकांश मामलों की सुनवाई पारंपरिक तरीके से अदालतों में ऑफलाइन भी की जा रही है।
विधिक सेवा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि लोक अदालत के जरिए छोटे-छोटे विवादों को लंबी कानूनी प्रक्रिया में उलझने से बचाया जा सकता है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचता
सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने की पहल
राष्ट्रीय लोक अदालत का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों को सस्ता, सुलभ और त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। अदालतों में वर्षों से लंबित मामलों के कारण न्याय प्रणाली पर दबाव बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लोक अदालतें एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आई हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार लोक अदालतों के माध्यम से बड़ी संख्या में मामलों का एक ही दिन में निस्तारण संभव हो पाता है। इससे अदालतों में लंबित मामलों का बोझ भी कम होता है और लोगों को जल्दी न्याय मिलने का रास्ता भी आसान बनता है।
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