हमारे आशियाने बचा लो… जयपुर में बुलडोजर के डर से सड़कों पर उतरा जनसैलाब
रविवार की सुबह सांगानेर और बगरू क्षेत्र में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। आम दिनों की तरह सड़कों पर सिर्फ वाहनों की आवाजाही नहीं थी, बल्कि हजारों लोग अपने घरों को बचाने की उम्मीद लेकर सड़कों पर उतर आए थे।

रविवार की सुबह सांगानेर और बगरू क्षेत्र में एक अलग ही तस्वीर देखने को मिली। आम दिनों की तरह सड़कों पर सिर्फ वाहनों की आवाजाही नहीं थी, बल्कि हजारों लोग अपने घरों को बचाने की उम्मीद लेकर सड़कों पर उतर आए थे। किसी के हाथ में तख्ती थी, तो किसी के चेहरे पर अपने आशियाने को खोने का डर साफ दिखाई दे रहा था। 30–40 साल पुराने घरों पर मंडरा रहे खतरे के खिलाफ 87 कॉलोनियों के लोग एकजुट होकर शांति मार्च में शामिल हुए और सरकार से राहत की मांग की।
महिलाओं और बुजुर्गों की बड़ी भागीदारी
सुबह होते-होते श्योपुर चौराहे पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। महिलाएं, बुजुर्ग, युवा और बच्चे—हर वर्ग के लोग इस मार्च में शामिल हुए। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के दिन आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में महिलाओं की बड़ी भागीदारी देखने को मिली। कई महिलाएं अपने छोटे बच्चों का हाथ थामे थीं, तो कई बुजुर्ग लाठी के सहारे चलते हुए भी मार्च में शामिल होकर अपने घर बचाने की आवाज बुलंद कर रहे थे।
तख्तियों और नारों से गूंजा रास्ता
प्रदर्शनकारियों ने श्योपुर चौराहे से गुलाब विहार होते हुए पिंजरापोल गौशाला तक पैदल मार्च निकाला। रास्ते भर लोगों के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर लिखा था—“अवैध कहना बंद करो, नियमन का प्रबंध करो”, “हमारे घर बचाओ” और “जनता को न्याय दो”। मार्च के दौरान लोगों की भावनाएं साफ झलक रही थीं और कई लोग अपने घरों को बचाने की गुहार लगा रहे थे।
हनुमान चालीसा पाठ और यज्ञ से मांगी राहत
मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों ने सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और सरकार को सद्बुद्धि देने के लिए यज्ञ-हवन भी किया। आंदोलन को शांतिपूर्ण बनाए रखने की अपील की गई। कुछ समय के लिए सड़क पर जाम जैसी स्थिति भी बनी, जब बड़ी संख्या में लोग सड़क पार कर रहे थे और कुछ प्रदर्शनकारी वहीं बैठ गए। हालांकि पुलिस ने समझाइश कर स्थिति को नियंत्रित कर लिया।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी चिंता
इस आंदोलन की पृष्ठभूमि फरवरी में आया वह न्यायालय आदेश है, जिसमें राजस्थान हाईकोर्ट ने राजस्थान आवासन मंडल को तीन सप्ताह के भीतर जमीन खाली कराने और रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे। इस आदेश के बाद इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवारों के बीच अपने घरों पर बुलडोजर चलने की आशंका गहरा गई है।
संघर्ष समिति ने सरकार से मांगा समाधान
संघर्ष समिति के अध्यक्ष रघुनंदन सिंह हाड़ा और महासचिव परशुराम चौधरी ने बताया कि इन कॉलोनियों में लोग पिछले 30 से 40 वर्षों से रह रहे हैं। उनका कहना है कि अधिकांश लोगों ने अपनी जीवनभर की बचत और बैंक से कर्ज लेकर यहां मकान बनाए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन क्षेत्रों में बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाएं दी हैं, इसलिए अब इन्हें अवैध बताना लोगों के साथ अन्याय है।
स्थानीय लोगों की भावुक अपील
प्रदर्शन में शामिल स्थानीय लोगों की पीड़ा भी साफ दिखाई दी। गुलाब विहार की एक महिला ने कहा, “हमने बच्चों के भविष्य के लिए यहां घर बनाया था। अगर घर ही टूट गया तो हम कहां जाएंगे?” वहीं एक बुजुर्ग ने भावुक होकर कहा, “पूरी जिंदगी की कमाई लगाकर यह मकान बनाया है। अगर बुलडोजर चला तो हम सड़क पर आ जाएंगे।”
व्यापारियों ने भी दिया समर्थन
इस आंदोलन को स्थानीय व्यापारियों का भी खुला समर्थन मिला। श्योपुर व्यापार मंडल ने सुबह 10 से 12 बजे तक बाजार बंद रखकर आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई। बड़ी संख्या में व्यापारी भी पैदल मार्च में शामिल हुए। व्यापारियों का कहना है कि इन कॉलोनियों में रहने वाले हजारों परिवार स्थानीय बाजार से जुड़े हुए हैं और यदि कॉलोनियां उजड़ीं तो इसका असर पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
बड़े आंदोलन और चुनाव बहिष्कार की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि 19 मार्च 2026 को उच्च न्यायालय में होने वाली सुनवाई के दौरान कॉलोनीवासियों का पक्ष मजबूती से रखा जाए और लंबे समय से बसी इन कॉलोनियों को नियमित किया जाए। आंदोलनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह आंदोलन और बड़ा रूप ले सकता है। साथ ही आने वाले निकाय चुनाव में मतदान बहिष्कार जैसे कड़े कदम उठाने पर भी विचार किया जा सकता है।
फिलहाल हजारों परिवारों की एक ही गुहार है- हमारे आशियाने बचा लो।”
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