dubai se bani fake email haryana brokers sold taekwondo certificates rajasthan sog busted scam दुबई से बनी फर्जी ई-मेल, हरियाणा के दलालों ने बेचे ताइक्वांडो सर्टिफिकेट; राजस्थान SOG ने फोड़ा भांडा, Jaipur Hindi News - Hindustan
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दुबई से बनी फर्जी ई-मेल, हरियाणा के दलालों ने बेचे ताइक्वांडो सर्टिफिकेट; राजस्थान SOG ने फोड़ा भांडा

सरकारी नौकरी पाने की होड़ में कुछ लोगों ने ऐसा जाल बुना कि खेल कोटे से शिक्षक बनने का रास्ता ही फर्जी सर्टिफिकेट और नकली ई-मेल के सहारे तैयार कर लिया।

Sat, 14 March 2026 11:06 AMSachin Sharma हिन्दुस्तान टाइम्स, जयपुर
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दुबई से बनी फर्जी ई-मेल, हरियाणा के दलालों ने बेचे ताइक्वांडो सर्टिफिकेट; राजस्थान SOG ने फोड़ा भांडा

सरकारी नौकरी पाने की होड़ में कुछ लोगों ने ऐसा जाल बुना कि खेल कोटे से शिक्षक बनने का रास्ता ही फर्जी सर्टिफिकेट और नकली ई-मेल के सहारे तैयार कर लिया। राजस्थान में ग्रेड थर्ड टीचर सीधी भर्ती परीक्षा-2022 में सामने आए इस बड़े फर्जीवाड़े ने दिखा दिया कि किस तरह दलालों, तकनीकी चालाकी और सिस्टम की कमजोरियों का इस्तेमाल कर सरकारी नौकरी हासिल की जा रही थी। लेकिन इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश एक मामूली सी गलती से हुआ—ई-मेल में लिखे एक शब्द की गलत स्पेलिंग से।

स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) की जांच में सामने आया कि खेल कोटे से चयनित कई अभ्यर्थियों ने ताइक्वांडो के फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर शिक्षक पद हासिल कर लिया था। जांच के बाद एसओजी ने 19 अभ्यर्थियों सहित कुल 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए और उन्हें सत्यापित दिखाकर सरकारी नौकरी हासिल कर ली।

Sog against fake teachers

ई-मेल की एक गलती से टूटा पूरा जाल

पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एसओजी को एक संदिग्ध ई-मेल का स्क्रीनशॉट मिला। यह ई-मेल ताइक्वांडो फेडरेशन के नाम से भेजा गया था, जिसमें 39 अभ्यर्थियों के खेल प्रमाण पत्रों का सत्यापन करने की बात लिखी थी।

पहली नजर में यह ई-मेल सामान्य लगा, लेकिन जब अधिकारियों ने ध्यान से देखा तो “Secretary” शब्द की स्पेलिंग गलत पाई गई। इतनी बड़ी राष्ट्रीय संस्था के आधिकारिक ई-मेल में ऐसी गलती होना शक पैदा करने के लिए काफी था। यहीं से जांच की दिशा बदल गई और एसओजी ने ई-मेल की तकनीकी पड़ताल शुरू की।

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दुबई से बनाई गई नकली पहचान

तकनीकी जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ। जिस ई-मेल आईडी से प्रमाण पत्रों को सही बताया गया था, वह असली नहीं बल्कि जीमेल पर बनाई गई फर्जी आईडी थी। जांच में पता चला कि यह ई-मेल दुबई से बनाया गया था और इसका इस्तेमाल विमलेंदु कुमार झा नाम का व्यक्ति कर रहा था।

जब ताइक्वांडो फेडरेशन ऑफ इंडिया की आधिकारिक सूची खंगाली गई तो उसमें विमलेंदु कुमार झा नाम का कोई पदाधिकारी नहीं मिला। इसके बाद एसओजी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

दरअसल, आरोपियों ने फेडरेशन की असली ई-मेल आईडी से मिलती-जुलती एक फर्जी आईडी बना ली थी और उसी के जरिए शिक्षा विभाग को प्रमाण पत्रों के सत्यापन की रिपोर्ट भेज दी जाती थी।

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ऐसे रचा गया पूरा षड्यंत्र

जांच में सामने आया कि प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने खिलाड़ी कोटे से चयनित अभ्यर्थियों के खेल प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराने के लिए ताइक्वांडो फेडरेशन को ई-मेल भेजा था।

आरोपियों को इस प्रक्रिया की भनक लग गई। इसके बाद उन्होंने फेडरेशन की आधिकारिक ई-मेल से मिलती-जुलती आईडी तैयार कर ली।

फर्जी ई-मेल आईडी से शिक्षा विभाग को ऐसी रिपोर्ट भेजी गई जिसमें फर्जी प्रमाण पत्र रखने वाले अभ्यर्थियों के दस्तावेज सही बताए गए। विभाग ने उस रिपोर्ट को असली मानकर कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी कर दी।

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दलालों का नेटवर्क और पैसों का खेल

जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे खेल में दलालों का एक नेटवर्क सक्रिय था। ये लोग अभ्यर्थियों से संपर्क कर उन्हें खेल कोटे से सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। इसके बदले मोटी रकम ली जाती थी और फिर फर्जी खेल प्रमाण पत्र तैयार करवाए जाते थे।

पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में पांच दलालों की भूमिका सामने आई है। इनमें सीकर के ओमप्रकाश महला, फलौदी जिले के बाप निवासी वेदप्रकाश पालीवाल, भीलवाड़ा में पदस्थापित पीटीआई योगेंद्र कुमार, जोधपुर के रघुवीर चौधरी और हरियाणा के रोहतक निवासी सतीश डुल शामिल हैं।

पत्नी को दिलाने के लिए भी रचा गया खेल

जांच में एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया। आरोपी गजानंद प्रजापत ने अपनी पत्नी बसंती उर्फ बंटी प्रजापत के लिए दलालों को पैसे देकर फर्जी खेल प्रमाण पत्र बनवाया था। उसी प्रमाण पत्र के आधार पर उसने खेल कोटे से आवेदन किया और नौकरी हासिल कर ली।

14 जिलों में एक साथ कार्रवाई

एसओजी ने इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए राजस्थान के 14 जिलों और हरियाणा में एक साथ छापेमारी की। जोधपुर, जालोर, बीकानेर, हनुमानगढ़, श्रीगंगानगर, भीलवाड़ा, जयपुर ग्रामीण, सीकर, झुंझुनूं, नागौर, बालोतरा और फलौदी सहित कई जगहों पर कार्रवाई कर आरोपियों को हिरासत में लिया गया।

पूछताछ के बाद 20 लोगों को गिरफ्तार किया गया और उन्हें जयपुर लाकर आगे की जांच शुरू की गई।

अब जांच पैसों की कड़ी तक

फिलहाल एसओजी यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अभ्यर्थियों से कितनी रकम ली गई और यह पैसा किन-किन लोगों तक पहुंचा।

जांच अधिकारियों का मानना है कि यह नेटवर्क इससे भी बड़ा हो सकता है और आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

डीएसपी बाबूलाल मुरारिया के नेतृत्व में चल रही जांच अब उस पूरी कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है, जिसने खेल प्रतिभा के नाम पर सरकारी नौकरी को एक संगठित अपराध में बदल दिया।

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