देश में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल; दांडी मार्च की वर्षगांठ पर जयपुर में गहलोत का बड़ा बयान
नमक सत्याग्रह और ऐतिहासिक दांडी मार्च की वर्षगांठ के अवसर पर गुरुवार को जयपुर में भारत सेवा संस्थान के तत्वावधान में एक ‘साइलेंट मार्च’ (मौन जुलूस) का आयोजन किया गया।

नमक सत्याग्रह और ऐतिहासिक दांडी मार्च की वर्षगांठ के अवसर पर गुरुवार को जयपुर में भारत सेवा संस्थान के तत्वावधान में एक ‘साइलेंट मार्च’ (मौन जुलूस) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में प्रदेश के कई कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। मार्च में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा भी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान गहलोत ने 1930 के दांडी मार्च का जिक्र करते हुए वर्तमान राजनीतिक हालात पर तीखा हमला बोला और कहा कि आज देश में लोकतंत्र खतरे में है।
दांडी मार्च का ऐतिहासिक संदर्भ
मौन जुलूस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने संबोधन में महात्मा गांधी के नेतृत्व में हुए 1930 के नमक सत्याग्रह को याद किया। उन्होंने कहा कि उस समय अंग्रेजों ने नमक पर कर लगाकर जनता पर अन्याय किया था, जिसके विरोध में महात्मा गांधी ने साबरमती से दांडी तक ऐतिहासिक यात्रा निकाली थी।
गहलोत ने कहा कि गांधीजी की यह यात्रा करीब 24 दिनों तक चली और लगभग 400 किलोमीटर लंबी थी, जिसने दुनिया का ध्यान भारत की आजादी की लड़ाई की ओर खींचा था। उन्होंने कहा कि यह आंदोलन सिर्फ नमक कानून के खिलाफ नहीं था, बल्कि ब्रिटिश शासन के अन्याय के खिलाफ पूरे देश की आवाज बन गया था।
“देश में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल”
गहलोत ने मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि दांडी मार्च की वर्षगांठ आज और भी ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने कहा कि आज देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर दबाव बढ़ रहा है और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
उन्होंने कहा,जब अंग्रेजों ने नमक पर टैक्स लगाया था, तब महात्मा गांधी की 24 दिनों की यात्रा ने पूरी दुनिया को संदेश दिया था कि भारत में बड़ा आंदोलन चल रहा है। आज इस दिन को मनाने का विशेष अर्थ है, क्योंकि देश में लोकतंत्र खतरे में है और अघोषित आपातकाल जैसा माहौल बन गया है।”
गहलोत ने कहा कि ऐसे समय में गांधीवादी विचारों और शांतिपूर्ण विरोध की परंपरा को याद करना जरूरी है, ताकि लोकतंत्र की रक्षा की जा सके।
केंद्र सरकार के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इस मौन जुलूस के उद्देश्य को स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम केवल ऐतिहासिक स्मृति का आयोजन नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक प्रतीकात्मक संदेश है।
डोटासरा ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता इस मार्च के माध्यम से देशवासियों को यह याद दिलाना चाहते हैं कि भारत किसी एक पार्टी या सरकार का नहीं है, बल्कि यहां के 144 करोड़ नागरिकों का देश है।
उन्होंने कहा, हम इस मौन जुलूस के जरिए यह संदेश देना चाहते हैं कि लोकतंत्र में जनता की आवाज सर्वोपरि होती है। किसी भी सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि देश की असली ताकत जनता है।
तख्तियां लेकर निकले कार्यकर्ता
इस ‘साइलेंट मार्च’ में बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। सभी प्रतिभागियों ने हाथों में तख्तियां लेकर शांतिपूर्ण तरीके से पैदल मार्च किया। तख्तियों पर लोकतंत्र, संविधान और गांधीवादी विचारधारा से जुड़े संदेश लिखे गए थे।
मार्च के दौरान पूरे कार्यक्रम को शांतिपूर्ण और अनुशासित तरीके से आयोजित किया गया। आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को गांधीवादी मूल्यों, अहिंसा और लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना है।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने यह संकल्प भी लिया कि वे देश में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा और समाज में शांति व सद्भाव बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे।
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