पश्चिमी राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों से निकलेगा पानी! ताजा सर्वे में बड़ी खुशखबरी
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में हेलीकॉप्टर से जमीन का सर्वे किया था। इस सर्वे में पश्चिम राजस्थान के जल विहीन क्षेत्र में पानी की समस्या के स्थायी समाधान की संभावनाएं जगी हैं।

पश्चिमी राजस्थान के सूखाग्रस्त इलाकों में पानी की समस्या के समाधान को लेकर उम्मीद भरी खबर सामने आई है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने वर्ष 2021-22 में राजस्थान के विभिन्न हिस्सों में हेलीकॉप्टर से जमीन का सर्वे किया था। इस सर्वे में पश्चिम राजस्थान के जल विहीन क्षेत्र में पानी की समस्या के स्थायी समाधान की संभावनाएं जगी हैं।
इन संस्थाओं की मदद से हुआ सर्वे
ये सर्वे केंद्रीय भू जल बोर्ड, राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) हैदराबाद और राजस्थान सरकार के भू-जल विभाग ने मिलकर किया है। ये सर्वे जैसलमेर जिले के पोकरण विधानसभा के फालसूड से छायन एवं धुडसर से राजगढ़ तक के क्षेत्र में किया गया है। इसी सर्वे में खुलासा हुआ है कि वहां भूजल के भंडार मौजूद हैं।
जहां अब तक नहीं था पानी, वहां भी निकलने की उम्मीद
राष्ट्रीय भूभौतिकीय अनुसंधान संस्थान (NGRI) हैदराबाद द्वारा जैसलमेर जिला कलेक्टर एवं राज्य भूजल बोर्ड (एसजीडब्ल्यूबी) को सर्वेक्षण की रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें कहा गया है कि ऐसे स्थानों पर भू जल मिलने की जानकारी मिली है, जहाँ पर अभी तक के अनुसन्धानों में भू जल मिलने में सफलता नहीं मिली थी।
वरिष्ठ वैज्ञानिक ने बताई उम्मीद भरी बात
वरिष्ठ भू जल वैज्ञानिक डॉ नारायण दास इणखिया ने बताया कि जैसलमेर जिले के पोकरण तहसील का अधिकांश हिस्सा भू जल की दृष्टि से कम पानी वाला माना जाता है। भू भौतिकीय सर्वेक्षण में ऐसे गांवों में भू जल मिलने के आसार जगे हैं, जहाँ बिल्कुल भी पानी की सम्भावना नहीं थी।
पोकरण के 64 हिस्सों में पानी की उम्मीद
उन्होंने बताया कि जिले के पोकरण क्षेत्र में किये गये सर्वेक्षण में कुल 64 स्थानों में भू जल की उपलब्धता बताई गयी है। इन स्थानों में बड़ी संख्या में स्थान ऐसे हैं जहाँ अब तक पहले हुए अनुसंधान में पानी नहीं मिल पाया था। इन स्थानों मे ज्यादातर वे गांव हैं जहाँ पेयजल की किल्लत आम रहती है।
भू-जल का मिलना खास उपलब्धि
पोकरण, भनियाणा उपखंड में नहर का पानी हालांकि पेयजल के लिए उपलब्ध हो गया है, लेकिन भू जल की उपलब्धता बताने वाले इन स्थानों पर नलकूप निर्माण से आपात परिस्थितियों में लोगों को पानी उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। फलसुंड क्षेत्र में भू जल का मिलना एक विशेष उपलब्धि होगी
15 हजार वर्ग किलोमीटर क्षेत्र का हुआ सर्वे
जैसलमेर जिले में करीब 15 हजार वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में भू भौतिकीय सर्वेक्षण किया गया था। उन्होंने बताया कि हेलीबोर्न सर्वे हेलिकोप्टर माध्यम से की जाने वाला सर्वेक्षण है। इसमें भू जल सर्वेक्षण के लिए. इलेक्ट्रो मेग्नेटीक सर्वेक्षण एवं भू भौतिकीय दोनों तरह की प्रक्रिया से भू जल की खोज की जाती है जिससे कम क्षेत्र में भी सटीक परिणाम प्राप्त होते हैं।




साइन इन