After years of living together, an elderly couple sought a divorce, High Court delivered verdict पत्नी कलह करती है; 58 साल साथ रहने के बाद तलाक मांगने पहुंचा 75 वर्षीय पति; कोर्ट ने सुनाया यह फैसला, Rajasthan Hindi News - Hindustan
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पत्नी कलह करती है; 58 साल साथ रहने के बाद तलाक मांगने पहुंचा 75 वर्षीय पति; कोर्ट ने सुनाया यह फैसला

कोर्ट ने पति की उस दलील को भी नहीं माना, जिसमें उसने पत्नी द्वारा दर्ज कराए आपराधिक मामले को तलाक मांगने की वजह बताया था। अदालत ने कहा कि केवल एक प्राथमिकी दर्ज कराना भी क्रूरता का आधार नहीं बनता है।

Fri, 13 Feb 2026 06:43 PMSourabh Jain वार्ता, जयपुर, राजस्थान
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पत्नी कलह करती है; 58 साल साथ रहने के बाद तलाक मांगने पहुंचा 75 वर्षीय पति; कोर्ट ने सुनाया यह फैसला

एक ऐसे दौर में जहां छोटी-छोटी बातों पर पति-पत्नी के बीच रिश्तों में दरार आ रही है और शादियां टूट रही हैं, राजस्थान से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। क्योंकि यहां उच्च न्यायालय ने वैवाहिक संबंधों की पवित्रता और उनकी मजबूती बनाए रखने को लेकर एक मिसाल कायम करने वाला फैसला सुनाया है। अदालत ने 58 साल साथ गुजारने के बाद तलाक की मांग को लेकर अदालत की शरण में पहुंचे एक बुजुर्ग दंपति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया और स्पष्ट किया है कि संपत्ति विवाद या सामान् पारिवारिक मतभेद को तलाक मांगने का कानूनी आधार नहीं माना जा सकता। यह याचिका बुजुर्ग पति ने लगाई थी।

बुजुर्ग बोला- आए दिन घर में कलह करती है

यह मामला एक ऐसे दंपति से जुड़ा है, जिनकी शादी 1967 में हुई थी। इस दौरान 78 वर्षीय पति ने उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर अपनी 75 वर्षीय पत्नी से तलाक की मांग की थी। पति की मुख्य दलील यह थी कि सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के बाद पत्नी का व्यवहार अचानक बदल गया और वह पैसों के लिए झगड़ने लगी। पति ने कहा कि पत्नी ने उनके खिलाफ आपराधिक मामला भी दर्ज कराया और संपत्ति के बंटवारे को लेकर आए दिन घर में कलह करने लगी, जिसे उन्होंने 'क्रूरता' मानते हुए तलाक की याचिका लगाई।

कोर्ट ने कहा- छोटी-मोटी बातों पर तलाक नहीं लेते

हालांकि हाई कोर्ट ने उनकी मांग को नामंजूर कर दिया और कहा कि दंपति ने शादी के बाद 1967 से साल 2026 तक लगभग 58 साल तक सामान्य वैवाहिक जीवन बिताया है, ऐसे में अब उनके तलाक के अनुरोध को असंवैधानिक और अनुचित करार दिया जाता है। अदालत ने अपने फैसले में याचिका को खारिज करने की वजह बताते हुए कहा कि वैवाहिक जीवन में छोटी-मोटी खींचतान, आपसी आरोप-प्रत्यारोप और दैनिक जीवन की सामान्य परेशानियों को क्रूरता या तलाक का आधार नहीं माना जा सकता। विशेष रूप से जब पति-पत्नी दोनों ने इतने वर्षों तक सहयोग और सहनशीलता के साथ जीवन व्यतीत किया हो, तब अचानक उत्पन्न हुए संपत्ति विवाद को तलाक का कारण मानना उचित नहीं है।

कोर्ट ने पति की उस दलील को भी नहीं माना, जिसमें उसने पत्नी द्वारा दर्ज कराए आपराधिक मामले को तलाक मांगने की वजह बताया था। अदालत ने कहा कि केवल एक प्राथमिकी दर्ज कराना भी क्रूरता का आधार नहीं बनता है।

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कोर्ट ने कहा- पूरे वैवाहिक जीवन पर नजर डालना जरूरी

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी रेखांकित किया कि तलाक के मामलों में वैवाहिक जीवन का ओवरऑल मूल्यांकन करना भी जरूरी है। क्योंकि अगर पति-पत्नी के बीच विवाद से उनका वैवाहिक जीवन गंभीर रूप से प्रभावित नहीं हुआ है और वास्तविक क्रूरता या विवाह के स्थायी टूटने के कोई ठोस सबूत उपलब्ध नहीं हैं, तो तलाक देना न्यायोचित नहीं माना जाएगा।

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