दिल्ली में यमुना नदी ऐसे होगी निर्मल, हिमाचल और उत्तराखंड के 3 बांधों से मिलेगा जल
दिल्ली में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए चल रहे कार्यों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बनने वाले तीन बांध अहम भूमिका निभाएंगे। इसमें लगभग 7 से 8 साल का समय लगेगा। इनके तैयार होने से यमुना में ज्यादा पानी छोड़ा जाएगा और यह हमेशा स्वच्छ बनी रहेगी।

दिल्ली में यमुना नदी को स्वच्छ बनाने के लिए चल रहे कार्यों में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में बनने वाले तीन बांध अहम भूमिका निभाएंगे। इसमें लगभग 7 से 8 साल का समय लगेगा। इनके तैयार होने से यमुना में ज्यादा पानी छोड़ा जाएगा और यह हमेशा स्वच्छ बनी रहेगी। इनमें उत्तराखंड के देहरादून/ टिहरी गढ़वाल में यमुना पर बन रहा लखवार बांध, हिमाचल प्रदेश के सिरमौल जिला में गिरी नदी पर बन रहा रेणुकाजी बांध और दोनों राज्यों में टोंस नदी पर बन रहा किशाऊ बांध शामिल है।
जानकारी के अनुसार, यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों पर बीते दिनों केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक बैठक हुई थी। इसमें एक तरफ जहां यमुना को स्वच्छ बनाने के लिए तत्काल आवश्यकता वाले सुझाव बताए गए, तो वहीं दूसरी तरफ दीर्घकालीक योजनाओं को लेकर भी विस्तार से चर्चा की गई। उन्हें बताया
गया कि हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुल तीन बांध बनाने का कार्य चल रहा है। इनमें से सभी बांधों की कुल क्षमता का 20 फीसदी पानी दिल्ली को यमुना का ई-फ्लो बढ़ाने के लिए मिलेगा। सूत्रों ने बताया कि इन बांधों के बनने से दिल्ली को 700 क्यूसेक से ज्यादा पानी यमुना में ई- फ्लो के लिए मिलने लगेगा।

'अशोधित सीवेज, अधूरे प्लांट और प्रोजेक्ट में देरी यमुना में प्रदूषण के बड़े कारण'
भाषा की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने पिछले साल दिसंबर महीने की शुरुआत में कहा था कि राजधानी में यमुना नदी लगातार प्रदूषित रहने की मुख्य वजह अशोधित सीवेज का प्रवाह, कई औद्योगिक क्षेत्रों में प्रवाह ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) का अभाव, प्रोजेक्ट्स में देरी और ठोस कचरा प्रोसेसिंग क्षमता में कमी है।
राज्यसभा को एक प्रश्न के लिखित उत्तर में जल शक्ति राज्य मंत्री राज भूषण चौधरी ने बताया था कि अगस्त 2025 तक दिल्ली में 414 एमएलडी का सीवेज ट्रीटमेंट अंतर बना हुआ था। उन्होंने कहा कि कई स्वीकृत औद्योगिक क्षेत्रों में साझा ईटीपी उपलब्ध नहीं हैं और सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं को पूरा करने तथा अपग्रेडेशन में देरी का सिलसिला जारी है। मंत्री ने कहा कि दिल्ली में हर दिन 11,862 टन ठोस कचरा उत्पन्न होता है, जबकि उसकी प्रोसेसिंग क्षमता केवल 7,641 टन हर दिन है, जिससे 4,221 टन का अंतर रह जाता है।
उन्होंने बताया कि यमुना नदी दिल्ली में पल्ला के पास प्रवेश करती है, जहां पानी की उपलब्धता और जल ग्रहण क्षेत्र से प्रवाह के आधार पर वर्ष भर जल गुणवत्ता में उतार-चढ़ाव होता है। मंत्री ने बताया कि राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (एनएमसीजी) राज्यों को वित्तीय सहायता के माध्यम से सहयोग कर रहा है। नमामि गंगे कार्यक्रम के तहत यमुना पुनर्जीवन के लिए 6,534 करोड़ रुपये की 35 परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं, जिनसे 2,243 एमएलडी की सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इनमें से 21 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।




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